रायपुर/छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी के पारे के साथ-साथ अब शराब प्रेमियों का गुस्सा भी सातवें आसमान पर पहुँच गया है। प्रदेश में 1 अप्रैल से लागू हुई नई आबकारी नीति के बाद से ही शराब के शौकीनों में भारी कौतुहल और आक्रोश का माहौल है। स्थिति यह है कि सरकारी काउंटर से उनका पसंदीदा ब्रांड पूरी तरह नदारद है। हद तो तब हो गई जब चिल्ड (ठंडी) बीयर की चाहत रखने वालों को दुकानों पर ‘उबलती हुई’ नॉर्मल बीयर थमाई जा रही है। पूरी कीमत चुकाने के बाद भी मिल रही इस बदइंतजामी ने अब एक बड़े जन-आक्रोश का रूप ले लिया है।
गौरतलब हो कि प्रदेश में 2017 में शासकीय शराब दुकानें संचालित करने का निर्णय प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा लिया गया और इस निर्णय के पहले प्रदेश सरकार द्वारा बाकायदा एक कमेटी बनाया गया जिनके द्वारा दिल्ली सहित ऐसे राज्यों का दौरा किया गया जहां पर शासकीय दुकानें संचालित है और उनके द्वारा पूरी रिपोर्ट सौंपने के बाद सरकार ने निगम बनाकर शराब विक्रय शुरू किया गया वही जब प्रदेश सरकार के द्वारा लिये हुए निर्णय के बाद विपक्षी दल कांग्रेस के द्वारा इसका पुरजोर विरोध किया गया और आमजनता को भरोसे में लेते हुए कांग्रेस ने ये वादा किया था कि हमारी सरकार बनने के बाद पूर्ण शराबबंदी किया जाएगा लेकिन 2019 में जब कांग्रेस की सरकार सत्ता में आयी तो सबसे पहले पूर्ण शराबबंदी के वादे को भूलने का काम किया और सरकार के द्वारा शराब बेचने का विरोध करने वाली कांग्रेस ने भी अपनी सरकार में जमकर शराब बेचे और खूब मुनाफा कमाया आम जनता का कहना है कि चाहे सरकार किसी भी रहे शराब बेचकर मुनाफा तो सबने कमाया है,साथ ही ये भी कहना है कि जब सरकार को शराब दुकानों का संचालन करना था तो कमेटी बनाकर सर्वे कराया कि शराब कैसी बेचीं जाए लेकिन इन 9 सालों में शराब दुकानों में व्यवस्था कैसे करनी है जिससे आम जनता को शराब खरीदने में कोई दिक्कत ना हो और सभी ब्रांड के शराब उपलब्ध हो सके क्या इसके लिए भी कोई कमेटी बनाई जाएगी? आम जनता को उस वक्त का इंतजार है
प्लास्टिक की शीशी में ‘गोवा’ और लोकल ब्रांड्स की भरमार
नई शराब नीति के लागू होते ही सरकार ने देसी शराब और अंग्रेजी शराब के ‘गोवा’ ब्रांड को कांच की बोतलों की जगह प्लास्टिक की शीशी में बेचने का निर्णय लिया है। लेकिन इस प्रयोग के बीच सरकारी शराब दुकानों से नामी और ब्रांडेड शराबें गायब हो चुकी हैं। रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े महानगरों सहित प्रदेश के कई शहरों की शासकीय शराब दुकानों में भी प्रीमियम ब्रांड्स की जगह ऐसे लोकल ब्रांड्स की खेप खपाई जा रही है,जिनका नाम ग्राहकों ने पहले कभी सुना तक नहीं था।
ठंडी बीयर मांगो तो मिलती है बहस,कर्मचारियों की मनमानी चरम पर
गर्मी के इस सीजन में जब ब्रांडेड शराब नहीं मिलने से परेशान होकर लोग बीयर की तरफ रुख कर रहे हैं,तो वहाँ भी उन्हें तगड़ा झटका लग रहा है। प्रीमियम और सामान्य सरकारी दुकानों में चिल्ड बीयर की जगह गर्म या नॉर्मल बीयर बेची जा रही है। जब जागरूक ग्राहक इस अव्यवस्था पर पूरी कीमत देने का हवाला देकर सवाल उठाते हैं, तो दुकानों में तैनात सेल्समैन और कर्मचारी कोई वाजिब जवाब देने के बजाय सीधे बदतमीजी और बहस पर उतारू हो जाते हैं। ग्राहकों का कहना है कि
दुकानदारों का रवैया ऐसा होता है मानो वे शराब बेचकर ग्राहकों पर कोई बहुत बड़ा एहसान कर रहे हों। पैसे पूरे सरकारी रेट के ले रहे हैं,लेकिन सुविधा और व्यवहार शून्य है।
बड़ा सवाल:सरकारी दुकानें खाली,तो बार में कैसे छलक रहे हैं जाम?
इस पूरे संकट के बीच जो सबसे हैरान और संदेहास्पद बात सामने आ रही है,वो यह है कि जहाँ एक तरफ सरकारी और प्रीमियम शराब दुकानों के रैक खाली पड़े हैं,वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के लगभग सभी निजी बार में हर प्रकार की ब्रांडेड शराब और चिल्ड बीयर भारी मात्रा में उपलब्ध है।
इस विसंगति को लेकर अब आम जनता सीधे सरकार की नीयत पर सवाल उठा रही है। शराब प्रेमियों का सीधा आरोप है कि
क्या सरकारी दुकानों में जानबूझकर कृत्रिम किल्लत पैदा की जा रही है?
क्या यह शराब प्रेमियों को मजबूरन महंगे दामों पर बार (में जाकर शराब पीने के लिए धकेलने की कोई सोची-समझी रणनीति है?
अगर सरकार को सरकारी व्यवस्था से शराब नहीं बेचनी है,तो फिर से पुरानी ‘ठेका पद्धति’ लागू क्यों नहीं कर दी जाती,ताकि कम से कम ग्राहकों को उनका मनपसंद ब्रांड तो मिल सके?
राजस्व से प्यार,जिम्मेदारी से इंकार!
आबकारी विभाग और प्रदेश सरकार के इस रवैये को देखकर साफ प्रतीत होता है कि सरकार को शराब से मिलने वाले करोड़ों रुपये के राजस्व से तो बेहद प्यार है,लेकिन जब ग्राहकों को सही सेवा,पसंदीदा ब्रांड और सही व्यवस्था देने की बारी आती है,तो विभाग अपना पल्ला झाड़ लेता है।
वही शराब दुकानों में बड़े ब्रांड की शराब नहीं मिलने और अव्यवस्था को लेकर आबकारी विभाग के अधिकारियों से सवाल करने पर उनके द्वारा व्यवस्था दुरुस्त करने और आम जनता को उनका पसंदीदा ब्रांड जल्द उपलब्ध कराने जैसे जवाब देकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं



