मुंगेली/ छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से संचालित प्रतिष्ठित मिशनरी संस्थान ‘रेन्बो मेमोरियल इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल’ और ‘छत्तीसगढ़ डायोसीस बोर्ड ऑफ़ एजुकेशन’ (CDBE) से जुड़ा विवाद अब बेहद संवेदनशील और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। स्कूल के संचालन,वित्तीय लेनदेन,नियुक्तियों और चुनाव की वैधता को लेकर दो अलग-अलग गुटों ने सर्किट हाउस व प्रेस के सामने अपनी बात रखी है। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता,धोखाधड़ी और गुंडागर्दी के संगीन आरोप लगाए हैं, जिससे शिक्षा जगत और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
प्रथम पक्ष (CDBE बोर्ड) के आरोप:”फर्जी दस्तावेजों से कब्ज़ा, मार्कशीट पर जाली दस्तखत”
छत्तीसगढ़ डायोसीस बोर्ड ऑफ़ एजुकेशन (CDBE) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष द राइट रेंव. सुषमा कुमार और उपाध्यक्ष नितिन लॉरेंस ने सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता कर स्थानीय जिला व पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
गुंडागर्दी और अवैध कब्ज़ा:बोर्ड के पदाधिकारियों का आरोप है कि 8 अक्टूबर 2025 को संदीप लाल,एम. प्रसाद,आई.पी. यादव और शैलेन्द्र तितुस ने गुंडों के साथ स्कूल में घुसकर प्रभारी प्राचार्य के कक्ष का ताला तोड़ दिया और जबरन कब्ज़ा कर लिया।
मार्कशीट पर फर्जी हस्ताक्षर:बोर्ड ने आरोप लगाया कि संगीता लाल खुद को “स्वयंभू प्राचार्य” घोषित कर बच्चों के प्रमाणपत्रों और मार्कशीट पर फर्जी दस्तखत कर रही हैं, जिससे भविष्य में बच्चों की डिग्रियां अवैध घोषित हो सकती हैं।
करोड़ों की अवैध वसूली:13 अक्टूबर 2025 के बाद से स्कूल के आधिकारिक खाते में एक भी रुपया जमा नहीं हुआ है, फिर भी पालकों से नकद फीस वसूली जा रही है। कर्मचारियों को कैश में वेतन देकर पीएफ और ESIC का पैसा दबाया जा रहा है।
जान से मारने की धमकी:वैधानिक प्रभारी प्राचार्य श्रीमती सोफिया जे. हैरिसन को मुंगेली आने पर हाथ-पैर काटने और जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
उग्र आंदोलन की चेतावनी:बोर्ड ने मांग की है कि दोषियों पर तत्काल FIR कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए,अन्यथा वे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और हजारों लोगों के साथ स्कूल के सामने भूख हड़ताल करेंगे।
“प्रशासक की देखरेख में हुए चुनाव वैध”
बोर्ड के मुताबिक,1 दिसंबर 2025 को शासन के निर्देश पर रायपुर कलेक्टर को संस्था का ‘प्रशासक’ नियुक्त किया गया था। इसके बाद 27 मार्च 2026 को शासकीय निगरानी में विधिवत चुनाव कराए गए, जिसमें नई समिति चुनी गई। वर्तमान प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष अतुल आर्थर ने दावा किया कि “हाईकोर्ट ने वर्तमान समिति को वैध माना है और विरोधी पक्ष को कोई राहत नहीं दी है।”साथ ही उन्होंने पूर्व प्रबंधन पर 30 से 35 लाख की वित्तीय गड़बड़ी और पूर्व प्राचार्य सोफिया जे. हैरिसन पर स्कूल के जरूरी प्रशासनिक रिकॉर्ड व कैशबुक गायब करने का आरोप भी लगाया।
द्वितीय पक्ष का पलटवार:”श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाईं,35 कर्मचारियों को बिना वजह निकाला”
दूसरी तरफ,रेन्बो स्कूल के को-मैनेजर संदीप लाल और सीनियर मैनेजर मैगी प्रसाद और वर्तमान प्रिंसीपल संगीता लाल ने प्रेसक्लब में प्रेसवार्ता कर वर्तमान प्रबंधन समिति के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन पर एकतरफा और तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।
कर्मचारियों का दमन:सीनियर मैनेजर मैगी प्रसाद ने आरोप लगाया कि स्कूल में 20 से 30 वर्षों से सेवा दे रहे लगभग 35 शिक्षकों और कर्मचारियों को बिना किसी उचित प्रक्रिया या नोटिस के अचानक निलंबित और बर्खास्त कर दिया गया। जिन कर्मचारियों ने अपने वेतन,पीएफ और सेवा अधिकारों की बात उठाई,उन्हें निशाना बनाया गया।
चुनाव की वैधता पर सवाल:संदीप लाल और मैगी प्रसाद ने वर्तमान समिति के गठन और चुनाव प्रक्रिया को ही अवैध बताया है। उनका कहना है कि प्रशासकीय अवधि खत्म होने के बाद जिस तरह चुनाव कराए गए,उस पर रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं विभाग में आपत्ति दर्ज है। धारा 27 के तहत वैधानिक प्रमाणीकरण (सर्टिफिकेशन) के बिना लिए जा रहे प्रशासनिक फैसले गैर-कानूनी हैं।
वित्तीय रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच की मांग:इस गुट ने आरोप लगाया कि स्कूल के बैंक खातों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही है, जिससे शिक्षकों का वेतन और पीएफ प्रभावित हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि स्कूल के वित्तीय रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
उलझा मामला:प्रशासन और कोर्ट की तरफ टिकी निगाहें
दोनों पक्षों के इस भयंकर टकराव,आरोपों-प्रत्यारोपों और समानांतर सत्ता चलाने के दावों के बीच स्कूल में पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चों के भविष्य और पालकों की चिंता बढ़ गई है। मामला अब मुख्यमंत्री,शिक्षामंत्री,जिला कलेक्टर,पुलिस अधीक्षक और रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं विभाग तक पहुंच चुका है।
जहां एक पक्ष हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर खुद को असली रक्षक बता रहा है,वहीं दूसरा पक्ष मामले को कोर्ट और रजिस्ट्रार के पास विचाराधीन बताकर वर्तमान फैसलों को अवैध ठहरा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय अराजकता पर मुंगेली जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग क्या ठोस कदम उठाता है।



