मुंगेली/छत्तीसगढ़ के जिले में सत्र न्यायालय ने एक चर्चित हत्या मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए महिला सहित तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला 20 फरवरी 2026 को सत्र न्यायाधीश श्रीमती गिरिजा देवी मेरावी द्वारा सुनाया गया।


मामला क्या था?
प्रकरण थाना के अपराध क्रमांक 209/2024 से संबंधित है। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 452 (गृह अतिचार), 341 (गलत तरीके से रोकना), 323 (मारपीट) एवं 302/34 (सामूहिक हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
आरोपीगण:
- गौरीशंकर उर्फ गुड्डा यादव (54 वर्ष)
- रविशंकर यादव (32 वर्ष)
- श्रीमती द्रौपती बाई (50 वर्ष)
सभी निवासी ग्राम कटामी दैहानपारा,चौकी खुड़िया, थाना लोरमी,जिला मुंगेली के हैं।
घटना का विवरण
घटना 27 मई 2024 को शाम लगभग 6:30 बजे ग्राम कटामी दैहानपारा में हुई। आरोपियों ने पूर्व नियोजित योजना के तहत टिकरा पड़त भूमि पर आहत अघनू यादव एवं मृतक यदुनंदन यादव पर हमला किया।
अभियोजन के अनुसार,आरोपियों ने पहले घर में घुसकर गृह अतिचार किया,फिर अघनू यादव और यदुनंदन यादव का रास्ता रोका। इसके बाद लाठी,डंडा और टंगिया से हमला कर यदुनंदन यादव की हत्या कर दी। हमले में अघनू यादव घायल हुए।
जांच और सुनवाई
संपूर्ण विवेचना के बाद पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य पाए और अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 23 गवाहों का परीक्षण कराया। शासन की ओर से पैरवी लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर ने की।
न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी पाया और आजीवन कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया।
महिला आरोपी को भी उम्रकैद
इस मामले की विशेष बात यह रही कि न्यायालय ने महिला आरोपी द्रौपती बाई को भी समान रूप से दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मुंगेली न्यायालय में महिला को आजीवन कारावास से दंडित किए जाने का यह विरलतम मामला बताया जा रहा है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून की नजर में सभी समान हैं और न्याय प्राकृतिक सिद्धांतों के आधार पर बिना किसी भेदभाव के किया जाता है।
यह फैसला जिले में कानून व्यवस्था को लेकर एक सख्त संदेश माना जा रहा है कि हत्या जैसे जघन्य अपराध में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।



