मुंगेली/महज तीन महीने में गाढ़ी कमाई को दोगुना और तिगुना करने का सब्जबाग दिखाकर लाखों रुपये की ठगी करने और एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह बर्बाद करने का एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। चिटफंड कंपनी के नाम पर हुई इस धोखाधड़ी के गहरे सदमे और मानसिक तनाव के कारण परिवार के मुखिया अजय देवांगन की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की बेबस विधवा सुनीता देवांगन ने आज अपने परिजनों और दर्जनों गवाहों के साथ मुंगेली पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई व अपनी राशि वापस दिलाने की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार,नगर के गांधी वार्ड,सदर बाजार,निवासी सुनीता देवांगन ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए आवेदन में बिलासपुर निवासी ऋषि देवांगन,अरुण बंजारे और नीलू यादव नाम के तीन शातिर ठगों के खिलाफ नामजद शिकायत की है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि इन आरोपियों ने एक सुनियोजित साजिश के तहत चिटफंड कंपनी का जाल फैलाकर न केवल अजय देवांगन को अपनी ठगी का शिकार बनाया,बल्कि मुंगेली के कई अन्य सीधे-साधे नागरिकों को भी लाखों रुपये का चूना लगाया।
नगर के एक होटल हुई बैठक के बाद शुरू हुआ बर्बादी का खेल
शिकायत पत्र के मुताबिक,बर्बादी के इस खेल की शुरुआत 06 फरवरी 2026 को मुंगेली के पुनीत रेस्टोरेंट में आयोजित एक गुप्त बैठक से हुई थी। बिलासपुर के अमेरी कॉलोनी निवासी ऋषि देवांगन ने अपने प्रमोटर अरुण बंजारे,निवासी,मंगला,बिलासपुर के साथ मिलकर यह बैठक बुलाई थी। इस बैठक में मृतक अजय देवांगन के साथ उनके कुछ प्रमुख मित्र भी शामिल हुए थे। आरोपियों ने वहां उपस्थित सभी लोगों को एक तथाकथित चिटफंड कंपनी का प्लान समझाया और दावा किया कि यदि वे इस योजना में पैसा निवेश करते हैं, तो उनका पैसा हर तीन महीने में दोगुना से तिगुना होता जाएगा।
ऋषि देवांगन का मुंगेली में अपने रिश्तेदारों के यहां लगातार आना-जाना होने के कारण स्थानीय लोग उस पर पूरा भरोसा करते थे। इसी सामाजिक विश्वास का फायदा उठाते हुए आरोपियों ने अजय देवांगन से भारी-भरकम नगद राशि ऐंठ ली और बाद में चालाकी से कुछ ऑनलाइन ट्रांजैक्शन भी अपने बैंक खातों में करवा लिए। अजय देवांगन को देखकर उनके अन्य मित्रों और साथियों ने भी अपनी मेहनत की कमाई आरोपियों के पास जमा कर दी थी।
ऑफिस में आकर बनाया दबाव और आरोपियों ने दी झूठी गारंटी
कुछ दिनों बाद,जब अजय देवांगन ने और निवेश करने से हिचकिचाहट दिखाई तो ऋषि देवांगन और अरुण बंजारे लगातार उनके ऑफिस आकर दबाव बनाने लगे। इस धोखाधड़ी को और पुख्ता रूप देने के लिए उनके साथ ‘मैडम’ नीलू यादव,निवासी दीनदयाल कॉलोनी,मंगला,बिलासपुर भी शामिल हो गई। नीलू यादव ने अजय देवांगन को यह कहकर झूठा भरोसा दिया कि “इस कंपनी में आपको कोई नुकसान कभी नहीं होगा,मैं इसकी पूरी गारंटी लेती हूं।”आरोपियों के इसी लगातार दबाव और झांसे में आकर अजय देवांगन ने लगभग 4 लाख रुपये की बड़ी रकम आरोपियों के हवाले कर दी।
मुख्य आरोपी जिनके खिलाफ हुई शिकायत:
ऋषि देवांगन,निवासी:अमेरी,बिलासपुर,अरुण बंजारे,निवासी:मंगला,बिलासपुर
श्रीमती नीलू यादव,निवासी:दीनदयाल कॉलोनी,मंगला,बिलासपुर
पैसे मांगने पर मिला कठोर जवाब,फोन उठाना किया बंद
समय बीतने के साथ जब निवेश की अवधि पूरी हुई और अजय देवांगन ने अपने पैसे और मुनाफे के बारे में पूछताछ शुरू की, तो आरोपियों का असली चेहरा सामने आ गया। ऋषि देवांगन पहले तो गोलमटोल जवाब देकर और “कंपनी का स्कीम अपडेट हो रहा है” कहकर महीनों तक मामले को घुमाता रहा। जब अजय देवांगन ने लगातार संपर्क किया,तो आरोपियों ने उनके फोन उठाना ही बंद कर दिया। अत्यंत परेशान होकर जब पीड़ित ने व्हाट्सएप पर मैसेज कर अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने बेहद कठोर शब्दों में जवाब दिया कि “आपने पैसा कंपनी में लगाया है,मुझे नहीं दिया है,जो करना है कर लो।”
मानसिक तनाव ने ली जान:उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार
अपनी जीवनभर की पूंजी डूबते देख अजय देवांगन गहरे डिप्रेशन में चले गए। वे दिन-रात गुमसुम रहने लगे और हमेशा भारी टेंशन में डूबे रहते थे। जब पत्नी सुनीता ने अपनी दोनों बेटियों की कसम खिलाकर पूछा,तब उन्होंने इस धोखाधड़ी का खुलासा किया था।
इसी अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण 11 जून को दोपहर के समय खाना खाते-खाते अचानक वे पसीने से तर-बतर हो गए और चक्कर खाकर जमीन पर गिर पड़े। परिजनों ने समाज के अध्यक्ष आनंद देवांगन की मदद से उन्हें तुरंत मुंगेली के एक निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बिलासपुर रेफर कर दिया।
बिलासपुर के डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि अत्यधिक हाइपरटेंशन के कारण उनके दिमाग की नस में गंभीर समस्या आ गई है और उन्हें तुरंत रायपुर ले जाने की सलाह दी। बिना समय गंवाए परिजन उन्हें रायपुर के अस्पताल ले गए,लेकिन अफसोस कि डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी अजय देवांगन को नहीं बचाया जा सका और 12 जून की रात इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। डॉक्टरों की रिपोर्ट में साफ उल्लेख है कि मौत का मुख्य कारण अत्यधिक तनाव था।
कई अन्य नागरिक और मित्र भी हुए ठगी के शिकार
अजय देवांगन की मौत के बाद जब इस मामले की विस्तृत जानकारी गई तो पता चला कि यह ठगी सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं थी। आरोपियों ने मुंगेली के अनिल देवांगन,दुर्गेश देवांगन,आनंद देवांगन,विष्णु देवांगन,जगदीश देवांगन,जलेश देवांगन,सुदामा देवांगन,हीरालाल नानू देवांगन,मीत देवांगन और घनश्याम देवांगन जैसे दर्जनों लोगों से भी इसी तरह धन दोगुना करने का लालच देकर लाखों रुपये हड़पे हैं। घटना के दो दिन पूर्व ही मृतक अजय देवांगन ने अपने घनिष्ठ मित्रों अनिल और दुर्गेश को इस पूरी धोखाधड़ी और आरोपियों की धमकियों के बारे में रोते हुए बताया था।
बेबस विधवा की न्याय की गुहार
मृतक की पत्नी सुनीता देवांगन ने भावुक हुए कहा,”आरोपियों के लालच और धोखाधड़ी ने मेरे हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। मेरे पति की मौत के असली जिम्मेदार ये तीनों ठग हैं। मैं एक अबला नारी हूं और अपनी दो पुत्रियों के साथ अनाथ हो चुकी हूं।” उन्होंने एसएसपी मुंगेली से गुहार लगाई है कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए,उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए और पीड़ितों की मेहनत की कमाई वापस दिलाई जाए ताकि भविष्य में कोई और शातिर ठग किसी गरीब और सीधे-साधे परिवार को इस तरह मौत के मुंह में न धकेल सके।



