मुंगेली/बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू गुरुवार को नगर प्रवास पर रहे,जहां उन्होंने कलेक्ट्रेट में अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक ली। इसके बाद स्थानीय सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में वे नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा करने पहुंचे
प्रेसवार्ता के दौरान सबसे अहम सवाल वर्षों से लंबित कटघोरा–मुंगेली–डोंगरगढ़ रेल लाइन परियोजना को लेकर उठा। पत्रकारों ने मंत्री से पूछा कि करीब 8 साल से यह परियोजना आखिर क्यों अटकी हुई है और अब तक धरातल पर क्यों नहीं उतर पाई।
इस पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 8 वर्ष पूर्व इस रेल परियोजना को केंद्र सरकार के बजट में स्वीकृति मिली थी। उस समय पीपीपी(सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल के तहत राज्य सरकार के सहयोग से देश की 5 कंपनियों के साथ मिलकर इसे पूरा करने की योजना बनी थी। शुरुआती अनुमान के अनुसार परियोजना की लागत लगभग 5800 करोड़ रुपये तय की गई थी।
हालांकि,आगे चलकर परियोजना को बड़ा झटका लगा जब इनमें से 3 कंपनियों ने कार्य में सहभागिता से पीछे हटने की बात कह दी। इसके चलते काम आगे नहीं बढ़ सका और परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई।
मंत्री ने कहाकि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर इस परियोजना को पुनःशुरू करने की मांग रखी। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 8 से 9 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। ऐसे में उन्होंने केंद्र सरकार से पूरी लागत वहन कर इस महत्वपूर्ण रेल लाइन को पूरा करने का आग्रह किया।
मंत्री के अनुसार,रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक सहमति जताई है,जिससे यह उम्मीद जगी है कि परियोजना को जल्द ही फिर से गति मिल सकती है।
यदि यह परियोजना धरातल पर उतरती है तो कोरबा,बिलासपुर और राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्रों के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही रेल सुविधा की मांग भी पूरी हो सकेगी,जिससे व्यापार,आवागमन और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।
हालांकि,बड़ा सवाल अब भी बरकरार है,क्या यह आश्वासन हकीकत में बदलेगा?
आजादी के 78 साल बाद भी रेल लाइन का इंतजार कर रही आम जनता को इसका लाभ कब तक मिलेगा,यह आने वाला समय ही तय करेगा।




