मुंगेली/नगर के पुराना बस स्टैंड स्थित आगर खेल परिसर का जीर्णोद्धार इन दिनों गंभीर विवादों में घिर गया है। लगभग 90 लाख रुपये की लागत से किए जा रहे इस निर्माण कार्य का उद्देश्य शहर को बेहतर खेल और सामाजिक सुविधाएं उपलब्ध कराना था,लेकिन अब यह परियोजना सवालों के घेरे में आ गई है।
निर्माण कार्य की जिम्मेदारी मेसर्स अभिमान ट्रेडर्स,अकलतरा को सौंपी गई है। स्थानीय नागरिकों ने ठेकेदार पर निर्माण में भारी लापरवाही और अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिस परिसर से शहर की पहचान जुड़ी रही है,उसी के साथ अब गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है।
यह खेल परिसर वर्षों से खेल गतिविधियों,सामाजिक आयोजनों और राजनीतिक कार्यक्रमों का केंद्र रहा है। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष अनिल सोनी के प्रयासों से इसका निर्माण और विकास हुआ था।जो काफी सालों से मजबूती से खड़ा रहा लेकिन समय के साथ जर्जर होने पर इसके नवीनीकरण की मांग उठी,जिसे स्वीकार करते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय निकाय मंत्री अरुण साव ने करीब 90 लाख रुपये की स्वीकृति दी थी।
हालांकि,काम शुरू होते ही विवाद सामने आने लगे। नागरिकों का आरोप है कि निर्माण में घटिया और दोयम दर्जे की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि पुराने निर्माण को तोड़ने के बाद निकली रेत को ही दोबारा नए निर्माण में इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे भवन की मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं और भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका भी जताई जा रही है।
इसके अलावा खेल परिसर में दर्शकों के बैठने के लिए बनाई जा रही गैलरी को पहले की तुलना में काफी संकीर्ण कर दिया गया है। जहां पहले पर्याप्त और सुविधाजनक स्थान था,वहीं अब जगह कम होने से आने वाले समय में आयोजनों के दौरान लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

नगरवासियों ने इस मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत के इस तरह की लापरवाही संभव नहीं है। आरोप है कि जनता के टैक्स से होने वाले विकास कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी कर निजी लाभ को प्राथमिकता दी जा रही है।
शिकायतों के बावजूद प्रशासन द्वारा केवल जांच का आश्वासन दिए जाने से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि हर बार निरीक्षण के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाती है और ठेकेदार या इंजीनियर को नोटिस देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
इस पूरे मामले में नगर पालिका सीएमओ होरी सिंह ठाकुर ने कहाकि यदि निर्माण कार्य में तय मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है,तो इंजीनियर को निर्देश देकर स्थल निरीक्षण और जांच कराई जाएगी।
अब शहरवासियों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।



