मुंगेली/मुंगेली के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) राकेश कुमार सोम की अदालत ने आज नाबालिग बालिका का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म (पॉक्सो एक्ट) के मामले में ऐतिहासिक और कड़ा निर्णय सुनाया है। अदालत ने अभियुक्त दीपक मानिकपुरी उर्फ टायसन (21 वर्ष) को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
क्या था पूरा मामला?
मामले का ब्योरा मुंगेली जिले के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है:
घटना की तारीख:8 जुलाई 2025 को दोपहर लगभग 1:00 बजे नाबालिग के साथ अपहरण एवं अपराध की घटना घटित हुई थी।
FIR दर्ज:9 जुलाई 2025 को पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर पुलिस थाना सिटी कोतवाली मुंगेली में अपराध क्रमांक 310/2025 के तहत मामला (FIR) दर्ज किया गया था।
गिरफ्तारी: पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए अभियुक्त दीपक मानिकपुरी पिता स्व. संतोष मानिकपुरी (निवासी: ग्राम शिवाजी वार्ड मुंगेली) को 16 जुलाई 2025 को गिरफ्तार कर अभिरक्षा (जेल) में भेज दिया था।
अदालत का फैसला और सजा का विवरण
विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट (FTC) में चली तीव्र सुनवाई के बाद विद्वान न्यायाधीश राकेश कुमार सोम की अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों एवं चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर आरोपी दीपक मानिकपुरी उर्फ टायसन को दोषी पाया और निम्नलिखित धारा-वार सजा सुनाई
1. धारा 4(1) पॉक्सो एक्ट (POCSO Act)
सजा: 10 (दस) वर्ष का सश्रम कारावास।
अर्थदंड:₹3,000 (तीन हजार रुपये) का जुर्माना।
* **व्यतिक्रम:** अर्थदंड न पटाने पर 01 माह का अतिरिक्त कारावास।
धारा 87 भारतीय न्याय संहिता (BNS) – [अपहरण]
सजा: 05 (पांच) वर्ष का सश्रम कारावास।
अर्थदंड: ₹2,000 (दो हजार रुपये) का जुर्माना।
व्यतिक्रम:अर्थदंड न पटाने पर 01 माह का अतिरिक्त कारावास।
3. **धारा 137(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS):
सजा:02 (दो) वर्ष का सश्रम कारावास।
अर्थदंड: ₹1,000 (एक हजार रुपये) का जुर्माना।
व्यतिक्रम:अर्थदंड न पटाने पर 01 माह का अतिरिक्त कारावास।
पीड़िता को 5 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति
कोर्ट ने पीड़िता के पुनर्वास और राहत के लिए ₹5,000,00 (पांच लाख रुपये) की क्षतिपूर्ति राशि स्वीकृत करने के भी आदेश दिए हैं।जो कि बालिग होने पश्चात उसके बैंक खाते में मर्ज किया जाएगा
मुकदमों में कानून का पालन एवं पहचान गोपनीयता
न्यायालय ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों (निपुण सक्सेना बनाम यूनियन ऑफ इंडिया) तथा धारा 228ए भा.दं.सं./72 भा.न्या.सं. का कड़ाई से पालन करते हुए पीड़िता और उसके परिजनों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी है। निर्णय पत्र में पीड़िता को नाम के स्थान पर केवल उसकी संबंधियों/साक्षी क्रमांक से ही संबोधित किया गया है।
मामले के मुख्य पक्ष:न्यायालय:अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.सी.), मुंगेली (छ.ग.) — न्यायाधीश राकेश कुमार सोम
अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता:मोतीलाल साहू (विशेष लोक अभियोजक)
लोक अभियोजक रजनीकांत ठाकुर ने विशेष लोक अभियोजक को दी बधाई
अभियुक्त:दीपक मानिकपुरी उर्फ टायसन,पिता- स्व. संतोष मानिकपुरी
कोर्ट के इस सख्त फैसले से क्षेत्र में अपराधियों और असामाजिक तत्वों के बीच कड़ा संदेश गया है कि महिलाओं व बालिकाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों में त्वरित न्याय और सख्त सजा निश्चित है।



