मुंगेली/नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत गौरवपथ निर्माण कार्य को लेकर भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से रायपुर रोड से पड़ाव चौक तक डिवाइडर निर्माण का कार्य स्वीकृत हुआ है,लेकिन इसमें गुणवत्ता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
आम जनता की शिकायतों के बाद नगर पालिका के वरिष्ठ पार्षद एवं जिला कांग्रेस प्रवक्ता अरविंद वैष्णव ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई खामियां उजागर हुईं। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि—
“जनता जो टैक्स देती है,उसी से सरकार विकास कार्यों के लिए राशि स्वीकृत करती है,लेकिन गौरवपथ निर्माण में ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार किया जा रहा है। गुणवत्तायुक्त कार्य की जगह मनमानी कराई जा रही है।”

होर्डिंग्स को हटाए बिना ही डिवाइडर निर्माण
निरीक्षण में यह तथ्य भी सामने आया कि पुराने डिवाइडर को तोड़कर नए सिरे से निर्माण किया जा रहा है। इस दौरान विद्युत पोल और पेड़-पौधों को तो हटा दिया गया,लेकिन विज्ञापन होर्डिंग्स जस के तस छोड़ दिए गए। मजदूरों और सुपरवाइजर ने बताया कि नगर पालिका के इंजीनियर और अधिकारियों के निर्देश पर ही होर्डिंग हटाए बिना उसके ऊपर ही डिवाइडर का निर्माण कराया गया।

इंजीनियर के द्वारा किया जा रहा है बचाव
इस संबंध में नगर पालिका इंजीनियर नेमीचंद वर्मा ने बताया कि विज्ञापन एजेंसी संचालक को पत्र लिखकर होर्डिंग्स हटाने की बात कही गई थी, लेकिन संचालक ने न तो कार्रवाई की और न ही कोई जवाब दिया। इंजीनियर ने यह भी कहा कि अगर ठेकेदार ने होर्डिंग के ऊपर निर्माण किया है,तो उसे तोड़वा दिया जाएगा।
आम जनता में आक्रोश
इस पूरे मामले को लेकर आम जनता में गहरी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि शासन विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये खर्च करता है, लेकिन अधिकारी और ठेकेदार की मिलीभगत से कार्य सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित रह जाते हैं। परिणामस्वरूप शासन की मंशा के अनुरूप गुणवत्तायुक्त कार्य नहीं हो पाते और जनता के पैसे का दुरुपयोग होता है।

बड़ा सवाल ये है कि
इस प्रकरण ने एक बार फिर नगर पालिका की कार्यप्रणाली और ठेकेदारों पर निगरानी की कमी को उजागर किया है। सवाल यह है कि जब 5 करोड़ रुपये की लागत से गौरवपथ जैसा महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है तो उसमें इतनी गंभीर लापरवाही क्यों बरती जा रही है? और क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सिमट जाएगा?
👉 कुल मिलाकर,गौरवपथ निर्माण में सामने आई यह गड़बड़ी सिर्फ एक लापरवाही नहीं बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई के साथ खिलवाड़ है।लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को निभाने के बजाय अपने सर्व सुविधायुक्त ऑफिस में बैठ कर ठेकेदार के द्वारा किए जा रहे मनमानियों पर मौन स्वीकृति देते है



