मुंगेली/जिला मुख्यालय के निजी अस्पतालों में इन दिनों मरीजों के स्वास्थ्य और उनकी जेब के साथ सरेआम खिलवाड़ चल रहा है। बड़े-बड़े होर्डिंग्स पर ’24 घंटे डॉक्टरों की उपलब्धता’ का दावा करने वाले इन अस्पतालों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। भारी-भरकम फीस चुकाने के बाद भी मरीजों को न तो समय पर डॉक्टर मिल रहे हैं और न ही विशेषज्ञ सेवाएं। इस गंभीर अव्यवस्था को लेकर अब राजनीति भी गरमा गई है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष दीपक गुप्ता ने एक निजी अस्पताल की इस मनमानी को लेकर तीखा विरोध दर्ज कराते हुए प्रदेश सरकार और जिले के स्वास्थ्य विभाग को सीधे कटघरे में खड़ा किया है।शहर कांग्रेस अध्यक्ष दीपक गुप्ता ने अपने साथ हुए इस परेशानी का वीडियो सोशल मीडिया में भी पोस्ट किया है जो अब वायरल हो रहा है
भारी-भरकम फीस,फिर भी विशेषज्ञ डॉक्टर गायब
अस्पतालों के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा होता है कि डॉक्टर 24 घंटे उपलब्ध हैं,लेकिन इलाज के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। ₹500 जैसी मोटी ओपीडी (OPD) फीस वसूलने के बाद भी मरीजों को घंटों इंतजार कराया जाता है। हद तो तब हो जाती है जब लंबा इंतजार करने के बाद भी संबंधित बीमारी का विशेषज्ञ डॉक्टर मौके पर मिलता ही नहीं है। जनता पैसा देने को तैयार है,लेकिन इसके बदले उन्हें मानसिक प्रताड़ना और अधूरी स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं।
सरकारी तंत्र बेअसर,कुंभकर्णी नींद में जिम्मेदार
सरकारी अस्पतालों की बदहाली से हर कोई वाकिफ है,लेकिन मुंगेली में सरकारी तंत्र इतना कमजोर और लाचार हो चुका है कि उसका निजी अस्पतालों पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। स्वास्थ्य विभाग में बैठे सक्षम अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। कुछ दिनों पहले भी एक सामाजिक कार्यकर्ता ने वीडियो जारी कर निजी अस्पतालों की पोल खोली थी, लेकिन हमेशा की तरह जांच की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी गहरी नींद में सोए रहे और कोई कार्रवाई नहीं हुई। नतीजतन, मुंगेली का हर निजी अस्पताल आज अपनी मनमर्जी चला रहा है।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष दीपक गुप्ता ने बताया कि
मैं अपने भाई के बच्चे के इलाज के लिए आपातकालीन स्थिति में रात्रि करीब 3:00 बजे जिला मुख्यालय के एक निजी अस्पताल पहुंचा था। वहां पहुंचते ही अस्पताल के कर्मचारियों ने कहाकि पहले ₹500 ओपीडी शुल्क जमा कराइए। शुल्क जमा करने के बाद हम करीब डेढ़ घंटे (शाम 4:30 बजे तक) इंतजार करते रहे,लेकिन कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं था।
काफी देर बाद जो डॉक्टर केबिन में आया,वह शिशु रोग विशेषज्ञ था ही नहीं। मजबूरी और बच्चे की तकलीफ को देखते हुए हमें उसी डॉक्टर से इलाज कराना पड़ा। जब ₹500 फीस लेने के बाद भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिल सकता,तो आम जनता को ये क्या सुविधा दे रहे हैं?
क्यों इनके द्वारा 24 घंटे आपातकालीन सुविधा होने की बात और दावा करते हैं जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है ये सीधे तौर पर पर आम जनता के साथ धोखा है,मुंगेली का हर निजी अस्पताल अपनी मनमर्जी पर उतारू है। हम विपक्ष में हैं,हम जनता की आवाज उठा सकते हैं विरोध कर सकते हैं,लेकिन समाधान तो सत्ता पक्ष और सक्षम अधिकारियों के हाथ में है। सवाल यह उठता है कि आखिर क्या वजह है कि खुलेआम जनता के स्वास्थ्य और जिंदगी से खिलवाड़ होने के बाद भी सरकार और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इन पर कोई कार्रवाई नहीं करते? इनकी यह चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े करती है।”
दीपक गुप्ता,शहर कांग्रेस अध्यक्ष,मुंगेली
विपक्ष का सवाल:जनता दे रही टैक्स और फीस,तो सत्ता पक्ष की क्या है जिम्मेदारी?
शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने साफ तौर पर कहाकि वे विपक्ष के नाते अपना धर्म निभा रहे हैं और इस शिकायत के जरिए सोए हुए प्रशासन को जगाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन असली जिम्मेदारी उन लोगों की है जो सत्ता के गलियारों में बैठे हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की शह के बिना इस तरह की मनमानी संभव नहीं है। अब देखना यह होगा कि इस मामले के सामने आने के बाद भी जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कोई ठोस कदम उठाते हैं या निजी अस्पतालों को इसी तरह जनता को लूटने की खुली छूट मिलती रहेगी।



