मुंगेली/छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में इन दिनों नगर पालिका की राजनीति पूरी तरह गर्मा गई है। अपने धार्मिक और समाजसेवी कार्यों से नगर में एक विशिष्ट पहचान बना चुके नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला ने प्रदेश सरकार और स्थानीय सत्ताधारी दिग्गजों पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया है। श्री शुक्ला का कहना है कि उन्हें नियमों के जाल में फंसाकर उनकी राजनीतिक छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है
तीन-तीन दिग्गजों के बीच जनता ने चुना ‘विपक्ष का अध्यक्ष’
रोहित शुक्ला ने अपनी राजनीतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहाकि मुंगेली की जनता ने उन्हें हमेशा अपना आशीर्वाद दिया है। उन्होंने कहा,”जब प्रदेश में भाजपा की लहर थी और मुंगेली जिले में केंद्रीय राज्य मंत्री,प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और स्थानीय ‘अजेय योद्धा’ विधायक जैसे तीन-तीन दिग्गज सक्रिय थे,उस समय भी देवतुल्य जनता ने मुझ पर विश्वास जताया। जनता ने मुझे पार्षद से लेकर नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुँचाया।”उन्होंने आगे जोड़ा कि सत्तापक्ष शायद आज तक अपनी उस हार को पचा नहीं पाया है,यही कारण है कि अब लोकतांत्रिक ढंग से चुने हुए जनप्रतिनिधि को स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने दिया जा रहा है
नियमों के जाल और नोटिस पर पलटवार
हाल ही में प्रदेश के नगरीय निकाय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा रोहित शुक्ला को एक नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस में PIC (President-in-Council) की बैठकें न लेने का आरोप लगाया गया है और 15 दिनों के भीतर जवाब न देने पर एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

इस पर रोहित शुक्ला ने स्पष्ट किया कि:
मेरे द्वारा विधिवत रूप से PIC का गठन किया जिसमें नगर विकास को ध्यान में रखते हुए दलगत राजनीति से उठकर भाजपा के 4 पार्षदों को लगातार दो बार PIC में शामिल किया लेकिन उनके द्वारा दोनों बार इस्तीफा दे दिया गया इससे ये साबित हो जाता है कि सत्तापक्ष के लोग नगर विकास को कितनी गंभीरता से लेते हैं उनका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ राजनीति करना ही रह गया है भाजपा के लोग ये तक भूल चुके हैं कि जिस जनता ने उन्हें चुनकर जनप्रतिनिधि बनाया है वें लोग आज उन्हीं जनता के साथ धोखा कर रहे हैं,बावजूद इसके मेरे द्वारा नगर पालिका परिषद में सभी पार्षदों एवं सीएमओ और अन्य अधिकारियों के साथ निरंतर बैठकें की गई हैं,वही उप मुख्यमंत्री और नगरीय निकाय मंत्री अरुण साव के साथ आयोजनों में शामिल होकर नगर के कई विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण भी किया है।
उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कहा कि यह केवल सत्तापक्ष के दबाव में अधिकारियों द्वारा की जा रही राजनीति है। उन्होंने इस नोटिस का आधिकारिक जवाब भी दे दिया है।
“प्रणाम मुंगेली”ही मेरा संकल्प
रोहित शुक्ला ने कहाकि उन्होंने कभी किसी व्यक्ति विशेष का गुणगान नहीं किया,बल्कि हमेशा “प्रणाम मुंगेली” को अपना मूलमंत्र माना है। उन्होंने साफ लहजे में कहा,”मुंगेली की जनता मेरा परिवार है। पद रहे या न रहे,मैं उनकी सेवा से पीछे नहीं हटूंगा। राजनीति में आम जनता ही सबसे बड़ा न्यायाधीश होता है और मुझे उनके फैसले पर पूरा भरोसा है।”
भाजपा नेताओं ने किया प्रेसवार्ता
नगर पालिका परिषद में चल रहे विवाद ने अब सियासी रंग ले लिया है। प्रेस वार्ता के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेताओं ने कहाकि नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया के तहत दिया गया है और इसका जवाब तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
पीआईसी गठन को लेकर विवाद :नगर पालिका अधिनियम 1961 के तहत पीआईसी (स्थायी समिति) का गठन समयसीमा के भीतर किया जाना आवश्यक है। जानकारी के अनुसार 13 मार्च 2025,12 जनवरी 2026 और 27 जनवरी 2026 को पीआईसी गठन की प्रक्रिया अपनाई गई,लेकिन पार्षदों के त्यागपत्र और वैधानिक कारणों के चलते यह मान्य नहीं हो सका। इसके बावजूद परिषद की कार्यवाही जारी रहने पर सवाल खड़े किए गए हैं।

भाजपा जिला अध्यक्ष दीनानाथ केशरवानी ने नगर पालिका के अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहाकि उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में नगर विकास के मुद्दों को नजरअंदाज किया और केवल सत्तापक्ष व भाजपा नेताओं की कमियां निकालने में ही समय बिताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा भेजे गए नोटिस को सतत प्रक्रिया बताते हुए कहाकि की इसे राजनीतिक दुर्भावना बताना पूरी तरह गलत है। भाजपा की नीति “सबका साथ,सबका विकास” पर आधारित है और पार्टी किसी के साथ दुर्भावना नहीं रखती।

वहीं नगर पालिका उपाध्यक्ष जयप्रकाश मिश्रा ने भी नगर पालिका अध्यक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि उप मुख्यमंत्री अरुण साव के नेतृत्व में नगर विकास को प्राथमिकता दी गई है और इसके लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके बावजूद नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला लगातार सोशल मीडिया और अन्य मंचों के जरिए सरकार को घेरने में लगे रहे।
उन्होंने आगे कहाकि अब जब राज्य सरकार ने उनकी कार्यप्रणाली को लेकर नोटिस जारी किया है,तो अपनी कमियों को स्वीकारने के बजाय भाजपा सरकार पर आरोप लगाना पूरी तरह अनुचित है।
नगर में चर्चाओं का दौर
मुंगेली के चौक-चौराहों पर इस समय केवल इसी मुद्दे की चर्चा है। आम जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि एक सक्रिय जनप्रतिनिधि को प्रशासनिक अड़चनों के जरिए रोकने का प्रयास किया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि रोहित शुक्ला द्वारा दिए गए जवाब के बाद विभाग और सरकार का अगला कदम क्या होता है।



