मुंगेली/शहर में बिना वैधानिक अनुमति और स्वीकृत ले-आउट के धड़ल्ले से काटी जा रही अवैध कॉलोनियों का मामला एक बार फिर गरमा गया है। नगर पालिका परिषद मुंगेली के पिछले दो वर्षों (2024 से 2026) के आधिकारिक अभिलेखों की पड़ताल एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश करती है। कागजों पर कार्रवाई की लंबी-चौड़ी फेहरिस्त दर्ज है—नोटिस,अंतिम चेतावनी,अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश,बिजली कनेक्शन काटने के पत्र और पुलिस बल की मांग। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या जमीनी स्तर पर वास्तव में कोई ठोस कार्रवाई हुई या पूरी प्रक्रिया केवल फाइलों तक ही सीमित रह गई?
2024 से शुरू हुआ नोटिस का सिलसिला
नगर पालिका की फाइलों के मुताबिक,अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ पहली बड़ी कार्रवाई 15 फरवरी 2024 को अंबेडकर वार्ड क्रमांक-13 स्थित “स्वर्ण वाटिका”परियोजना पर शुरू हुई।
पहला नोटिस:कॉलोनाइजर को 7 दिनों के भीतर प्लॉटिंग रोकने,लाइसेंस और स्वीकृत ले-आउट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया।
अंतिम नोटिस (27 फरवरी 2024):केवल 12 दिनों के भीतर जारी इस दूसरे नोटिस में राजस्व जांच का हवाला देते हुए जमीन को मूल स्वरूप में लौटाने का फरमान जारी किया गया,अन्यथा पालिका द्वारा खुद निर्माण तोड़कर खर्च वसूलने की चेतावनी दी गई।
अनुत्तरित सवाल:क्या ‘स्वर्ण वाटिका’ पर वास्तव में बुलडोजर चला? इसका सार्वजनिक रिकॉर्ड फाइलों से नदारद है।
2026:पंडरिया मार्ग और अन्य मामलों में फिर छिड़ी ‘कागजी जंग’
करीब एक साल की खामोशी के बाद 5 जनवरी 2026 को मुंगेली-पंडरिया मार्ग पर विकसित हो रही एक कॉलोनी के संबंध में चार लोगों को नोटिस जारी किए गए।
निर्माण कार्य तुरंत रोकने,सड़कें हटाने और भूखंडों की बिक्री बंद करने का आदेश दिया गया।
मैसर्स राज प्रॉपर्टी डेवलपर्स,सुरज मक्कड़ को पूर्व में जारी नोटिसों का पालन न करने पर एकपक्षीय कार्रवाई और खर्च वसूली की चेतावनी का अंतिम नोटिस थमाया गया।
अंतर-विभागीय पत्राचार और ’16 मई’ का सस्पेंस
कार्रवाई को असरदार बनाने के लिए नगर पालिका ने संयुक्त संचालक,सीएसपीडीसीएल,एसडीएम,तहसीलदार और जिला पंजीयक कार्यालय को पत्र लिखकर बिजली कनेक्शन काटने और रजिस्ट्री पर रोक लगाने का अनुरोध किया।

16 मई 2026 की प्रस्तावित कार्रवाई
नगर पालिका ने 15 मई को ही सिटी कोतवाली से पर्याप्त पुलिस बल और महिला पुलिसकर्मियों की मांग की थी ताकि 16 मई को सुबह 7 बजे से अवैध निर्माण ढहाए जा सकें। लेकिन क्या उस दिन कोई बुलडोजर चला? क्या सीसी रोड तोड़ी गई या कोई गिरफ्तारी हुई? नगर पालिका के रिकॉर्ड्स इस पर पूरी तरह मौन हैं।
आम नागरिकों और खरीदारों का बड़ी समस्या
अवैध कॉलोनियों का सबसे बुरा असर उन मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ता है जो अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर जमीन खरीदते हैं। बाद में कॉलोनी के अवैध घोषित होने पर रजिस्ट्री,बिजली कनेक्शन और बुनियादी सुविधाओं के लिए आम नागरिक भटकते रह जाते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह:किसी भी भूखंड या कॉलोनी में निवेश करने से पहले खरीदारों को कॉलोनाइजर लाइसेंस,स्वीकृत ले-आउट,टीएंडसीपी की अनुमति और भूमि अभिलेखों की गहनता से जांच कर लेनी चाहिए।
जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने कहाकि
निष्ठा पाण्डेय तिवारी,ADM
“संबंधित मामले में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मुख्य नगर पालिका अधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। जांच प्रक्रिया पूरी कर नियमों के अनुरूप सख्त कदम उठाए जाएंगे।”
कार्तिकेश्वर जांगड़े,थाना प्रभारी,सिटी कोतवाली
“नगर पालिका परिषद मुंगेली द्वारा 16 मई 2026 को प्रस्तावित कार्रवाई हेतु पुलिस बल की मांग की गई थी और जिले से जवानों की ड्यूटी भी लगाई गई थी। हालांकि किसी कारणवश प्रस्तावित कानून-व्यवस्था ड्यूटी स्थगित हो गई। पुलिस विभाग किसी भी वैधानिक कार्रवाई के दौरान सुरक्षा देने के लिए सदैव तैयार है।”
होरी सिंह ठाकुर, CMO,नगर पालिका परिषद मुंगेली
“पंडरिया रोड स्थित पेट्रोल पंप के पीछे ‘स्वर्ण वाटिका’ नाम से बिना NOC और वैधानिक अनुमति के प्लॉटिंग एवं सीसी रोड का निर्माण किया गया था। इस संबंध में दो बार नोटिस और अंतिम नोटिस जारी किया जा चुका है। अब संबंधित मामले में परिवार वाद न्यायालय में दायर किया जाएगा और अदालत के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई होगी।”
आयुष शुक्ला,पार्षद प्रतिनिधि,अंबेडकर वार्ड
“शहर में अवैध प्लॉटिंग का खेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भू-माफिया लोगों की मेहनत की कमाई से खिलवाड़ कर रहे हैं। बिना अनुमति चल रही परियोजनाओं के दोषियों पर तत्काल FIR दर्ज होनी चाहिए। साथ ही दो सालों से नोटिस जारी होने के बावजूद कार्रवाई में हुई देरी की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।”
दो वर्षों में दर्जनों नोटिस,चेतावनियों और पत्राचार के बाद भी यदि शहर में अवैध प्लॉटिंग का दायरा बढ़ रहा है,तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक जवाबदेही और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से भू-माफियाओं पर शिकंजा कसता है या यह मामला फाइलों के बीच ही दबकर रह जाता है।



