
मुंगेली/मंगलवार की शाम मुंगेली में बदले मौसम ने लोगों को भीषण तपिश और गर्मी से कुछ पल के लिए जरूर राहत दी थी, लेकिन यह राहत बिजली विभाग की लचर व्यवस्था के चलते बहुत जल्द आफत में बदल गई। अंधड़ और हल्की बारिश के साथ ही शहर की बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई,जिससे कई इलाके पूरी रात अंधेरे में डूबे रहे।
शाम से शुरू हुआ बिजली संकट,कई इलाकों में पूरी रात रही बत्ती गुल
मंगलवार शाम करीब 6 बजे जैसे ही अंधड़ और बारिश का दौर शुरू हुआ शहर की बिजली गुल हो गई। लोगों को लगा कि यह सामान्य मेंटेनेंस का हिस्सा है और बिजली जल्द आ जाएगी,लेकिन उनकी यह उम्मीद जल्द ही निराशा में बदल गई। देखते ही देखते रात बीत गई,लेकिन कई मोहल्लों में बिजली वापस नहीं आई। भीषण उमस और अंधेरे के बीच आम जनता परेशान रही।
‘फ्यूज कॉल सेंटर’ बना सफेद हाथी,अधिकारियों ने साधी चुप्पी
बिजली गुल होने के बाद परेशान उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग के फ्यूज कॉल सेंटर पर लगातार संपर्क करने का प्रयास किया,लेकिन एक ही नंबर होने के कारण वह लगातार व्यस्त आता रहा। जब उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की,तो विभाग की संवेदनहीनता खुलकर सामने आ गई।
अधिकारियों के नम्बर स्विच ऑफ,और जिनका चालू उन्होंने नहीं उठाया फोन
कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने अपना मोबाइल ही बंद कर लिया। और जिन अधिकारियों के नंबर चालू थे,उन्होंने उपभोक्ताओं का फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा।
मेंटेनेंस के दावों की खुली पोल
सवाल यह उठता है कि बिजली विभाग समय-समय पर ‘मेंटेनेंस’ के नाम पर घंटों बिजली कटौती करता है और दावा करता है कि अब व्यवस्था दुरुस्त कर दी गई है। लेकिन जैसे ही मामूली अंधड़ या हल्की बारिश होती है,विभाग के उन तमाम दावों की पोल खुल जाती है। लोगों का कहना है कि बिजली विभाग को अच्छी तरह से मालूम है कि मई से अक्तूबर तक हर साल इसी तरह के हालात होते हैं फिर भी इनकी तैयारियों में कमी क्यों होती है क्या बिजली विभाग के अधिकारी सिर्फ औपचारिकता निभा कर अपनी जिम्मेदारी निभाने का नाटक करते हैं
स्मार्ट मीटर से वसूली,पर सुविधा देने के टाइम ‘स्टाफ की कमी’ का बहाना
एक तरफ सरकार ‘सरप्लस’ बिजली देने और 24 घंटे आपूर्ति का वादा करती है,वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ता समय पर बिल भरने के लिए मजबूर हैं। विभाग अपने आपको ‘अपडेट’ बताते हुए स्मार्ट मीटर लगाकर वसूली तो कर रहा है,लेकिन जब सुविधा देने की बात आती है तो विभाग हमेशा ‘कर्मचारी कम हैं’ का पुराना घिसा-पिटा रोना रोता है।
आक्रोश की आग कभी भी ले सकता है आंदोलन का रूप
बिजली विभाग की इस उदासीनता के कारण शहर की आम जनता में जबरदस्त आक्रोश पनप रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि बिजली विभाग इसी तरह अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ता रहा और जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करता रहा,तो यह आक्रोश जल्द ही किसी बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।
क्या जिला प्रशासन इस लचर व्यवस्था पर कोई सख्त कदम उठाएगा या मुंगेली की जनता को इसी तरह अंधेरे और विभाग की लापरवाही के भरोसे छोड़ दिया जाएगा? यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।



