मुंगेली/जिला बने करीब 14 साल होने को हैं,लेकिन मुंगेली की जनता आज भी सिटी बस जैसी बुनियादी सार्वजनिक परिवहन सुविधा का इंतजार कर रही है। विकास के दावों और बड़ी-बड़ी योजनाओं के बीच जिले के लोगों के लिए एक ऐसा सवाल लगातार खड़ा हो रहा है, जिसका जवाब आज भी नहीं मिल पाया है कि आखिर मुंगेली को सिटी बस सेवा का लाभ कब मिलेगा? जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिदिन अपने कामकाज,इलाज,पढ़ाई और सरकारी कार्यालयों में पहुंचने वाले लोगों को आज भी निजी वाहनों,ऑटो और अन्य महंगे साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुंगेली जिला राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। जिले की लोरमी विधानसभा से विधायक अरुण साव प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं। मुंगेली विधानसभा से विधायक पुन्नूलाल मोहले पूर्व में प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वहीं,बिल्हा विधानसभा से विधायक धरमलाल कौशिक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद तोखन साहू केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं और उनका गृह जिला भी मुंगेली है। ऐसे में जिले की जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व के इतने महत्वपूर्ण होने के बावजूद सार्वजनिक परिवहन जैसी बुनियादी जरूरत अब तक पूरी क्यों नहीं हो सकी?
2018 में भी मुंगेली को नहीं मिली सिटी बस सेवा
प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में विभिन्न शहरों और जिलों के लिए सिटी बस सेवा की व्यवस्था की गई थी। इस संबंध में उपलब्ध जानकारी के अनुसार,प्रदेश के लिए करीब 421 बसों की व्यवस्था का उल्लेख किया जाता है। लेकिन मुंगेली का नाम इस सूची में शामिल नहीं होने की बात सामने आती है।हालांकि कुछ श्रोतों से ये जानकारी मिलता है कि उस दौरान मुंगेली के हिस्से में भी 4 बसें आई थी,जिसके संचालन के लिए बाकायदा रूट भी तैयार किया गया था।लेकिन जाने किसकी नजर लग गई कि आजतक वें बस मुंगेली नहीं पहुंच पाई और यहां की बेबस जनता आज भी बस के आने का बस इंतजार ही कर रहे हैं।
उस समय भी जिले के लोगों को उम्मीद थी कि जिला मुख्यालय में बढ़ती आबादी,ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने की जरूरत को देखते हुए मुंगेली को भी सिटी बस सेवा से जोड़ा जाएगा। लेकिन यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। समय बीतता गया और जिला मुख्यालय में सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्थित सुविधा का अभाव बना रहा।
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना में भी मुंगेली को जगह मिलने का इंतजार
सार्वजनिक परिवहन की दिशा में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना शुरू की,जिसका उद्देश्य शहरों में पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। मार्च 2024 के आसपास इस योजना को लेकर चर्चा तेज हुई और विभिन्न शहरों में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की संभावनाएं सामने आईं।
मुंगेली में चर्चा है कि प्रदेश के चार जिलों के लिए लगभग 240 ई-बसों की व्यवस्था की गई,लेकिन इस सूची में भी मुंगेली को शामिल नहीं किया गया है।वही जानकारी के मुताबिक प्रदेश को मिले बसों का संचालन नवंबर से प्रारंभ कर दिया जाएगा। यदि जिले को वास्तव में इस सुविधा से बाहर रखा गया है,तो यह स्थानीय जरूरतों और सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जिले की जनता जानना चाहती है कि क्या मुंगेली को भविष्य में इस योजना अथवा किसी अन्य राज्य स्तरीय सार्वजनिक परिवहन योजना से जोड़ा जाएगा? क्या जिला मुख्यालय और आसपास के प्रमुख ग्रामीण क्षेत्रों के बीच नियमित बस सेवा शुरू करने के लिए कोई प्रस्ताव तैयार किया गया है? और यदि प्रस्ताव नहीं है,तो इसकी पहल कब होगी?
राजनीतिक प्रतिनिधित्व मजबूत,लेकिन आम जनता की परेशानी बरकरार
मुंगेली जिले में सत्तारूढ़ दल के प्रमुख जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद सिटी बस सेवा का अभाव अब जनसुविधाओं को लेकर चर्चा का विषय बन सकता है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव,पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं विधायक पुन्नूलाल मोहले,पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक धरमलाल कौशिक और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू जैसे नेताओं की मौजूदगी से प्रदेश का हाई प्रोफाइल जिला है यही वजह है कि जिले की जनता को विकास संबंधी कई अपेक्षाएं हैं।
हालांकि,किसी जिले में योजना का लाभ नहीं पहुंचने के पीछे प्रशासनिक,तकनीकी,वित्तीय अथवा पात्रता संबंधी कारण भी हो सकते हैं। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि सुविधा का अभाव केवल जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का परिणाम है। लेकिन यह सवाल जरूर उठता है कि जिले की जरूरतों को संबंधित सरकारों और विभागों के सामने प्रभावी ढंग से रखने,प्रस्ताव तैयार कराने और योजना में शामिल कराने के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए हैं?
जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल चुनाव के दौरान जनता के बीच पहुंचने तक सीमित नहीं होती। सड़क,पानी,बिजली,शिक्षा,स्वास्थ्य और परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार पहल करना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में सिटी बस सेवा की मांग को गंभीरता से उठाने और उसके लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कराने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
ग्रामीण बहुल जिले में सिटी बस की जरूरत सबसे ज्यादा
मुंगेली जिले की भौगोलिक स्थिति और ग्रामीण बसाहट को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। जिले के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों से लोग प्रतिदिन जिला मुख्यालय पहुंचते हैं। किसी को कलेक्ट्रेट में आवेदन देना होता है,किसी को तहसील कार्यालय में राजस्व संबंधी काम निपटाना होता है,तो किसी को रजिस्ट्री कार्यालय, अस्पताल,कॉलेज अथवा अन्य सरकारी संस्थानों तक जाना पड़ता है।
जिन लोगों के पास निजी वाहन नहीं हैं,उनके लिए इन स्थानों तक पहुंचना अतिरिक्त खर्च और समय की समस्या बन जाता है। खासकर बुजुर्गों,महिलाओं,विद्यार्थियों, दिव्यांगजनों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए नियमित एवं किफायती बस सेवा बड़ी राहत साबित हो सकती है।
शहर के प्रमुख संस्थानों तक पहुंचने में खर्च हो रही मोटी रकम
जिला मुख्यालय में कई महत्वपूर्ण कार्यालय और शिक्षण संस्थान अलग-अलग मार्गों पर स्थित हैं। इनके बीच नियमित और सुलभ सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं होने से लोगों को निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है।
स्थानीय स्तर पर बताई जा रही दूरी के अनुसार
कलेक्ट्रेट कार्यालय:बिलासपुर मार्ग पर लगभग 3 किलोमीटर।
तहसील एवं रजिस्ट्री कार्यालय:लगभग 6 किलोमीटर।
जिला अस्पताल:लगभग 2 किलोमीटर
जिला पंचायत कार्यालय:लगभग 8 किलोमीटर।
विज्ञान महाविद्यालय:नवागढ़ मार्ग पर लगभग 4 किलोमीटर।
आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज:लोरमी मार्ग पर लगभग 8 किलोमीटर।
कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय:पंडरिया मार्ग पर लगभग 5 किलोमीटर।
केंद्रीय नवोदय विद्यालय:लगभग 7 किलोमीटर।
आरटीओ कार्यालय:लगभग 7 किलोमीटर।
इन स्थानों की दूरी और वास्तविक यात्रा खर्च मार्ग तथा वाहन के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार,कई बार इन जगहों तक आने-जाने के लिए 50 से 100 रुपये या उससे अधिक खर्च करना पड़ता है। किसी ग्रामीण परिवार के लिए यह राशि छोटी नहीं है,विशेषकर तब जब एक ही दिन में कई कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़े या परिवार के एक से अधिक सदस्यों को शहर आना हो।
विद्यार्थियों को कॉलेज पहुंचने,मरीजों को अस्पताल जाने और आम नागरिकों को सरकारी कामकाज निपटाने के लिए यदि बार-बार महंगे निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़े,तो इसका सीधा असर उनकी दैनिक दिनचर्या और घरेलू बजट पर पड़ता है।
सिटी बस शुरू होने से किसे मिलेगा लाभ?
यदि मुंगेली में सिटी बस सेवा शुरू होती है,तो इसका लाभ केवल शहर में रहने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहेगा। उचित रूट निर्धारित किए जाने पर जिला मुख्यालय के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को भी राहत मिल सकती है।
सिटी बस सेवा शुरू होने से विद्यार्थियों को कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने में सहूलियत मिलेगी। सरकारी कार्यालयों में काम कराने आने वाले ग्रामीणों का यात्रा खर्च कम हो सकता है। बुजुर्गों और महिलाओं को आवागमन के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे। इसके साथ ही शहर में निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी मदद मिल सकती है।
इसके लिए जिला प्रशासन,नगर पालिका,परिवहन विभाग और राज्य सरकार को मिलकर संभावित रूट,बसों की संख्या,किराया,संचालन लागत और यात्रियों की वास्तविक जरूरतों का आकलन करना होगा। आवश्यकता के अनुसार साधारण बसों,मिनी बसों या इलेक्ट्रिक बसों के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।
आखिर कब बनेगी मुंगेली के लिए ठोस कार्ययोजना?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मुंगेली जिले को सिटी बस सेवा उपलब्ध कराने के लिए कोई ठोस पहल होगी? क्या जिला प्रशासन परिवहन विभाग के माध्यम से प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजेगा? क्या जिले के जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को राज्य और केंद्र सरकार के सामने उठाएंगे? और क्या आम जनता की इस लंबे समय से चली आ रही जरूरत को आगामी योजनाओं में प्राथमिकता दी जाएगी?
जिले की जनता को केवल आश्वासन नहीं,बल्कि स्पष्ट जानकारी चाहिए कि सिटी बस सेवा के लिए अब तक क्या प्रयास हुए हैं,वर्तमान में क्या स्थिति है और इसे शुरू करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
मुंगेली के विकास का आकलन केवल बड़ी परियोजनाओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से नहीं,बल्कि इस बात से भी होना चाहिए कि आम नागरिक को रोजमर्रा की सुविधाएं कितनी आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। यदि जिला मुख्यालय में सरकारी कार्यालयों,कॉलेजों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों तक पहुंचने के लिए लोगों को लगातार महंगे निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है,तो सार्वजनिक परिवहन की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अब समय है कि मुंगेली में सिटी बस सेवा की मांग को केवल चर्चा तक सीमित न रखकर इसे ठोस प्रस्ताव,स्पष्ट समयसीमा और प्रभावी कार्ययोजना में बदला जाए। जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और प्रशासन यदि इस मुद्दे को प्राथमिकता देते हैं,तो जिले के हजारों नागरिकों को सस्ती,सुलभ और नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। सिटी बस सेवा किसी विशेष वर्ग की मांग नहीं,बल्कि आम जनता की सुविधा,समय और पैसे से जुड़ा सवाल है। मुंगेली की जनता को भी ऐसी सुविधा मिलनी चाहिए,जो उसके दैनिक जीवन को आसान बनाए और जिला मुख्यालय को ग्रामीण क्षेत्रों से बेहतर तरीके से जोड़ सके।
अब देखना यह है कि मुंगेली की जनता का यह इंतजार कब खत्म होता है और सिटी बस सेवा का सपना कब हकीकत बनता है।



