मुंगेली/जिले के लोरमी थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम रामहेपुर झीरवन में हुई एक वृद्ध की जघन्य हत्या के मामले में माननीय न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया है। सत्र न्यायाधीश श्रीमती गिरिजा देवी मरावी की अदालत ने पांचों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें 10-10 साल के सश्रम कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई है।
विवाद का कारण:थ्रेसर से उड़ती धूल बनी काल
यह घटना वर्ष 2024 की है,जब आरोपी बलराम साहू,चित्रसेन साहू,चिंताराम साहू,कमलेश साहू और विनोद साहू ने एक राय होकर रामहेपुर झीरवन निवासी 65 वर्षीय आनंद टोंडे के घर पर हमला किया था। विवाद की शुरुआत खेती-किसानी के काम के दौरान हुई थी। तिवरा पिसाई (मिसाई) करते समय थ्रेसर से उड़ती धूल (गरदा) को लेकर कहासुनी हुई, जिसने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया।
घर में घुसकर जानलेवा हमला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सभी आरोपी लाठी-डंडों से लैस होकर आनंद टोंडे के घर में अनाधिकृत रूप से दाखिल हुए। आरोपियों ने न केवल गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी, बल्कि वृद्ध आनंद टोंडे और उनके पुत्र तुलसी उर्फ उसका पर प्राणघातक हमला कर दिया। इस मारपीट में आई गंभीर चोटों के कारण आनंद टोंडे की मृत्यु हो गई, जबकि उनके पुत्र को भी गंभीर चोटें आईं।
पुलिसिया कार्रवाई और न्यायालयीन प्रक्रिया
लोरमी थाना पुलिस ने तत्कालीन थाना प्रभारी अखिलेश वैष्णव और उप पुलिस अधीक्षक माधुरी धईरे के नेतृत्व में मामले की बारीकी से विवेचना की। आरोपियों के विरुद्ध आईपीसी की धारा 147,148,149,452,294,323,506, और 302 के तहत मामला दर्ज किया गया था। साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए एट्रोसिटी एक्ट की धारा 3(2)(v) भी जोड़ी गई थी।
लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ने शासन का पक्ष मजबूती से रखते हुए कुल 21 साक्षियों को न्यायालय के समक्ष परीक्षित कराया। गवाहों के बयान और पेश किए गए सबूतों के आधार पर न्यायालय ने आरोपियों को दोषी पाया।
कुल अर्थदंड:प्रत्येक दोषी को कुल ढाई-ढाई हजार रुपये का जुर्माना भी अदा करना होगा। जुर्माना न भरने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ सकता है।
मुंगेली न्यायालय के इस फैसले ने समाज में यह कड़ा संदेश दिया है कि आपसी विवाद में कानून हाथ में लेने और हिंसा का सहारा लेने वालों को न्यायपालिका कभी नहीं बख्शती। दोषियों को अब जेल की सलाखों के पीछे अपने किए की सजा काटनी होगी।



