मुंगेली/छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से एक बेहद सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ महज़ 30 हजार रुपये के मामूली विवाद में एक मजदूर की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस पूरे हत्याकांड की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपियों ने वारदात को अंजाम देते समय खुद पीड़ित के मोबाइल से इसका वीडियो भी बनवाया। अब इस मामले में मुंगेली के सत्र न्यायालय (पीठसीन अधिकारी- श्रीमती गिरिजा देवी मेरावी) ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोनों मुख्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
इस पूरे प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 24 लोगों ने गवाही दी जिसके बाद कोर्ट ने आरोपियों को दोषी करार दिया।
होली के त्योहार पर पसरा मातम:क्या थी पूरी घटना?
यह पूरी घटना 13 मार्च 2025 की रात करीब 9 से 10 बजे के बीच की है। चिलफी थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम कान्हरपुर चौक के पास स्थित एक गुड़ फैक्ट्री में उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से आए मजदूर काम करते थे। होली का त्योहार नजदीक होने के कारण कुछ स्थानीय मजदूर अपने गांव चले गए थे। फैक्ट्री में केवल कुछ ही मजदूर बचे थे जो एक साथ बैठकर खाना-पीना कर रहे थे
इसी दौरान आरोपी रविन्दर कुमार कश्यप ने अचानक दावा किया कि उसकी जेब में रखे ₹30,000 गायब हैं। उसने वहां मौजूद सोनू उर्फ जावेद और चिंटू कश्यप पर पैसे चोरी करने का आरोप लगाते हुए मां-बहन की गंदी-गंदी गालियां देना शुरू कर दिया।

लोहे के खुरपे और बांस के डंडों से बर्बर हमला
विवाद इतना बढ़ा कि आरोपी रविन्दर कश्यप और उसका भाई दीपक कश्यप दोनों ने एक राय होकर जान से मारने की नीयत से हमला कर दिया। उन्होंने गुड़ खोदने वाले लोहे के भारी खुरपे और बांस के डंडों से सोनू उर्फ जावेद और चिंटू पर ताबड़तोड़ वार करना शुरू कर दिया।
खौफ का आलम यह था कि आरोपी रविन्दर ने वहां मौजूद एक अन्य व्यक्ति को अपना मोबाइल थमा दिया और धमकी दी कि “जब तक हम दोनों मार रहे हैं,तब तक तुम वीडियो बनाते रहो”। डर के मारे उस व्यक्ति ने इस पूरी क्रूरता का वीडियो रिकॉर्ड किया। जब वहां मौजूद धर्मेन्द्र और सचिन नाम के युवकों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की,तो आरोपियों ने उन्हें भी पीटकर दूर खदेड़ दिया।
एक की मौके पर मौत,दूसरा लहूलुहान
इस बेहद क्रूर और बर्बर मारपीट के कारण सोनू उर्फ जावेद के सिर,हाथ,पैर और पूरे शरीर पर गंभीर चोटें आईं,जिससे गुड़ फैक्ट्री के सामने पुरानी सोसायटी के पास उसकी मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। वहीं दूसरा पीड़ित चिंटू कश्यप भी सिर और चेहरे पर जानलेवा चोटें लगने के कारण फैक्ट्री के पीछे पानी की टंकी के पास अधमरी हालत में पड़ा मिला।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और अदालती ट्रायल
घटना के बाद शिकायतकर्ता बृजलाल मरावी की मौखिक रिपोर्ट पर चिलफी थाने के सब-इंस्पेक्टर हरीश कुमार साहू ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 296, 351(2),115(2), 109 और हत्या की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
अदालत का ऐतिहासिक फैसला
लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर की पुख्ता दलीलों और 24 चश्मदीद व सरकारी गवाहों के बयानों के आधार पर कोर्ट ने इस हत्याकांड को बेहद गंभीर माना।
दोषी:रविन्दर कुमार कश्यप (33 वर्ष) और दीपक कश्यप (24 वर्ष),निवासी- ग्राम सुरूरपुर,जिला बागपत (उत्तर प्रदेश)।
सजा:अदालत ने दोनों भाइयों को धारा 103(1) सहपठित धारा 3(5) BNS के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही ₹100 का अर्थदंड भी लगाया गया है,जिसे न पटाने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
गवाहों की मजबूत गवाही और मौके पर बनाए गए वीडियो साक्ष्य के कारण महज़ कुछ ही समय के भीतर कोर्ट ने पीड़ितों को न्याय देते हुए दोषियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।



