मुंगेली/जिला प्रशासन की नाक के नीचे कानून की धज्जियां उड़ाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। शहर के पुराना बस स्टैंड स्थित ‘अपोलो फार्मेसी’ बिल्डिंग, जिस पर तीन महीने पहले प्रशासन ने कड़ा प्रहार करते हुए बुलडोजर चलाया था,वहां फिर से अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है। हैरत की बात यह है कि नगर पालिका की नोटिस और उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुकना, प्रशासनिक शिथिलता और रसूखदारों के ‘ऊंचे रसूख’ पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
बुलडोजर वाली कार्रवाई की ‘हवा’ निकली?
बता दें कि 16 जनवरी 2026 को जिला प्रशासन,नगर पालिका और नजूल विभाग ने भारी पुलिस बल के साथ रुचि जैन के स्वामित्व वाली इस बिल्डिंग के अवैध हिस्से को ध्वस्त किया था। लगा था कि प्रशासन ने कड़ा संदेश दिया है, लेकिन महज 3 महीने के भीतर ही उसी मलबे पर फिर से अवैध दीवारें खड़ी कर दी गईं।
नगर पालिका की नोटिस बनी ‘कागजी शेर’
अवैध निर्माण की शिकायत पर नगर पालिका ने 17 मार्च 2026 को रुचि जैन को अंतिम नोटिस जारी किया था। नोटिस में स्पष्ट कहा गया था:
पूर्व में स्वीकृत अनुज्ञा से अधिक निर्माण किया गया था,जिसे हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज होने के बाद तोड़ा गया था।
पुनः निर्माण करना हाईकोर्ट के आदेश और नगर पालिका अधिनियम का उल्लंघन है।
02 दिन के भीतर जवाब न मिलने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आज इस नोटिस की समय सीमा बीते हफ्तों हो चुके हैं,लेकिन धरातल पर कार्रवाई ‘शून्य’ है।
‘सब-जूडिस’ मामले में कानून को चुनौती
सूत्रों के अनुसार,मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन (Sub-judice) है। कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसी स्थिति में यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखनी होती है। बावजूद इसके,रुचि जैन द्वारा नगर पालिका और शासन के खिलाफ सिविल मुकदमा दायर किया गया है, जिसमें 22 अप्रैल 2026 को सुनवाई हुई और अगली सुनवाई 04 मई 2026 को है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि न्यायालय की तारीखों और कानूनी पेचों का सहारा लेकर प्रशासन जानबूझकर अतिक्रमणकारी को समय दे रहा है ताकि निर्माण पूरा हो सके।
NOC निरस्त फिर भी संचालित हो रही फार्मेसी
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि नगर पालिका ने उक्त बिल्डिंग में संचालित अपोलो फार्मेसी लिमिटेड की अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जो कि श्री रेड्डी गरी चिन्ना रेडप्पा आ.टी. अप्पीरेड्डी अपोलो फार्मेसी लिमिटेड के नाम से जारी किया था उसे भी 05 जनवरी 2026 को निरस्त कर दिया है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने दुकान को बंद कराने या सील करने की जहमत नहीं उठाई। आखिर किसके संरक्षण में एक अवैध प्रतिष्ठान शहर के मुख्य मार्ग पर बेखौफ चल रहा है?

सवालों के घेरे में जिला प्रशासन
तत्कालीन सीएमओ होरी सिंह ठाकुर ने 27 मार्च 2026 को एसडीएम अजय शतरंज को पत्र लिखकर बलपूर्वक कार्रवाई का निवेदन किया था। लेकिन एसडीएम कार्यालय से अब तक केवल ‘आश्वासन’ ही मिल रहा है। जनता पूछ रही है:
क्या प्रशासन रसूखदारों के आगे बेबस है?
अवैध निर्माण रोकने के बजाय उसे ‘न्यायिक संरक्षण’ लेने का समय क्यों दिया गया?
क्या यह प्रशासनिक सांठगांठ है या कोई बड़ा राजनीतिक दबाव?
मुंगेली की जनता में इस दोहरी नीति को लेकर भारी आक्रोश है। एक तरफ आम आदमी के छोटे से अतिक्रमण पर तुरंत कार्रवाई होती है वहीं रसूखदारों द्वारा कोर्ट और प्रशासन को चुनौती देने के बाद भी अधिकारी मौन साधे हुए हैं।”



