मुंगेली/प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय निकाय मंत्री अरुण साव के गृह जिले मुंगेली से एक ऐसा मामला सामने आया है,जिसने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर कर दिया है। उपमुख्यमंत्री ने अपने गृह जिले के नगर पालिका क्षेत्र को करोड़ों रुपये के विकासकार्यों की सौगात दी थी ताकि शहर की सूरत बदल सके। लेकिन,अधिकारियों और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत ने इस ‘सौगात’ को अपनी जेबें भरने का ‘अवसर’ बना लिया है। नगर में चल रहे विकासकार्यों में जमकर मनमानी और भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है,जो अब आम जनता के बीच तीखी चर्चा और आक्रोश का विषय बन चुका है।
5 करोड़ का प्रोजेक्ट,12 महीने का समय…और नतीजा सिर्फ 30% ‘घटिया’ काम!
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार द्वारा नगरीय निकाय विभाग के अधोसंरचना मद से गौरवपथ निर्माण के लिए 4 करोड़ 94 लाख 31 हजार रुपए की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई थी। इस कार्य का वर्क ऑर्डर 19 जून 2025 को जारी किया गया था,जिसके तहत ठेकेदार को 12 महीने के भीतर काम पूरा करना था।
इस ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत
नाली और डिवाईडर का निर्माण
विद्युतीकरण और सौंदर्यीकरण
पाथ-वे और चमचमाती सड़क का निर्माण किया जाना था।
लेकिन आज स्थिति यह है कि समयसीमा खत्म होने की कगार पर है और संबंधित ठेकेदार मेसर्स अविनाश बिल्डकॉन इंफ्रास्ट्रक्चर,बिलासपुर द्वारा अब तक मात्र 30 प्रतिशत कार्य ही कराया गया है। जो काम हुआ भी है,उसकी गुणवत्ता इतनी घटिया है कि वह भ्रष्टाचार की कहानी खुद बयां कर रही है।
उखड़ते पाथ-वे और दरकती कलाकृतियां:’कागजी’ सौंदर्यीकरण की खुली पोल
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा बनाया जा रहा पाथ-वे तय मानकों के बिल्कुल विपरीत है। नव-निर्मित पाथ-वे अभी से कई जगहों से उखड़ने लगा है। हद तो तब हो गई जब कई जगहों पर पाथ-वे को मात्र 2 से 3 फीट का बनाकर ही औपचारिकता पूरी कर दी गई।
यही नहीं,सौंदर्यीकरण के नाम पर डिवाइडर में लगाई गईं मटकी और कटोरे जैसी कलाकृतियों में अभी से बड़ी-बड़ी दरारें साफ तौर पर देखी जा सकती हैं। निर्माण में सीमेंट-कांक्रीट के अनुपात और सामग्री की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ साफ नजर आ रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि ठेकेदार का एकमात्र मकसद गुणवत्तापूर्ण काम करना नहीं,बल्कि सरकारी पैसे का बंदरबांट करना है।
जनता का टैक्स,अधिकारियों का ‘मूक समर्थन’
इस पूरे घालमेल के बीच नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी सबकुछ जानते हुए भी ‘धृतराष्ट्र’ बने बैठे हैं। अधिकारियों की यह रहस्यमयी चुप्पी ठेकेदार के हौसलों को और बुलंद कर रही है।
कलेक्टर की फटकार और विधायक के निर्देश भी बेअसर!
इस कछुआ गति और गुणवत्ताहीन निर्माण को लेकर मुंगेली की त्रस्त जनता ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई थी। इसके बाद अप्रैल महीने में जिले के कलेक्टर कुंदन कुमार ने मुंगेली नगर के विकासकार्यों का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान गौरवपथ की बदहाली देखकर कलेक्टर ने भारी नाराजगी जताई थी और कछुआ गति से चल रहे निर्माण को लेकर ठेकेदार व नगर पालिका के इंजीनियर को जमकर फटकार लगाते हुए नोटिस जारी किया था।
इसके बाद जून महीने में स्थानीय विधायक पुन्नूलाल मोहले ने भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ मौके का मुआयना किया और कार्यों को गुणवत्ता के साथ समयसीमा में पूरा करने की कड़ी हिदायत दी थी। लेकिन प्रशासनिक हंटर और जनप्रतिनिधियों के निर्देशों का ठेकेदार और इंजीनियरों पर कोई असर नहीं हुआ। वे आज भी बेखौफ होकर अपनी मनमानी पर आमादा हैं।
बड़ा सवाल:जनता के पैसों की इस बर्बादी का जिम्मेदार कौन?
मुंगेली की आम जनता आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। नागरिकों का कहना है कि वे जो टैक्स देते हैं उसी पैसे से शहर के विकास का खाका तैयार होता है। लेकिन यहाँ जनता की गाढ़ी कमाई को सीधे-सीधे बंदरबांट जा रहा है। नगर पालिका के जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस पूरे तमाशे को मूकदर्शक बनकर देख रहे हैं।
अब नगर के हर चौक-चौराहे पर रहवासी एक-दूसरे से यही सवाल पूछ रहे हैं
क्या मुंगेली में हो रहे इस खुले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कोई कड़ा कदम उठाया जाएगा?
क्या दोषी ठेकेदार का लाइसेंस ब्लैकलिस्ट होगा और लापरवाह अधिकारियों पर गाज गिरेगी?
या फिर उपमुख्यमंत्री के गृह जिले में विकास के नाम पर यह ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ का खेल ऐसे ही बिना किसी खौफ के बदस्तूर जारी रहेगा?
आम जनता की मांग ठेकेदार द्वारा कराए गए कार्य का उच्च स्तरीय जांच कराया जाए
अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद क्या शासन-प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटती है या फिर कागजी खानापूर्ति कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।



