मुंगेली/बिना दूरदर्शिता और जनहित को ताक पर रखकर शुरू की गई योजनाएं किस तरह सरकारी खजाने और जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी का जरिया बनती हैं, इसका जीता-जागता सबूत मुंगेली नगर पालिका क्षेत्र का ‘गौरवपथ’ है। करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाला यह गौरवपथ अपनी कछुआ चाल,भारी लेटलतीफी और गुणवत्ताहीन निर्माण के कारण अब खुद शासन-प्रशासन के गले की हड्डी बन चुका है। इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सीधे तौर पर संगठित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं,जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
डिप्टी सीएम ने दिलाई थी 5 करोड़ की मंजूरी,पर धरातल पर सिर्फ मनमानी और भ्रष्टाचार
नगर के रायपुर रोड में करीब 800 मीटर के गौरवपथ निर्माण के लिए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय निकाय मंत्री अरुण साव ने अधोसंरचना मद से करीब 5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत कराई थी। विभागीय टेंडर प्रक्रिया के बाद मेसर्स अविनाश बिल्डकॉन इंफ्रास्ट्रक्चर,बिलासपुर को 19 जून 2025 को कार्य आदेश (वर्क ऑर्डर) जारी किया गया था।
इस प्रोजेक्ट के तहत नवीन डिवाइडर,विद्युतीकरण (नए खंभे),सौंदर्यीकरण,पाथवे और चमचमाती बीटी रोड (डामरीकरण) के साथ-साथ नए सिरे से नाली का निर्माण किया जाना था। इस कार्य की देखरेख की सीधी जिम्मेदारी नगर पालिका के जिन अधिकारियों को सौंपी गई थी। लेकिन उनके उदासीनता के चलते सालभर बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

सीएम के दौरे और डिप्टी सीएम की साख को ठेकेदार ने ठेंगे पर रख कर रहा है मनमानी:संजय यादव
इस पूरे मामले में कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष संजय यादव ने सीधे तौर पर ठेकेदार और प्रशासन की मिलीभगत पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहाकि
मुंगेली की जनता के साथ विकास के नाम पर यह सबसे बड़ा भद्दा मजाक है। जिस गौरवपथ को नगर की लाइफलाइन होना था,उसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया है। संबंधित ठेकेदार की निरंकुशता इस कदर बढ़ चुकी है कि उसे न तो प्रशासन का डर है और न ही सत्ता का। बीते 10 मई को स्वयं सूबे के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का नगर आगमन हुआ था उन्होंने अपनी आँखों से इस बदहाल स्थिति को देखा। लेकिन ऊँची पहुँच रखने वाले इस ठेकेदार पर प्रदेश के मुखिया के आगमन का भी कोई असर नहीं हुआ वह आज भी अपनी मर्जी से मनमाने ढंग से काम कर रहा है।
सबसे हैरान करने वाली बात तो यह है कि यह नगरीय निकाय मंत्री अरुण साव का गृह जिला है अगर उनके अपने ही गृह जिले में,उनके नाक के नीचे एक ठेकेदार खुलेआम भ्रष्टाचार का खेल खेल रहा है,तो पूरे प्रदेश का क्या हाल होगा? नाली निर्माण के नाम पर यहाँ बड़ी धोखाधड़ी हो रही है। नई नाली बनाने का पैसा डकारने के लिए पुरानी और जर्जर नाली के ऊपर ही कुछ जगहों पर सीमेंट का प्लास्टर मारकर उसे नया दिखाने का कुंठित और घटिया प्रयास किया जा रहा है। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए

भ्रष्ट ठेकेदार को सजा के बदले नए ठेके सौंपना,नेताओं-अफसरों की साठगांठ का सबूत:सूरज यादव
स्थानीय वार्ड पार्षद सूरज यादव ने नगर पालिका के अधिकारियों और ठेकेदार के बीच चल रहे खेल को बेनकाब करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहाकि
कार्य का शुभारंभ हुए एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन काम केवल 30 प्रतिशत हुआ है। जो थोड़ा-बहुत निर्माण किया भी गया है,वह पूरी तरह गुणवत्ताविहीन है। नियम तो यह कहता है कि तय समय-सीमा में काम न करने वाले ठेकेदार का टेंडर निरस्त कर उसे तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए। लेकिन मुंगेली नगर पालिका में मलाई,मिठाई का खेल चल रहा है! यहाँ सजा देने के बजाय, उसी दागी ठेकेदार को नगर पालिका क्षेत्र के अन्य नए कार्यों के ठेके भी थाली में परोस कर दिए जा रहे हैं। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है? यह सीधे तौर पर इस बात का प्रमाण है कि सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधियों और नगर पालिका के आला अधिकारियों का इस ठेकेदार के साथ गहरा व्यक्तिगत स्वार्थ जुड़ा हुआ है
यह गौरवपथ नहीं,बल्कि इन भ्रष्टाचारियों के लिए ‘कमाई का अघोषित एटीएम’ बन चुका है,जहां से जनता के टैक्स का पैसा निकालकर आपस में बंदरबांट किया जा रहा है। इस आधे-अधूरे नाली निर्माण के चलते बारिश का पानी लोगों के घरों और दुकानों में घुस रहा है,जिससे व्यापारी और आम नागरिक खासे परेशान हैं। जब हम इसकी शिकायत लेकर अधिकारियों के पास जाते हैं,तो वे अपने ऐसी चैंबरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं होते सिर्फ खोखला आश्वासन देकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं
कलेक्टर के नोटिस और विधायक के निर्देश भी साबित हुए बेअसर
प्रशासनिक अनदेखी का आलम यह है कि गत 10 अप्रैल को जिले के कलेक्टर कुंदन कुमार ने अधिकारियों के साथ गौरवपथ का औचक निरीक्षण किया था। कार्य की धीमी गति को देखकर कलेक्टर ने गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए ठेकेदार और इंजीनियर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके अलावा क्षेत्रीय विधायक पुन्नूलाल मोहले ने भी अपने समर्थकों के साथ नगर में हो रहे विकास कार्यों का निरीक्षण कर समय-सीमा में काम पूरा करने के कड़े निर्देश दिए थे। परंतु ठेकेदार और नगर पालिका के निरंकुश अधिकारियों की सेहत पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। वे किसी की परवाह किए बिना अपनी मनमानी में मदहोश हैं।
हरे भरे डिवाइडर और व्यवस्थित सड़क को उजाड़कर बना दिया संकरा
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस रायपुर रोड के 800 मीटर पैच में पहले से ही एक बेहद व्यवस्थित डिवाइडर था,जिसमें भारी संख्या में हरे-भरे पेड़ लगे हुए थे, जिसकी शीतलता से लोग बेहद संतुष्ट थे। लेकिन साल 2025 में तथाकथित ‘विकास की गंगा’ बहाने के नाम पर नेताओं और अफसरों की नजर इस हरी-भरी सड़क पर पड़ी। बिना आम नागरिकों से चर्चा किए,एकतरफा फैसला लेकर करोड़ों रुपये स्वीकृत करा दिए गए। निर्माण के नाम पर सबसे पहले उन हरे-भरे पेड़ों को बेतरतीब तरीके से उखाड़ फेंका गया। इसके बाद पहले से ही संकरी सड़क पर ठेकेदार ने अपनी ‘नायाब प्रतिभा’ दिखाते हुए करीब 4 फीट चौड़ा नया डिवाइडर खड़ा कर दिया,जिससे सड़क और अधिक संकरी व दुर्घटनाजन्य हो गई है।
जनता की चुप्पी का फायदा उठा रहा है भ्रष्ट तंत्र
नगर की त्रस्त जनता अब खुलकर यह कह रही है कि इस गौरवपथ को नया बनाने की कोई जरूरत ही नहीं थी। नगरीय प्रशासन विभाग चाहता तो कुछ लाख रुपये खर्च कर इसका बेहतर मेंटेनेंस कर सकता था। लेकिन करोड़ों का टेंडर इसलिए निकाला गया ताकि ‘काम मनमाने ढंग से करो,समय-समय पर करोड़ों का भुगतान उठाओ और आपस में बंदरबांट कर लो’। भ्रष्टाचारियों को भरोसा है कि टैक्स के तले दबी जनता दो-चार दिन शोर मचाएगी और फिर शांत हो जाएगी। आम जनता की इसी चुप्पी का फायदा उठाकर शासकीय पैसों की खुली लूट मची है।
अब देखना यह होगा कि क्या जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली प्रदेश सरकार अपने ही उप मुख्यमंत्री के गृह जिले में हो रहे इस खुले भ्रष्टाचार और मनमानी पर कोई कड़ा कदम उठाएगी? क्या लापरवाह इंजीनियरों और बेलगाम ठेकेदार पर कोई सख्त कार्रवाई होगी या मुंगेली की जनता इस बदहाल,अधूरे गौरवपथ के साए में घुटने को मजबूर रहेगी?



