मुंगेली/जिला मुख्यालय से लगे बड़ी आबादी वाले ग्राम रेहूंटा एवं कामता को जोड़ने वाला पहुंच मार्ग इन दिनों बदहाली का शिकार है। वहीं एक बड़े स्कूल तक पहुंचने के लिए भी इसी जर्जर मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है। सड़क की खराब स्थिति के चलते ग्रामीणों,राहगीरों और स्कूली बच्चों को प्रतिदिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि 41.69 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह सड़क महज तीन साल के भीतर ही जर्जर हो गई,जबकि इसके रखरखाव और मरम्मत के लिए पांच साल की अवधि निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद संबंधित ठेकेदार द्वारा सड़क की मरम्मत को लेकर अब तक कोई पहल नहीं किए जाने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं।
गौरतलब है कि उक्त 2.310 किमी मार्ग का निर्माण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कराया गया था। इस सड़क का निर्माण रायपुर की निर्माण कंपनी मेसर्स मैकडम मेकर्स इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 41.69 लाख रुपये की लागत से किया गया था। उपलब्ध निर्माण विवरण के अनुसार कार्य 15 मई 2023 को प्रारंभ हुआ था तथा 31 दिसंबर 2023 को पूर्ण किया गया। वहीं सड़क निर्माण के बाद इसके मेंटेनेंस एवं मरम्मत के लिए पांच साल की अवधि निर्धारित की गई थी। लेकिन निर्माण कार्य पूर्ण होने के महज तीन साल के भीतर ही सड़क की स्थिति पूरी तरह खराब हो गई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं और आवागमन करना लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
पांच साल तक मेंटेनेंस की जिम्मेदारी,फिर भी ठेकेदार बेखबर!
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सड़क निर्माण के साथ ही पांच साल तक उसके रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी निर्धारित की गई थी,तो फिर सड़क की ऐसी स्थिति कैसे हो गई? ग्रामीणों का कहना है कि सड़क जर्जर होने के बावजूद संबंधित ठेकेदार द्वारा इसकी मरम्मत के लिए कोई पहल नहीं की गई है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या निर्धारित मेंटेनेंस अवधि के दौरान सड़क की नियमित निगरानी की गई? क्या विभागीय अधिकारियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उसके रखरखाव का समय-समय पर निरीक्षण किया? यदि मेंटेनेंस की जिम्मेदारी अभी भी प्रभावी है तो ठेकेदार से मरम्मत क्यों नहीं कराई जा रही है?
बड़े-बड़े गड्ढों के बीच सफर करने मजबूर ग्रामीण और स्कूली बच्चे
सड़क की वर्तमान स्थिति ऐसी है कि जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। दोपहिया वाहन चालकों को इन गड्ढों से बचकर निकलने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। वहीं चारपहिया वाहनों को भी आवागमन के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि इसी मार्ग से प्रतिदिन स्कूली बच्चों का आना-जाना होता है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है,जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कराया अवगत,फिर भी नहीं हुई सुनवाई
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के पहुंच मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद आज तक समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। ग्रामीणों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद के नाम पर संचालित योजना के तहत निर्मित सड़क की ऐसी दुर्दशा होना दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराना है,लेकिन निर्माण के बाद सड़क की गुणवत्ता और रखरखाव की अनदेखी होने से योजना का वास्तविक उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शासन की योजनाओं के तहत होने वाले निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जाता और बाद में रखरखाव की जिम्मेदारी भी ठीक से नहीं निभाई जाती। निर्माण के नाम पर होने वाली ऐसी लापरवाही का खामियाजा अंततःआम नागरिकों को भुगतना पड़ता है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी निभाने वाले ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
अधिकारी अविनाश मिंज ने कहाकि:मार्ग का निरीक्षण कर ठेकेदार को मेंटेनेंस के दिए जाएंगे निर्देश
इस संबंध में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिकारी अविनाश मिंज ने कहा कि उक्त मार्ग का निरीक्षण किया जाएगा तथा संबंधित ठेकेदार को सड़क के मेंटेनेंस एवं मरम्मत के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने मार्ग की स्थिति का जायजा लेकर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही है।
अब देखना होगा,आश्वासन के बाद कब शुरू होगा मरम्मत कार्य?
बहरहाल,41.69 लाख रुपये की लागत से निर्मित सड़क का निर्धारित पांच साल की मेंटेनेंस अवधि के दौरान ही जर्जर हो जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। अब ग्रामीणों की निगाहें संबंधित विभाग के अधिकारियों पर टिकी हुई हैं। देखना होगा कि विभाग कब सड़क का निरीक्षण कर ठेकेदार से मरम्मत कार्य शुरू करवाता है और ग्रामीणों को इस परेशानी से राहत दिलाता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सड़क की मौजूदा स्थिति और निर्माण गुणवत्ता की जांच कर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाती है या नहीं।



