मुंगेली/जिले के चौकी खुड़िया थाना लोरमी के वर्ष 2017 के बहुचर्चित हत्या एवं हत्या के प्रयास के मामले में सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी बलिराम पिता कन्हैया लाल,उम्र 35 वर्ष,निवासी बहौड़ा,चौकी खुड़िया,थाना लोरमी,जिला मुंगेली को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 एवं 307 के तहत दोषी ठहराया है। सत्र न्यायाधीश एवं पीठासीन अधिकारी श्रीमती गिरिजा देवी मेरावी ने दिनांक 18 अगस्त 2026 को आरोपी को आजीवन कारावास एवं ₹500 के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर आरोपी को 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
धारदार टांगिया से हमला कर की थी हत्या
अभियोजन के अनुसार घटना 8 दिसंबर 2017 की रात्रि करीब 11 से 12 बजे के मध्य ग्राम बहौड़ा में रामरतन बैगा की बाड़ी के पास हुई थी। आरोपी बलिराम ने अपने पास शाल में छिपाकर रखी धारदार लोहे की टांगिया से बुधरू बैगा पर जानलेवा हमला किया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।
इसी दौरान आरोपी ने रामरतन बैगा को भी जान से मारने की नीयत से टांगिया से हमला कर उसके जबड़े में गंभीर चोट पहुंचाई। इस प्रकार आरोपी पर एक व्यक्ति की हत्या करने तथा दूसरे व्यक्ति की हत्या का प्रयास करने का आरोप था।
18 गवाहों के बयान से अभियोजन ने मजबूत किया अपना पक्ष
प्रकरण में अभियोजन की ओर से न्यायालय के समक्ष कुल 18 गवाहों का परीक्षण कराया गया। अभियोजन ने प्रत्यक्षदर्शी साक्षियों सहित उपलब्ध साक्ष्यों एवं दस्तावेजों के माध्यम से घटना को न्यायालय के समक्ष प्रमाणित किया। चश्मदीद गवाहों ने भी घटना का समर्थन करते हुए आरोपी द्वारा धारदार हथियार से हमला किए जाने की बात न्यायालय के समक्ष रखी।
घटना में प्रयुक्त टांगिया से मिले मानव रक्त के साक्ष्य
प्रकरण की विवेचना के दौरान आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त लोहे की टांगिया बरामद की गई थी। टांगिया को रासायनिक परीक्षण के लिए भेजा गया, जिसकी रिपोर्ट में आरोपी से जब्त टांगिया पर मानव रक्त पाए जाने की पुष्टि हुई।
अभियोजन के अनुसार आरोपी इस महत्वपूर्ण साक्ष्य के संबंध में न्यायालय के समक्ष कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं कर सका। इस तथ्य ने भी अभियोजन के मामले को मजबूती प्रदान की।
पत्नी को जबरन भगाने का आरोप बना हत्या की वजह
अभियोजन के अनुसार आरोपी बलिराम ने इस घटना को अंजाम देने के पीछे बुधरू बैगा पर अपनी पत्नी को जबरन भगाने का आरोप लगाया था। इसी बात को लेकर आरोपी के मन में आक्रोश था और उसने कथित रूप से बुधरू पर जानलेवा हमला कर उसकी हत्या कर दी तथा रामरतन बैगा पर भी प्राणघातक हमला किया।
न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर सुनाया फैसला
मामले में प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान,आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त टांगिया की बरामदगी,रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट में टांगिया पर मानव रक्त की पुष्टि सहित अभियोजन द्वारा प्रस्तुत अन्य साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष रखा गया। इन साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी बलिराम को धारा 302 एवं 307 भादवि के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
शासन की ओर से लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ने प्रकरण में पैरवी करते हुए अभियोजन का पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।



