मुंगेली/शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना,श्रद्धा,आस्था और उपासना का पावन अवसर है। इन नौ दिनों में पूरा वातावरण माता रानी की भक्ति में सराबोर रहता है। नगर से लेकर गांवों तक दुर्गा पंडाल सजाए जाते हैं,माता रानी की प्रतिमा स्थापित की जाती है और श्रद्धालु भजन-कीर्तन तथा धार्मिक आयोजनों के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना करते हैं। लेकिन बदलते समय के साथ कुछ आयोजनों में धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। मुंगेली नगर में नवरात्रि के दौरान आयोजित कुछ जगराता कार्यक्रमों में देवी भजनों की जगह फिल्मी और छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुति को लेकर विवाद गहरा गया है।
नगर के रेस्ट हाउस मैदान और मल्हापारा में आयोजित जगराता कार्यक्रमों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इन आयोजनों को लेकर लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों ने धार्मिक आयोजनों में प्रस्तुत किए गए गीतों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि माता रानी के जगराते का मूल उद्देश्य देवी की महिमा का गुणगान और भक्तों को भक्ति के वातावरण से जोड़ना है,न कि ऐसे गीतों का मंचन करना जो धार्मिक आयोजन की गरिमा और मर्यादा के अनुरूप न हों।
शुरुआत देवी भजनों से,बाद में फिल्मी और छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुति
जानकारी के अनुसार, रेस्ट हाउस मैदान में आयोजित कार्यक्रम में गायक अनुराग शर्मा तथा मल्हापारा में आयोजित कार्यक्रम में गायक नीलकमल वैष्णव ने प्रस्तुति दी। दोनों आयोजनों की शुरुआत माता रानी की पूजा-अर्चना और देवी भजनों के साथ हुई। शुरुआती दौर में भक्ति गीतों की प्रस्तुति से श्रद्धालु भक्तिमय माहौल में झूमते नजर आए। लेकिन कार्यक्रम आगे बढ़ने के साथ ही देवी भजनों की जगह फिल्मी और छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुतियां होने लगीं।
रेस्ट हाउस मैदान में गायक अनुराग शर्मा द्वारा *“कोई जन्नत की ओ हूर नहीं,मेरे कॉलेज की एक लड़की है” जैसे फिल्मी और कई अन्य छत्तीसगढ़ी गीत की प्रस्तुति दिए जाने को लेकर लोगों ने सवाल उठाए। वहीं मल्हापारा में गायक नीलकमल वैष्णव ने अपने द्वारा गाए लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी गीत *“मोला झोल्टूराम बना दिए”* और *“सगा होते त तोला ओ गोरी बिहा लेते न”* जैसे कई गीत प्रस्तुत किए।
इन गीतों पर कार्यक्रम में मौजूद लोग झूमते नजर आए। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि नवरात्रि के दौरान माता रानी के जगराते के नाम पर आयोजित कार्यक्रमों में इस तरह की प्रस्तुतियों के बजाय देवी भक्ति और धार्मिक परंपराओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी।
धार्मिक आयोजन में मनोरंजन की प्रधानता पर उठे सवाल
नवरात्रि में जगराता आयोजित करने के पीछे श्रद्धालुओं की भावना माता रानी की आराधना करना और पूरी रात भजन-कीर्तन के माध्यम से देवी की महिमा का गुणगान करना होता है। ऐसे आयोजनों में बड़ी संख्या में महिलाएं,बुजुर्ग और परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल होते हैं। ऐसे में गीतों के चयन और मंचीय प्रस्तुतियों को लेकर आयोजकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
नगर में हुए इन आयोजनों के बाद लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या धार्मिक आयोजनों की पहचान केवल बड़े मंच, तेज आवाज,प्रसिद्ध गायकों और मनोरंजन तक सीमित होती जा रही है? क्या आयोजकों को कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर समापन तक उसकी धार्मिक प्रकृति और मर्यादा का ध्यान नहीं रखना चाहिए?
लोगों का कहना है कि कलाकारों की लोकप्रियता और दर्शकों का मनोरंजन अपनी जगह है,लेकिन माता रानी के जगराते जैसे आयोजनों में देवी भक्ति को केंद्र में रखा जाना चाहिए। यदि कार्यक्रम का आयोजन धार्मिक उद्देश्य से किया जा रहा है,तो उसकी प्रस्तुतियों में भी उसी भावना का प्रतिबिंब दिखाई देना चाहिए।
रेस्ट हाउस मैदान में आयोजित कार्यक्रम को लेकर एक और मुद्दा चर्चा में है। स्थानीय स्तर पर इस आयोजन से जुड़े संगठन को हिंदूवादी संगठन के रूप में पहचान है। ऐसे में कार्यक्रम के दौरान फिल्मी गीतों की प्रस्तुति को लेकर लोगों ने सवाल उठाए हैं।
हालांकि,किसी संगठन की धार्मिक या वैचारिक पहचान से अलग यह जरूरी है कि आयोजनों के स्वरूप,उद्देश्य और प्रस्तुतियों पर गंभीरता से विचार किया जाए। धार्मिक आयोजन करने वाली समितियों से अपेक्षा की जाती है कि वे श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करें और मंच पर होने वाली प्रस्तुतियों की उचित निगरानी रखें।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद बढ़ी नाराजगी
रेस्ट हाउस मैदान और मल्हापारा के आयोजनों से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला नगर में चर्चा का विषय बन गया है। इन वीडियो को लेकर कई लोगों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि माता रानी की आराधना के लिए आयोजित जगराते में ऐसे गीतों का चयन नहीं होना चाहिए,जिनका देवी भक्ति से कोई संबंध नहीं है।
लोगों ने आयोजक समितियों से भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचने और धार्मिक कार्यक्रमों की पवित्रता बनाए रखने की अपील की है। उनका मानना है कि नवरात्रि जैसे पावन पर्व पर होने वाले आयोजनों में भक्ति संगीत,देवी स्तुति,जसगीत और पारंपरिक धार्मिक प्रस्तुतियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
गौ सेवा धाम एवं सर्व हिंदू समाज ने जताई आपत्ति,निकाली आक्रोश रैली
इन आयोजनों को लेकर गौ सेवा धाम एवं सर्व हिंदू समाज ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन की ओर से नगर में दाऊपारा से सिटी कोतवाली थाना तक आक्रोश रैली निकाली गई। इसके बाद थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर मामले में उचित कार्रवाई करने की मांग की गई।
ज्ञापन में नवरात्रि पर्व के दौरान माता रानी के आगमन और जगराता कार्यक्रमों में कथित तौर पर अश्लील एवं अमर्यादित गीतों की प्रस्तुति पर आपत्ति जताई गई है। संगठन ने मांग की है कि संबंधित कार्यक्रमों के वायरल वीडियो तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित आयोजकों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन में भविष्य में नवरात्रि सहित अन्य धार्मिक आयोजनों में इस प्रकार के गीतों के प्रसारण पर रोक लगाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने तथा धार्मिक आयोजनों की गरिमा,मर्यादा और शांति बनाए रखने के लिए उचित निगरानी सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।
प्रशासन से जांच और उचित कार्रवाई की अपेक्षा
नगर में सामने आए इस मामले ने धार्मिक आयोजनों के स्वरूप और उनकी मर्यादा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। एक ओर आयोजनों के माध्यम से लोगों को एकत्रित करने और मनोरंजन उपलब्ध कराने की बात सामने आती है,वहीं दूसरी ओर धार्मिक कार्यक्रमों में देवी भक्ति और परंपराओं को प्राथमिकता देने की मांग की जा रही है।
अब इस मामले में पुलिस प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ज्ञापन में उठाए गए बिंदुओं,वायरल वीडियो और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसी नियम या कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
नवरात्रि केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं,बल्कि श्रद्धा,संयम,संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का पर्व भी है। ऐसे में आयोजक समितियों,कलाकारों और प्रशासन से अपेक्षा की जाती है कि वे धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए ऐसे कार्यक्रमों का संचालन करें,जिनसे माता रानी के प्रति आस्था मजबूत हो और नगर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की गरिमा बनी रहे।




