मुंगेली/छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के गृह जिले मुंगेली को सुसज्जित और विकसित करने की मंशा पर प्रशासनिक शिथिलता और ठेकेदार की मनमानी भारी पड़ती नजर आ रही है। नगर पालिका क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट ‘गौरवपथ’ के निर्माण में हो रही अत्यधिक देरी और कार्य की गुणवत्ता को लेकर अब शहर की आम जनता के बीच चर्चाओं और नाराजगी का बाजार गर्म है।
करोड़ों का बजट,फिर भी काम अधूरा
अधोसंरचना मद के तहत शासन द्वारा गौरवपथ के उन्नयन एवं सौंदर्यीकरण के लिए 4 करोड़ 94 लाख 31 हजार रुपए की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई थी। इस कार्य का जिम्मा बिलासपुर की ठेका कंपनी मेसर्स अविनाश बिल्डकॉन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर को सौंपा गया था। 19 जून 2025 को जारी कार्य आदेश (वर्क ऑर्डर) के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट को 12 महीने की समय सीमा में पूर्ण किया जाना था।
10 महीने बीते,उपलब्धियां कम और चुनौतियां ज्यादा
परियोजना की समय सीमा समाप्त होने में अब केवल 2 महीने का समय शेष है,लेकिन धरातल पर स्थिति चिंताजनक है। 10 माह बीत जाने के बाद भी अब तक केवल नाली निर्माण,डिवाइडर और विद्युतीकरण का काम ही किसी तरह हो पाया है। जबकि प्रोजेक्ट के मुख्य हिस्से जैसे:
बी.टी. रोड नवीनीकरण (डामरीकरण),पाथवे निर्माण और लैंडस्केपिंग,स्टॉर्म वाटर ड्रेन और पुलिया निर्माण,डिजाइन एलिमेंट और रोटरी निर्माण,नलसाजी (प्लंबिंग) कार्य
ये सभी कार्य आज भी अधूरे पड़े हैं। कार्य की गति इतनी धीमी है कि इसके तय समय पर पूरा होने को लेकर शहरवासियों में भारी संशय बना हुआ है।
कलेक्टर की नाराजगी और बेअसर नोटिस
बीते 9 अप्रैल को जिले के कलेक्टर कुंदन कुमार ने प्रशासनिक टीम के साथ निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया था। मौके पर गौरवपथ की बदहाली और धीमी प्रगति को देखकर उन्होंने कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि बरसात से पहले सभी कार्य पूर्ण किए जाएं ताकि जनता को परेशानी न हो। उन्होंने एसडीएम को संबंधित ठेकेदार के खिलाफ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए थे।
हैरानी की बात यह है कि नोटिस मिलने के बावजूद ठेकेदार की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं आया है। आरोप है कि नगर पालिका परिषद के जिम्मेदार अधिकारी भी इस प्रोजेक्ट की निगरानी को लेकर गंभीर नहीं हैं,जिससे ठेकेदार के हौसले बुलंद हैं और लापरवाही का खेल बदस्तूर जारी है।
जनता का सवाल:डिप्टी सीएम की मंशा को कौन लगा रहा पलीता?
मुंगेली के नागरिकों का कहना है कि यह जिला उप मुख्यमंत्री अरुण साव का गृह क्षेत्र है। उन्होंने नगर के विकास के लिए करोड़ों रुपयों की सौगात दी है,लेकिन स्थानीय प्रशासन और ठेकेदार उनकी प्राथमिकताओं को दरकिनार कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि:
“प्रशासनिक अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई और नोटिस तक सीमित हैं। जब तक लापरवाह ठेकेदार और अधिकारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी,तब तक वे निरंकुश बने रहेंगे। आम जनता के टैक्स के पैसे का सदुपयोग तभी होगा जब कार्य गुणवत्तापूर्ण और समय पर हो।”
आगे की राह और प्रशासन की चुनौती
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जून की समय सीमा और मानसून की आहट से पहले यह गौरवपथ अपने असली स्वरूप में आ पाएगा? यदि प्रशासन ने जल्द ही सख्ती नहीं दिखाई,तो आने वाले बरसात के मौसम में यह अधूरा निर्माण कार्य शहरवासियों के लिए सुगम मार्ग के बजाय ‘मुसीबत का पथ’ बन सकता है।
नगर की जनता अब शासन से उम्मीद लगाए बैठी है कि गुणवत्ता से समझौता किए बिना इस कार्य को युद्ध स्तर पर पूर्ण कराया जाए ताकि मुंगेली का विकास केवल कागजों पर नहीं,बल्कि धरातल पर नजर आए।



