मुंगेली/जिले में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं,लेकिन इन कार्यों की गुणवत्ता,उपयोगिता और आम जनता को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। ऐसा ही एक मामला मुंगेली-कवर्धा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 130ए पर सेंट जेवियर स्कूल से बाघामुड़ा तक चल रहे सड़क निर्माण कार्य का सामने आया है। करीब 17.98 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से 5.265 किलोमीटर लंबाई में हो रहे इस निर्माण कार्य को लेकर आसपास के रहवासियों और राहगीरों में नाराजगी बताई जा रही है। लोगों का आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग होने के बावजूद सड़क की चौड़ाई करीब 23 फीट रखी जा रही है,जबकि सड़क के दोनों ओर पर्याप्त जगह उपलब्ध होने की बात कही जा रही है। इसके अलावा निर्माण के दौरान उड़ती धूल,सुरक्षा इंतजामों की कमी,अधूरे कार्य और विभागीय निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
23 अप्रैल 2026 को हुआ था भूमिपूजन,विकास और पारदर्शिता का दिया गया था संदेश
राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 130ए के अंतर्गत मुंगेली शहरी क्षेत्र में इस सड़क का निर्माण वन टाइम इम्प्रूवमेंट योजना के तहत कराया जा रहा है। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी केएलएस कंस्ट्रक्शन कंपनी,कवर्धा को दी गई है। इस कार्य का भूमिपूजन 23 अप्रैल 2026 को चातरखार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया गया था। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री एवं बिलासपुर लोकसभा सांसद तोखन साहू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। वहीं मुंगेली विधायक पुन्नूलाल मोहले सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं तत्कालीन कलेक्टर कुंदन कुमार सहित जिले के अधिकारी भी मौजूद रहे थे।
उस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा था कि सड़क निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और आवश्यक जानकारी का सार्वजनिक प्रदर्शन होना चाहिए,ताकि आम नागरिकों को योजनाओं की स्पष्ट जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा था कि केंद्र और राज्य सरकारें नागरिकों को बेहतर आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश में विकास कार्यों को गति मिल रही है।
वहीं विधायक पुन्नूलाल मोहले ने कहा था कि सरकार आम नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सड़क निर्माण कार्य में नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा था कि जनभागीदारी से ही विकास कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरे हो सकते हैं।
लेकिन अब निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों के बीच उठ रहे सवाल इन दावों और अपेक्षाओं के अनुरूप काम होने की पड़ताल की मांग कर रहे हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर महज 23 फीट की सड़क,बाकी जगह का क्या होगा उपयोग?
स्थानीय रहवासियों का सबसे बड़ा सवाल सड़क की चौड़ाई को लेकर है। लोगों का कहना है कि जब सड़क निर्माण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है और परियोजना पर करीब 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं,तो सड़क को लगभग 23 फीट तक सीमित रखने का निर्णय क्यों लिया गया है? सड़क के दोनों ओर करीब 10-10 फीट जगह छोड़े जाने और दोनों तरफ नाली निर्माण किए जाने की बात भी सामने आ रही है।
रहवासियों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार भारी वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में सड़क की चौड़ाई,साइड शोल्डर और नाली की संरचना का निर्धारण भविष्य की यातायात जरूरतों और आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। लोगों की मांग है कि निर्माण की स्वीकृत ड्राइंग,तकनीकी मानकों और वास्तविक स्थल की स्थिति को सार्वजनिक किया जाए,ताकि स्पष्ट हो सके कि सड़क की चौड़ाई कितनी निर्धारित है और शेष उपलब्ध जगह का उपयोग किस उद्देश्य से किया जाना है।
हालांकि सड़क की वास्तविक स्वीकृत चौड़ाई और निर्माण संबंधी तकनीकी प्रावधानों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इसलिए इस मामले में स्वीकृत नक्शे और विभागीय दस्तावेजों के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
साइड शोल्डर में मिट्टी-मुरूम डालने की बात,बारिश में बढ़ सकती है परेशानी
सड़क की चौड़ाई को लेकर जब राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के एसडीओ पैगवार से सवाल किया गया कि पर्याप्त जगह होने के बावजूद सड़क का निर्माण करीब 23 फीट में ही क्यों कराया जा रहा है और शेष जगह का क्या उपयोग होगा,तो उनके अनुसार वन टाइम इम्प्रूवमेंट योजना के तहत 23 फीट सड़क का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने शेष जगह पर साइड शोल्डर के रूप में मिट्टी या मुरूम डाले जाने की बात कही।
इस जवाब के बाद स्थानीय लोगों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। उनका सवाल है कि यदि सड़क के दोनों ओर मिट्टी या मुरूम डालकर साइड शोल्डर तैयार किया जाएगा,तो बरसात के दिनों में उसकी मजबूती और उपयोगिता कैसे सुनिश्चित की जाएगी? साथ ही सड़क पर गिरने वाला पानी नालियों तक पहुंचेगा या नहीं,यह भी महत्वपूर्ण सवाल है।
जब इस संबंध में एसडीओ पैगवार से पूछा गया कि बारिश के दौरान जल निकासी प्रभावित होने की आशंका और सड़क की सुरक्षा को कैसे सुनिश्चित किया जाएगा,तो उन्होंने कहा कि विभाग का काम सड़क को हर हाल में खराब होने से बचाना है और इसके लिए आवश्यक कार्य किया जाएगा।
अब सवाल यह है कि सड़क को खराब होने से बचाने के लिए कौन-से तकनीकी उपाय अपनाए जाएंगे और साइड शोल्डर,नाली तथा सड़क की ऊंचाई का आपसी तालमेल किस तरह सुनिश्चित होगा। इन बिंदुओं पर विभाग की ओर से विस्तृत तकनीकी जानकारी सामने आना आवश्यक है।
निर्माण के दौरान उड़ती धूल,10 मीटर दूर का वाहन भी दिखाई देना मुश्किल
सड़क निर्माण के दौरान धूल की समस्या भी स्थानीय लोगों और राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि निर्माण स्थल पर लगातार धूल का गुबार उठता रहता है,जिससे कई बार सामने से आने वाले वाहन स्पष्ट दिखाई नहीं देते। ऐसी स्थिति में दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है।
रहवासियों के अनुसार,उन्होंने कई बार निर्माण कार्य में लगे कर्मचारियों से पानी का छिड़काव कराने की मांग की,लेकिन उनकी शिकायतों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। यदि निर्माण स्थल पर नियमित पानी का छिड़काव,धूल नियंत्रण और यातायात प्रबंधन के उपाय नहीं किए जाते हैं,तो दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
यह मार्ग भारी वाहनों की आवाजाही के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में सड़क निर्माण के दौरान छोटे वाहनों,बाइक चालकों और पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान पर्याप्त संकेतक,बैरिकेडिंग और चेतावनी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि वाहन चालकों को आगे चल रहे कार्य और सड़क की स्थिति की समय रहते जानकारी मिल सके।
आधे-अधूरे निर्माण को छोड़ दूसरे हिस्से में काम शुरू करने का आरोप
स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संबंधित ठेकेदार की ओर से अपनी सुविधानुसार काम किया जा रहा है। कई बार एक हिस्से में निर्माण कार्य अधूरा छोड़कर दूसरे हिस्से में काम शुरू कर दिया जाता है, जिससे आवागमन बाधित होता है और लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से इस तरह किया जाना चाहिए कि यातायात कम से कम प्रभावित हो और किसी भी हिस्से को असुरक्षित स्थिति में लंबे समय तक न छोड़ा जाए। खासकर ऐसे मार्ग पर, जहां भारी वाहनों का लगातार आवागमन रहता है,वहां अधूरे निर्माण स्थलों को सुरक्षित करना और यातायात को व्यवस्थित रखना बेहद जरूरी है।
रहवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर कार्य की जानकारी देने वाला सूचना पटल नहीं लगाया गया है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण की लागत,लंबाई,ठेकेदार,कार्य पूर्ण करने की समय-सीमा और संबंधित विभाग की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित होनी चाहिए,ताकि आम नागरिक भी काम की निगरानी कर सकें।
यह आरोप यदि सही पाए जाते हैं,तो संबंधित विभाग को निर्माण स्थल पर आवश्यक सूचना पटल और सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई करनी चाहिए।
दुर्घटनाओं की आशंका से सहमे राहगीर,सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
सड़क निर्माण का उद्देश्य आवागमन को सुगम और सुरक्षित बनाना है,लेकिन यदि निर्माण के दौरान ही लोगों को दुर्घटनाओं की आशंका के बीच सफर करना पड़े,तो यह चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही,धूल,अधूरे निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण दोपहिया वाहन चालकों को विशेष परेशानी होती है।
लोगों ने सड़क निर्माण स्थल पर पर्याप्त बैरिकेडिंग,चेतावनी संकेतक,रात के समय दिखाई देने वाले रिफ्लेक्टर,नियमित पानी का छिड़काव और सुरक्षित यातायात व्यवस्था की मांग की है। साथ ही उनका कहना है कि निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच के लिए विभागीय अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करना चाहिए।
हालांकि निर्माण कार्य के दौरान हुई दुर्घटनाओं की संख्या और उनके कारणों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है,लेकिन दुर्घटना की आशंका को कम करने के लिए सुरक्षा इंतजामों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
18 करोड़ की परियोजना,फिर भी विभागीय निगरानी पर सवाल
स्थानीय नागरिकों की नाराजगी केवल सड़क की चौड़ाई या धूल तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि संबंधित विभाग के अधिकारी निर्माण कार्य का नियमित निरीक्षण करने नहीं पहुंचते और ठेकेदार को अपनी मर्जी से काम करने की छूट मिली हुई है। लोगों का कहना है कि यदि विभागीय अधिकारी समय-समय पर निर्माण स्थल का निरीक्षण करें,तो गुणवत्ता,सुरक्षा और तकनीकी मानकों से जुड़ी समस्याओं की समय रहते पहचान की जा सकती है।
करीब 17.98 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में निर्माण की गुणवत्ता और उपयोगिता सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि विभाग स्वीकृत तकनीकी नक्शे,सड़क की निर्धारित चौड़ाई,साइड शोल्डर की संरचना,नाली निर्माण,जल निकासी और सुरक्षा इंतजामों की जानकारी सार्वजनिक करे।
साथ ही निर्माण कार्य की प्रगति और गुणवत्ता की जांच के लिए नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी स्पष्ट होनी चाहिए। इससे न केवल लोगों की शंकाओं का समाधान होगा,बल्कि सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
जनप्रतिनिधियों के गृह जिले में निर्माण पर सवाल,जनता पूछ रही—निगरानी कौन करेगा?
मुंगेली जिले में केंद्रीय राज्य मंत्री,उप मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद सड़क निर्माण की मौजूदा स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों की नाराजगी सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों का भूमिपूजन करने के साथ-साथ उनके निर्माण की गुणवत्ता और आम नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी नजर रखी जानी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों ने कहा कि उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों से व्यक्तिगत शिकायत नहीं है,बल्कि उनकी नाराजगी अपने मत अधिकार से चुने हुए जनप्रतिनिधियों से है। उनका सवाल है कि जब जिले में बड़े जनप्रतिनिधि मौजूद हैं और करोड़ों रुपये की लागत से सड़क का निर्माण कराया जा रहा है,तो फिर निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही?
लोगों की अपेक्षा है कि जनप्रतिनिधि और संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी निर्माण स्थल का निरीक्षण करें,स्थानीय नागरिकों की समस्याएं सुनें और आवश्यक सुधार के लिए पहल करें। उनका कहना है कि विकास का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हो और आम जनता को सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवागमन की सुविधा प्राप्त हो।
अब निगाहें विभागीय कार्रवाई पर,क्या दूर होंगी आम जनता की समस्याएं?
बहरहाल,मुंगेली-कवर्धा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 130ए पर सेंट जेवियर स्कूल से बाघामुड़ा तक चल रहे सड़क निर्माण को लेकर उठे सवालों के बीच अब संबंधित विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। करीब 17.98 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से तैयार हो रही इस सड़क की निर्धारित चौड़ाई,साइड शोल्डर,नाली निर्माण,जल निकासी,धूल नियंत्रण और सुरक्षा इंतजामों को लेकर स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है।
यदि स्थानीय लोगों की शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं,तो विभाग को समय रहते आवश्यक सुधार कराना चाहिए। साथ ही निर्माण की तकनीकी जांच और नियमित निरीक्षण के जरिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सड़क निर्धारित मानकों के अनुरूप बने और सरकारी धन का सदुपयोग हो।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग,ठेकेदार और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि इन सवालों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और आम जनता की परेशानियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाते हैं। आखिरकार,विकास कार्यों की सफलता केवल सड़क बन जाने से नहीं,बल्कि उसके सुरक्षित,टिकाऊ और जनहितकारी होने से तय होती है।





