मुंगेली/नगर के पुराना बस स्टैंड स्थित बहुचर्चित अपोलो फार्मेसी बिल्डिंग का मामला एक बार फिर गरमा गया है। करीब दो माह पूर्व जिला प्रशासन और नगर पालिका की संयुक्त टीम ने जिस अवैध निर्माण पर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर चलाया था,वहां दोबारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। प्रशासन की नाक के नीचे हो रहे इस दुस्साहस ने न केवल नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं,बल्कि यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर इस अतिक्रमणकारी को किसका संरक्षण प्राप्त है? वही आमलोगों में भी ये चर्चा है कि पहुंच का पावर है या मैनेज का है खेल
हाईकोर्ट से झटका,प्रशासन का एक्शन,फिर भी कम नहीं हुए हौसले
गौरतलब है कि सरदार पटेल वार्ड क्रमांक 02 स्थित इस भूमि पर श्रीमती रुचि जैन द्वारा स्वीकृत नक्शे से अधिक निर्माण किया गया था। इस मामले में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर ने भी याचिका खारिज कर दी थी,जिसके बाद राजस्व और नगर पालिका की टीम ने अवैध हिस्से को जमींदोज कर दिया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कार्यवाही के महज दो महीने के भीतर ही उसी स्थान पर पुनःअवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है।
नगर पालिका का नोटिस:48 घंटे की मोहलत खत्म
नगर पालिका मुंगेली ने 17 मार्च 2026 को श्रीमती रुचि जैन को नोटिस जारी कर दो दिनों के भीतर जवाब मांगा था। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि यह कृत्य नगर पालिका अधिनियम और माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का खुला उल्लंघन है। हालांकि,नोटिस की समय सीमा समाप्त हो चुकी है,लेकिन मौके पर निर्माण कार्य रुकने के बजाय प्रशासन की सुस्ती का फायदा उठाते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है।
नजूल अधिकारी का बड़ा बयान:’यह सिविल जेल का मामला है’
इस पूरे प्रकरण पर नजूल अधिकारी रेखा चन्द्रा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि:
“अवैध निर्माण हटाए जाने के बाद दोबारा निर्माण करना शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने जैसा है। यह सीधे तौर पर सिविल जेल का मामला बनता है, जिसका अधिकार क्षेत्र मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के पास है। हमने पूर्व में नियमानुसार तोड़फोड़ की कार्यवाही की थी,अब दोबारा निर्माण पर संबंधित एसडीएम द्वारा वैधानिक कार्यवाही की जानी चाहिए।”
क्या राजनीतिक संरक्षण के कारण बुलंद हैं हौसले?
आम जनता के बीच यह सवाल कौंध रहा है कि जब एक बार प्रशासन बुलडोजर चला चुका है,तो बिल्डिंग मालिक में इतनी हिम्मत कहां से आई कि वह दोबारा उसी जगह ईंट-पत्थर खड़ा कर दे? क्या इसे प्रशासनिक शिथिलता माना जाए या फिर किसी राजनीतिक धुरंधर का सहारा? नगर पालिका सीएमओ ने इस संबंध में एसडीएम को पत्र लिखकर जल्द से जल्द अवैध निर्माण को तोड़ने की बात कही है।
अब देखना यह होगा कि मुंगेली जिला प्रशासन इस खुली चुनौती पर कब एक्शन लेता है। क्या एक बार फिर ‘बुलडोजर’ अपनी गर्जना करेगा,या नियमों को ताक पर रखने वालों के आगे तमाशबीन नजर आता है



