मुंगेली/अक्षय तृतीया (अक्ति) के शुभ मुहूर्त के साथ ही जिले में वैवाहिक आयोजनों की धूम मची हुई है। शहर से लेकर गांव की पगडंडियों तक खुशियों का माहौल है। इस बार शादियों में न केवल चमक-धमक बढ़ी है,बल्कि जश्न के तौर-तरीकों में भी बड़ा बदलाव आया है। जहां एक ओर डीजे और धुमाल की थाप पर युवा थिरक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शराब की भारी किल्लत ने मेजबानों की चिंता बढ़ा दी है
डीजे-धुमाल की बढ़ी डिमांड,गूंज रहे एक से एक तरानें
आजकल ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिना डीजे और धुमाल के शादी की कल्पना अधूरी है। आधुनिक लाइटों से सजे धुमाल और ऊंचे बेस वाले डीजे की बुकिंग के लिए मारामारी मची है। पारंपरिक बाजों की जगह अब हाई-टेक साउंड सिस्टम ने ले ली है। शादी के जुलूसों में जब तक डीजे की धमक सुनाई न दे,तब तक युवाओं का उत्साह अधूरा रहता है। आलम यह है कि शादी के सीजन में डीजे संचालकों के पास सांस लेने की फुर्सत नहीं है।
खान-पान के साथ पहनावे में भी ‘रॉयल’ टच
शादी के बाजार में इस बार कपड़ों के ट्रेंड ने सबको चौंका दिया है। ग्रामीण अंचलों में भी अब पारंपरिक साड़ी और धोती-कुर्ता के बजाय डिजाइनर लहंगे,शेरवानी और सूट-बूट का चलन बढ़ गया है। मेहमान भी खुद को सबसे अलग दिखाने के लिए आधुनिक फैशन को अपना रहे हैं। बाजार में लेन-देन के बढ़ते ग्राफ से व्यापारी भी खुश हैं,क्योंकि लोग अपनी हैसियत के मुताबिक बेहतरीन पहनावे और चमक-धमक पर दिल खोलकर खर्च कर रहे हैं
शराब का ‘मान’और शराब की किल्लत
शादी में डीजे और पहनावा जितना जरूरी है,उतना ही महत्वपूर्ण अब ‘शराब’ का इंतजाम हो गया है। कई ग्रामीण परिवारों में यह धारणा बन गई है कि यदि मेहमानों को शराब न परोसी जाए,तो आयोजन की गरिमा कम हो जाएगी। लोग शराब को अपने ‘अभिमान’ से जोड़कर देख रहे हैं।
लोग अब चुटकी लेते हुए कह रहे हैं कि
“डीजे बुक कर लिया,महंगे कपड़े पहन लिए,लेकिन अगर मेहमानों के साथ जाम ना छलकाए तो आयोजन अधूरा
देशी शराब की बढ़ी मांग,सप्लाई पर पड़ा असरग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से देशी शराब की मांग काफी अधिक देखी जा रही है। बढ़ती खपत के चलते सप्लाई व्यवस्था चरमरा गई है। नतीजतन,कई जगहों पर लोग शराब दुकानों से खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। कुछ लोग मजबूरी में महंगी अंग्रेजी शराब खरीद रहे हैं,जिससे उनका बजट बिगड़ रहा है।
सरकारी व्यवस्था के बावजूद संकट
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री की जिम्मेदारी राज्य सरकार द्वारा संभाली जाती है और पूरे प्रदेश में शासकीय शराब दुकानें संचालित की जा रही हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने 67 नई दुकानों को खोलने का भी निर्णय लिया था ताकि आम लोगों को आसानी से शराब उपलब्ध हो सके।
हालांकि,वर्तमान स्थिति इससे विपरीत नजर आ रही है। पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण दुकानों पर भारी भीड़ उमड़ रही है। कई जगहों पर लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है,तब जाकर शराब मिल पा रही है।
राजस्व और व्यवस्था दोनों पर सवाल
इस स्थिति ने एक ओर जहां शराब प्रेमियों को परेशान किया है वहीं सरकार के राजस्व पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। लोगों का मानना है कि जब सरकार ने शराब उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ली है तो उनके द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी चाहिए,ताकि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना रहे।
आबकारी विभाग का आश्वासन
इस पूरे मामले पर आबकारी विभाग के जिला अधिकारी रविशंकर साय ने बताया कि फिलहाल आपूर्ति में कुछ दिक्कतें जरूर आ रही हैं,लेकिन जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाले दिनों में शराब की उपलब्धता सुचारू रूप से बहाल कर दी जाएगी और आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
कुल मिलाकर मुंगेली में शादियां पूरे शबाब पर हैं। डीजे-धुमाल की गूँज और रंग-बिरंगे पहनावे से उत्सव का माहौल तो बना है,लेकिन सरकारी दुकानों में शराब की अनुपलब्धता ने जश्न के रंग में थोड़ा भंग डाल दिया है। अब देखना होगा कि आबकारी विभाग कब तक ‘प्यास’ बुझाने के इंतजाम पुख्ता कर पाता है।



