मुंगेली/जिले के नागरिकों को बेहतर रेलवे सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग लंबे समय से उठती रही है,लेकिन मुंगेलीवासियों के लिए रेल सुविधा का इंतजार अब भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर वर्ष 2018 में कटघोरा-मुंगेली-डोंगरगढ़ रेल लाइन परियोजना को लेकर उम्मीदें जगी थीं,लेकिन रेल लाइन का सपना अब तक साकार नहीं हो पाया है। वहीं दूसरी ओर,वर्ष 2014 से संचालित रेलवे यात्री आरक्षण केंद्र पिछले 10 दिनों से बंद होने की जानकारी सामने आई है। इससे जिले के नागरिकों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आरक्षण केंद्र के बंद होने का मामला अब जिला प्रशासन तक पहुंच गया है। केंद्र में कार्यरत कर्मचारी द्वारा कलेक्टर को आवेदन सौंपकर रेलवे अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। कर्मचारी ने आवेदन में आरोप लगाया है कि पिछले लगभग 12 वर्षों से संचालित आरक्षण संबंधी कार्य को बंद करा दिया गया है। साथ ही अपने ऊपर लगाए गये आरोपों को निराधार बताते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।
10 दिनों से बंद आरक्षण केंद्र,यात्रियों की बढ़ी परेशानी
मुंगेली में रेलवे यात्री आरक्षण केंद्र की शुरुआत जिलेवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा के रूप में हुई थी। इस केंद्र के माध्यम से नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को लंबी दूरी की ट्रेनों में आरक्षित टिकट प्राप्त करने की सुविधा मिलती रही है। विशेष रूप से बुजुर्गों,विद्यार्थियों,व्यापारियों,नौकरीपेशा लोगों और ग्रामीण यात्रियों के लिए यह केंद्र उपयोगी साबित हुआ।
आरक्षण केंद्र बंद होने से अब यात्रियों को टिकट आरक्षित कराने के लिए दूसरे स्थानों का रुख करना पड़ सकता है। इससे समय और अतिरिक्त खर्च दोनों बढ़ने की आशंका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि केंद्र का संचालन किसी प्रशासनिक,तकनीकी या अन्य कारण से रोका गया है,तो उसकी स्पष्ट जानकारी आम नागरिकों को क्यों नहीं दी जा रही है?
जिलेवासियों की अपेक्षा है कि संबंधित विभाग बंदी के कारणों को सार्वजनिक करे और नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर आरक्षण सुविधा को जल्द बहाल करने की दिशा में पहल करे।
2014 में तत्कालीन सांसद लखनलाल साहू की पहल से शुरू हुआ था आरक्षण केंद्र
मुंगेली में रेलवे यात्री आरक्षण केंद्र की स्थापना के पीछे जिलेवासियों की वर्षों पुरानी मांग और रेल सुविधाओं के अभाव की समस्या प्रमुख कारण रही थी। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मुंगेली क्षेत्र से लखनलाल साहू सांसद निर्वाचित हुए थे। उनके निर्वाचन के बाद स्थानीय नागरिकों ने मांग उठाई थी कि जब तक मुंगेली में रेलवे लाइन की सुविधा उपलब्ध नहीं होती,तब तक कम से कम नगर में यात्री आरक्षण केंद्र शुरू कराया जाए।
उस समय यात्रियों को आरक्षित रेल टिकट लेने के लिए बिलासपुर अथवा रायपुर जाना पड़ता था। इससे न केवल अतिरिक्त समय लगता था,बल्कि आने-जाने में अनावश्यक खर्च भी उठाना पड़ता था। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों के लिए यह परेशानी अधिक थी।
स्थानीय मांग को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन सांसद लखनलाल साहू ने रेलवे मंत्रालय के समक्ष यह विषय उठाया। रेलवे मंत्रालय से स्वीकृति मिलने के बाद बिलासपुर रेलवे विभाग और मुंगेली जिला प्रशासन के समन्वय से आरक्षण केंद्र के संचालन की व्यवस्था की गई।
अक्टूबर 2014 में नगर के पुराना बस स्टैंड के पास स्थित स्वास्थ्य विभाग के भवन में इस यात्री आरक्षण केंद्र का शुभारंभ किया गया था। इस अवसर पर तत्कालीन सांसद लखनलाल साहू,तत्कालीन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री तथा क्षेत्रीय विधायक पुन्नूलाल मोहले सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे थे।
केंद्र शुरू होने के बाद मुंगेली के नागरिकों को अपने ही शहर में आरक्षित टिकट बनवाने की सुविधा मिली। करीब 12 वर्षों से संचालित इस व्यवस्था के बंद होने से अब एक बार फिर यात्रियों के सामने वही पुरानी परेशानी खड़ी होने की आशंका है,जिससे राहत दिलाने के उद्देश्य से यह केंद्र स्थापित किया गया था।
कटघोरा-मुंगेली-डोंगरगढ़ रेल लाइन का सपना अब भी अधूरा
मुंगेली जिले में रेलवे सुविधाओं का सवाल केवल आरक्षण केंद्र तक सीमित नहीं है। जिले के नागरिक लंबे समय से रेल लाइन के विस्तार की मांग करते आ रहे हैं। वर्ष 2018 में कटघोरा-मुंगेली-डोंगरगढ़ रेल लाइन परियोजना को लेकर स्वीकृति की खबर से क्षेत्र में नई उम्मीदें जगी थीं। लोगों को लगा था कि अब मुंगेली भी रेलवे के मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बनाएगा और जिले के विकास को नई दिशा मिलेगी।
हालांकि,स्थानीय नागरिकों के अनुसार परियोजना को लेकर अपेक्षित प्रगति अब तक धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दी है। इस कारण रेल लाइन के निर्माण, परियोजना की वर्तमान स्थिति,आगे की प्रक्रिया और कार्य शुरू होने की समयसीमा को लेकर लोगों में सवाल बने हुए हैं।
मुंगेली में रेल लाइन का विस्तार होने से केवल यात्रियों को आवागमन की सुविधा ही नहीं मिलेगी,बल्कि कृषि उपज के परिवहन,व्यापारिक गतिविधियों,रोजगार के अवसरों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रेल सुविधा से जिले का संपर्क अन्य प्रमुख शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों से बेहतर हो सकता है। यही वजह है कि यह परियोजना मुंगेली के नागरिकों के लिए महज परिवहन का विषय नहीं,बल्कि क्षेत्र के विकास और भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण मांग बन चुकी है।
केंद्रीय मंत्री तोखन साहू से बढ़ी जिलेवासियों की उम्मीदें
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी तोखन साहू के सांसद निर्वाचित होने के बाद मुंगेली जिले को केंद्र सरकार में प्रतिनिधित्व मिला। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे जिलेवासियों को उम्मीद जगी कि मुंगेली की लंबे समय से लंबित मांगों को केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाने का अवसर मिलेगा।
क्षेत्र के लोगों को अपेक्षा थी कि कटघोरा-मुंगेली-डोंगरगढ़ रेल लाइन परियोजना की प्रगति के लिए आवश्यक पहल होगी और जिले में रेलवे सुविधाओं के विस्तार का रास्ता खुलेगा। लेकिन अब भी स्थानीय नागरिक परियोजना की वर्तमान स्थिति और आगे की कार्ययोजना को लेकर स्पष्ट जानकारी चाहते हैं।
जिलेवासियों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों को इस विषय पर नियमित जानकारी साझा करनी चाहिए, ताकि लोगों को यह पता चल सके कि रेल लाइन परियोजना किस चरण में है,आगे कौन-कौन सी प्रक्रियाएं शेष हैं और धरातल पर काम शुरू होने की संभावित समयसीमा क्या है।
रेल लाइन का इंतजार अपनी जगह,आरक्षण सुविधा बंद होना अलग चिंता
मुंगेली जिले में रेल लाइन परियोजना और यात्री आरक्षण केंद्र से जुड़ा विवाद दो अलग-अलग विषय हैं,लेकिन दोनों का सीधा संबंध आम नागरिकों को बेहतर रेलवे सुविधाएं उपलब्ध कराने से है।
जब तक जिले में रेल लाइन का विस्तार नहीं होता,तब तक दूसरे शहरों और रेलवे स्टेशनों से यात्रा करने वाले लोगों के लिए आरक्षण केंद्र की सुविधा बेहद उपयोगी है। ऐसे में पहले से उपलब्ध इस सुविधा का बंद हो जाना लोगों की परेशानी बढ़ा सकता है।
इस पूरे मामले में आवश्यक है कि आरक्षण केंद्र बंद किए जाने के कारणों की स्पष्ट जानकारी दी जाए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता की शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई है,तो उसकी नियमानुसार निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं,यदि कर्मचारी की शिकायत में तथ्य सामने आते हैं,तो संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार उचित कदम उठाना चाहिए। जांच की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए,जिससे किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो और यात्रियों की सुविधा भी प्रभावित न रहे।
कलेक्टर को आवेदन,अब कार्रवाई का इंतजार
आरक्षण केंद्र में कार्यरत कर्मचारी द्वारा कलेक्टर को आवेदन सौंपे जाने के बाद अब जिला प्रशासन और संबंधित रेलवे अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। एक ओर कर्मचारी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए न्याय की मांग की है,वहीं दूसरी ओर जिलेवासियों के लिए आरक्षण केंद्र का सुचारू संचालन भी जरूरी है।
ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा मामले में संबंधित विभाग से जानकारी लेकर वस्तुस्थिति स्पष्ट कराने और रेलवे अधिकारियों द्वारा केंद्र बंद होने के कारणों की जानकारी सार्वजनिक करने से स्थिति साफ हो सकती है। साथ ही,यात्रियों को होने वाली असुविधा दूर करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था अथवा केंद्र को पुनः शुरू करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
जिलेवासियों का सवाल:मुंगेली को कब मिलेगी बेहतर रेल सुविधा?
मुंगेली के नागरिक वर्षों से रेलवे सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। एक तरफ कटघोरा-मुंगेली-डोंगरगढ़ रेल लाइन परियोजना को लेकर स्पष्ट प्रगति का इंतजार है,तो दूसरी तरफ वर्षों से संचालित आरक्षण केंद्र के बंद होने से मौजूदा सुविधा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
अब जिलेवासियों की अपेक्षा है कि आरक्षण केंद्र से जुड़े विवाद का निष्पक्ष निराकरण किया जाए,यात्रियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए सुविधा बहाल करने की दिशा में कदम उठाए जाएं और रेल लाइन परियोजना की वास्तविक स्थिति भी सार्वजनिक की जाए।
सवाल यही है कि जब मुंगेली को रेल लाइन की सुविधा मिलने में अभी इंतजार करना पड़ रहा है,तो कम से कम वर्षों से संचालित यात्री आरक्षण केंद्र की सुविधा निर्बाध रूप से उपलब्ध कराने के लिए ठोस पहल कब होगी? जिलेवासियों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि इस विषय को गंभीरता से लेते हुए मुंगेली की रेलवे संबंधी मांगों पर स्पष्ट और प्रभावी कार्रवाई करेंगे।



