मुंगेली/हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मुंगेली केशरवानी महिला समिति द्वारा सावन माह में धार्मिक एवं आध्यात्मिक जलयात्रा का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। “बोल बम-बोल बम” के जयकारों के बीच समिति की महिला सदस्यों ने जांजगीर-चांपा जिले के खरौद स्थित प्रसिद्ध एवं प्राचीन लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। बेलपत्र, धतूरा एवं शमीपत्र अर्पित करने के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं आरती की गई। इसके साथ ही समिति की इस धार्मिक जलयात्रा ने अपने आठवें वर्ष में प्रवेश करते हुए एक और अध्याय पूरा किया।
समिति की सदस्यों ने बताया कि पिछले वर्षों में मुंगेली नगर के प्रसिद्ध खर्राघाट शिव मंदिर,हथनीकला,सेतगंगा,बेलापन,सिमगा सोमनाथ,नगर शिव मंदिर एवं मल्हार स्थित शिव मंदिर सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर जलयात्रा एवं जलाभिषेक किया जा चुका है। इस वर्ष समिति ने खरौद के ऐतिहासिक लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर को जलयात्रा के लिए चुना।
लक्ष्मणेश्वर महादेव में आस्था और इतिहास का संगम
खरौद स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर को छत्तीसगढ़ के प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिरों में विशेष स्थान प्राप्त है। लोकमान्यता के अनुसार इस मंदिर का संबंध रामायण काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम के अनुज लक्ष्मण जी ने खर एवं दूषण के वध के बाद ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए यहां शिवलिंग की स्थापना की थी,जिसके कारण इसे लक्ष्मणेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।
मंदिर की प्राचीनता,स्थापत्य कला और धार्मिक मान्यताएं इसे श्रद्धालुओं के साथ-साथ इतिहास एवं पुरातत्व में रुचि रखने वालों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनाती हैं। मंदिर में शैव,वैष्णव और शाक्त परंपराओं से जुड़ी सुंदर कलाकृतियां एवं मूर्तियां देखने को मिलती हैं। गंगा-यमुना,अर्द्धनारीश्वर तथा भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूपों की कलात्मक आकृतियां मंदिर की प्राचीन वास्तुकला की विशेषता हैं।
रहस्यमयी लक्षलिंग बना श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र
लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग को ‘लक्षलिंग’ कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शिवलिंग में लगभग एक लाख सूक्ष्म छिद्र हैं। इनमें से एक छिद्र को पातालगामी माना जाता है,जिसमें अर्पित किया गया जल दिखाई नहीं देता,जबकि एक अन्य छिद्र में सदैव जल भरा रहने की मान्यता है।
श्रद्धालुओं के बीच यह भी मान्यता है कि यहां जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मनोकामना के लिए एक लाख चावल के दाने अर्पित करने की परंपरा भी बताई जाती है। सावन के महीने में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं,वहीं वर्षभर भी देश-प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से लोग भगवान लक्ष्मणेश्वर महादेव के दर्शन एवं पूजन के लिए पहुंचते हैं।
शिवरीनारायण में रामजानकी मंदिर के किए दर्शन
लक्ष्मणेश्वर महादेव में पूजा-अर्चना के बाद केशरवानी महिला समिति की सदस्यों ने शिवरीनारायण पहुंचकर रामजानकी मंदिर के दर्शन किए। महानदी, शिवनाथ और जोंक नदियों के पावन संगम पर स्थित शिवरीनारायण धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है।
रामायण से जुड़ी लोकमान्यता के अनुसार इसी क्षेत्र में माता शबरी ने भगवान श्रीराम को प्रेमपूर्वक बेर अर्पित किए थे। क्षेत्र में स्थित प्राचीन मंदिर एवं धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। त्रिवेणी संगम की प्राकृतिक सुंदरता भी पर्यटकों को आकर्षित करती है।
त्रिवेणी संगम और ‘मिनी गोवा’ में लिया मनोरंजन का आनंद
धार्मिक यात्रा के साथ समिति की महिलाओं ने त्रिवेणी संगम क्षेत्र के प्राकृतिक वातावरण का भी आनंद लिया। संगम के समीप स्थित सुंदर नदी टापू को स्थानीय स्तर पर ‘मिनी गोवा’ के नाम से भी जाना जाता है। यहां महिलाओं ने प्राकृतिक नजारों का आनंद लेने के साथ अपने-अपने घरों से लाए गए स्वादिष्ट व्यंजनों का मिलकर लुत्फ उठाया।
यात्रा के दौरान मनोरंजक गेम,हंसी-मजाक और रील बनाकर महिलाओं ने सावन की इस यात्रा को यादगार बनाया। धार्मिक आस्था के साथ आपसी मेल-जोल और मनोरंजन से पूरा वातावरण उत्साह और उमंग से भर गया।
केशरवानी महिला समिति की सदस्यों ने कहा कि सावन के पवित्र महीने में आयोजित यह जलयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज की महिलाओं को एकजुट करने, आपसी प्रेम-सौहार्द बढ़ाने और छत्तीसगढ़ की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का माध्यम भी है। समिति ने भविष्य में भी इस परंपरा को निरंतर जारी रखने की बात कही।



