मुंगेली/छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 के तहत गिरफ्तार गोविंद सोनवानी (34) को एक बार फिर राहत नहीं मिली है। मुंगेली न्यायालय ने उसकी दूसरी नियमित जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया। सत्र न्यायालय मुंगेली पीठासीन अधिकारी श्रीमती गिरिजा देवी मेरावी के द्वारा इस मामले में सुनवाई पश्चात फैसला दिया गया,इस महत्वपूर्ण मामले में सरकार की ओर से लोक अभियोजक रजनीकांत ठाकुर ने प्रभावी पैरवी करते हुए डायरी में उपलब्ध दस्तावेजों का सूक्ष्म परिसिलन करते हुए आरोपी की जमानत का कड़ा विरोध किया,जिसके आधार पर न्यायालय ने जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
क्या है पूरा मामला?
4 नवंबर 2025 को थाना फास्टरपुर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम बड़े जल्ली के महामाया चौक के पास एक व्यक्ति सट्टा-पट्टी लिख रहा है। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर आरोपी गोविंद सोनवानी को मौके से ही पकड़ लिया। उसके पास से—
सट्टा-पट्टी लिखी पर्ची,एक पेन,₹920 नकद,दो रेडमी मोबाइल फोन,एक जियो कीपैड फोन
जप्त किए गए। आरोपी को उसी दिन न्यायालय में पेश कर जेल भेजा गया था।
पहली जमानत पहले ही खारिज हो चुकी थी
गोविंद सोनवानी की पहली जमानत अर्जी 6 नवंबर 2025 को ही निरस्त की जा चुकी थी। इसके बाद उसने दूसरी जमानत याचिका दायर की, जिसमें उसे बेगुनाह बताते हुए कहा गया कि,वह परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य है,फरार होने की कोई संभावना नहीं,और वह अदालत की सभी शर्तों का पालन करेगा।
लोक अभियोजक ने रखा मजबूत पक्ष
राज्य की ओर से लोक अभियोजक रजनीकांत ठाकुर ने अदालत के समक्ष विस्तृत रूप से बताया कि
आरोपी के विरुद्ध इसी तरह के जुआ संबंधी चार पुराने आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं।
उसकी प्रवृत्ति “अभ्यस्त अपराधी” की है।
जमानत मिलने पर उसके फिर से अपराध दोहराने की आशंका प्रबल है।अदालत ने अभियोजन की इस दलील को गंभीरता से लेते हुए जमानत का विरोध सही माना।
अदालत का फैसला
केस डायरी व पूर्व अपराधों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने माना कि—
आरोपी लगातार जुआ गतिविधियों में संलिप्त रहा है,उसकी आपराधिक प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई देती है,उसे रिहा करने पर अपराध दोहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इसी आधार पर न्यायालय ने दूसरी जमानत याचिका भी खारिज कर दी।



