मुंगेली/आज के दौर में जहां कई बार लोग अपने निजी स्वार्थ और व्यस्तता के चलते अपनों के सुख-दुख से दूर होते नजर आते हैं, वहीं मुंगेली की हरि ओम दुर्गा उत्सव समिति ने आपसी प्रेम, संवेदना और पारिवारिक एकता की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा नगर में हो रही है। समिति के एक सदस्य के परिवार में हुई दुखद घटना से आहत होकर सदस्यों ने दुर्गोत्सव के भव्य आयोजनों में बदलाव करने का निर्णय लिया है। समिति ने जहां मातारानी के आगमन को सादगी से मनाने का फैसला किया है,वहीं प्रदेश के सुप्रसिद्ध भजन सम्राट पंडित देवेश शर्मा का प्रस्तावित जगराता कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया है।
नगर के दाऊपारा स्थित रेस्ट हाउस प्रांगण में हरि ओम दुर्गा उत्सव समिति द्वारा पिछले कई वर्षों से श्रद्धा और उत्साह के साथ मां दुर्गा की स्थापना की जाती रही है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी समिति के सदस्यों ने नवरात्रि पर्व को भव्य रूप देने की तैयारी की थी। इसके तहत 9 अक्टूबर को मातारानी के भव्य आगमन का कार्यक्रम निर्धारित किया गया था,जिसमें ढोल-ताशे और आतिशबाजी के साथ माता रानी का स्वागत करने की योजना थी। वहीं,19 अक्टूबर को प्रदेश के सुप्रसिद्ध भजन सम्राट पंडित देवेश शर्मा का भव्य जगराता आयोजित किया जाना था। इस कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं और समिति के सदस्यों में खासा उत्साह था।
लेकिन इसी बीच समिति के एक सदस्य के परिवार में दुखद घटना घटित हो गई। इस घटना से समिति के सभी सदस्य भावनात्मक रूप से आहत हुए। ऐसे कठिन समय में सदस्यों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि जब उनके अपने परिवार का एक सदस्य दुख की घड़ी से गुजर रहा है, तब उत्सव की भव्यता से अधिक जरूरी उसके साथ खड़े रहना है। इसी भावना के साथ मातारानी के आगमन को सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न करने और जगराता कार्यक्रम को स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
‘हम केवल समिति के सदस्य नहीं,एक परिवार हैं’
समिति के सदस्यों का कहना है कि हरि ओम दुर्गा उत्सव समिति केवल धार्मिक आयोजन करने वाला एक समूह नहीं है,बल्कि यह वर्षों से आपसी प्रेम,विश्वास और आत्मीयता के धागे से जुड़ा एक परिवार है। यहां सदस्य केवल आयोजन के समय एकत्रित नहीं होते,बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुख में भी सहभागी बनते हैं। ऐसे में परिवार के किसी सदस्य पर दुख का पहाड़ टूटने पर उत्सव की भव्यता को प्राथमिकता देना उनकी सामूहिक भावना के अनुरूप नहीं था।
सदस्यों ने एक स्वर में यह संदेश दिया कि धार्मिक आयोजन का वास्तविक उद्देश्य केवल उत्सव मनाना या भव्यता का प्रदर्शन करना नहीं,बल्कि प्रेम,संवेदना,सहयोग और मानवीय मूल्यों को मजबूत करना भी है। जब अपने ही परिवार का कोई सदस्य कठिन परिस्थिति से गुजर रहा हो, तो उसके साथ खड़ा होना ही सबसे बड़ा धर्म है।
सादगी में भी कायम रहेगी मां दुर्गा के प्रति आस्था
समिति ने स्पष्ट किया कि मातारानी के प्रति श्रद्धा और भक्ति में कोई कमी नहीं आएगी। इस वर्ष भी मां दुर्गा की स्थापना की जाएगी, लेकिन आगमन का कार्यक्रम सादगी के साथ आयोजित होगा। भव्य जगराता कार्यक्रम को स्थगित करने का फैसला भी इसी संवेदनशीलता और पारिवारिक एकजुटता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
हरि ओम दुर्गा उत्सव समिति का यह निर्णय समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि रिश्तों की असली पहचान खुशियों में साथ रहने से ही नहीं, बल्कि दुख की घड़ी में एक-दूसरे का सहारा बनने से भी होती है। आज जब उत्सवों में भव्यता और दिखावे को लेकर प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है,ऐसे समय में मुंगेली की इस समिति ने यह दर्शाया है कि इंसानियत, संवेदना और रिश्तों की गरिमा किसी भी आयोजन की भव्यता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
मां दुर्गा के प्रति अटूट आस्था के साथ अपनों के दुख में सहभागी बनने का यह निर्णय नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। समिति ने अपने आचरण से यह संदेश दिया है कि उत्सव हर वर्ष मनाए जा सकते हैं,लेकिन अपनों के प्रति संवेदना और साथ निभाने का अवसर जीवन में सबसे अधिक मायने रखता है।



