मुंगेली/गणेश उत्सव एवं नवरात्रि पर्व को लेकर नगर में तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। इन पर्वों के अवसर पर भगवान गणेश एवं मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमाओं का निर्माण करने वाले स्थानीय कुम्हार और मूर्तिकार भी अपनी कला को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। इसी बीच नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला ने कुम्हारपारा पहुंचकर स्थानीय कुम्हारों से मुलाकात की तथा उनके द्वारा तैयार की जा रही मिट्टी की मूर्तियों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने कुम्हारों से चर्चा कर उनकी समस्याओं और चुनौतियों की जानकारी ली।
मिट्टी की मूर्तियों के निर्माण में जुटे कुम्हारों से की चर्चा
नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला बड़ा बाजार स्थित कुम्हारपारा पहुंचकर वहां मिट्टी की प्रतिमाएं तैयार कर रहे कुम्हारों और मूर्तिकारों से मिले। उन्होंने उनके द्वारा बनाई जा रही भगवान गणेश एवं अन्य देवी-देवताओं की मिट्टी की मूर्तियों को देखा तथा मूर्तियों के निर्माण की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी ली।
कुम्हारों ने बताया कि गणेश उत्सव और नवरात्रि जैसे प्रमुख पर्वों के अवसर पर मिट्टी की प्रतिमाओं की मांग रहती है। इन प्रतिमाओं को तैयार करने में मूर्तिकारों को काफी मेहनत,समय और लागत लगानी पड़ती है। मिट्टी का चयन करने से लेकर प्रतिमा का आकार देने,सुखाने,रंग-रोगन और अंतिम रूप देने तक पूरी प्रक्रिया में कारीगरों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
बाजार में अन्य किस्म की मूर्तियों से मिट्टी की प्रतिमाओं की मांग प्रभावित
कुम्हारों ने नगर पालिका अध्यक्ष के समक्ष अपनी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि वर्तमान समय में बाजारों में मिट्टी के अलावा अन्य किस्म की मूर्तियां,विशेषकर प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी प्रतिमाएं भी पहुंच रही हैं। इसके चलते पारंपरिक मिट्टी की मूर्तियों की मांग में धीरे-धीरे कमी देखने को मिल रही है।
मूर्तिकारों का कहना है कि मिट्टी की प्रतिमाएं तैयार करने में काफी मेहनत और समय लगता है,लेकिन बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण उन्हें उनकी मेहनत के अनुरूप उचित कीमत नहीं मिल पा रही है। इससे स्थानीय कुम्हारों की आय प्रभावित हो रही है और पारंपरिक मूर्ति निर्माण की कला से जुड़े परिवारों के सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ रही हैं।
कुम्हारों ने स्थानीय स्तर पर मिट्टी की मूर्तियों को प्रोत्साहन देने,बाजार उपलब्ध कराने और उनकी कला को सम्मान दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्थानीय कुम्हारों की मूर्तियां खरीदने आम जनता से अपील
नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला ने कुम्हारों की समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा आम जनता से अपील करते हुए कहा कि गणेश उत्सव एवं नवरात्रि के अवसर पर अपने नगर के स्थानीय कुम्हारों और मूर्तिकारों द्वारा बनाई गई मिट्टी की प्रतिमाओं को प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा कि स्थानीय कारीगरों से मिट्टी की मूर्तियां खरीदने से न केवल हमारी परंपरा और संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा,बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। कुम्हारों की मेहनत को सम्मान देने और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में आम नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
रोहित शुक्ला ने कहा कि पर्व-त्योहारों की खुशियां तभी सार्थक होंगी,जब हमारे अपने नगर के मेहनतकश कारीगरों के घरों में भी खुशहाली पहुंचे। उन्होंने लोगों से स्थानीय स्तर पर तैयार की गई मिट्टी की प्रतिमाओं को अपनाने का आग्रह किया।
जिला प्रशासन से कुम्हारों के लिए सार्थक पहल का अनुरोध
नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला ने जिला प्रशासन से भी कुम्हारों एवं स्थानीय मूर्तिकारों के हित में सार्थक पहल करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक मिट्टी की मूर्ति निर्माण कला को संरक्षित करने तथा कुम्हारों को प्रोत्साहन देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने कुम्हारों को उचित बाजार उपलब्ध कराने,स्थानीय स्तर पर उनकी मूर्तियों की बिक्री को बढ़ावा देने तथा उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल की आवश्यकता बताई।
परंपरागत कला को बचाने सामूहिक प्रयास जरूरी
गणेश उत्सव और नवरात्रि जैसे पर्वों में मिट्टी की प्रतिमाओं का विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व है। स्थानीय कुम्हार पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखते आए हैं। ऐसे में बदलते बाजार और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच इस पारंपरिक कला को बचाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला का कुम्हारपारा पहुंचकर कुम्हारों से संवाद करना स्थानीय कारीगरों की समस्याओं को समझने और उनके हित में पहल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग कुम्हारों की समस्याओं के समाधान तथा मिट्टी की मूर्तियों को प्रोत्साहन देने के लिए किस प्रकार की पहल करते हैं।



