मुंगेली/लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की छटा रविवार को मुंगेली में भी देखते ही बनी। श्रद्धा,भक्ति और आस्था के संगम से सराबोर आगर नदी के घाटों पर शाम होते ही जनसैलाब उमड़ पड़ा। व्रतियों ने पूरे विधि-विधान के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की दीर्घायु तथा घर-परिवार के कल्याण की कामना की। इस दौरान घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक अमला मुस्तैद रहा।

मुंगेली पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल एवं जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पाण्डेय ने घाट पहुंचकर छठ व्रतियों का अभिवादन किया और उन्हें पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमारी भारतीय संस्कृति और आस्था का अनमोल प्रतीक है, जो शुद्धता,संयम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है।
चार दिवसीय पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से
25 अक्टूबर से प्रारंभ हुए इस चार दिवसीय पर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से हुई। व्रती महिलाएं पवित्र नदी में स्नान कर सात्विक भोजन – लौकी-भात और चने की दाल – ग्रहण करती हैं। इसी दिन से वे पूर्ण सात्विक जीवन अपनाकर छठ व्रत का आरंभ करती हैं।

दूसरा दिन – खरना (26 अक्टूबर)
दूसरे दिन ‘खरना’ के अवसर पर व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं। शाम को गुड़ की खीर और गेहूं की रोटी का प्रसाद तैयार कर भगवान सूर्य की पूजा करती हैं। पूजा उपरांत यह प्रसाद परिवार और पड़ोस में बांटा जाता है। इसके बाद से व्रती 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत रखती हैं।
तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य (27 अक्टूबर)
तीसरे दिन व्रती महिलाएं सोलह श्रृंगार कर आगर नदी के घाटों पर पहुंचीं। सूप में ठेकुआ,फल,गन्ना, सिंघाड़ा,नींबू,नारियल और केले सजाकर उन्होंने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। दीपों की रोशनी और लोकगीतों की मधुर ध्वनियों से पूरा घाट भक्तिमय माहौल में डूब गया।
चौथा दिन – प्रातः अर्घ्य और व्रत पारण (28 अक्टूबर)
पर्व का अंतिम दिन सबसे पावन माना जाता है। तड़के 3 बजे से ही व्रती महिलाएं घाटों की ओर प्रस्थान करती हैं। जैसे ही सूर्य उदय होता है, वे उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करती हैं और संतान सुख,समृद्धि तथा स्वास्थ्य की कामना करती हैं। इसके बाद व्रत का पारण कर प्रसाद और फल ग्रहण किया जाता है।

छठ पूजा का महत्व
छठ पर्व सूर्य उपासना का ऐसा एकमात्र पर्व है जिसमें सूर्यास्त और सूर्योदय दोनों समय अर्घ्य दिया जाता है। यह पर्व अनुशासन, पवित्रता और आत्मसंयम का प्रतीक है। मान्यता है कि इस व्रत से संतान सुख और परिवार में सुख-शांति प्राप्त होती है।
व्रतियों और समिति का उत्साह
व्रत रखी अनामिका सिंह ने बताया कि यह भगवान सूर्य की आराधना का महापर्व है जिसे पूरे उत्साह और श्रद्धा से मनाया जाता है। “हम डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत की शुरुआत करते हैं और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इसे पूर्ण करते हैं,” उन्होंने कहा।
वही छठ समिति के अध्यक्ष अभिलाष सिंह ने प्रशासन और पुलिस विभाग के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी विभागों के संयुक्त प्रयास से इस वर्ष छठ पूजा शांतिपूर्ण और भव्य रूप से संपन्न हो रही है।आस्था,शुद्धता और समर्पण का प्रतीक यह छठ महापर्व मुंगेली में श्रद्धा की गंगा बहा गया। घाटों की रौनक,लोकगीतों की मिठास और सूर्य उपासना की परंपरा ने पूरे शहर को भक्ति के रंग में रंग दिया।
आस्था,शुद्धता और समर्पण का प्रतीक यह छठ महापर्व मुंगेली में श्रद्धा की गंगा बहा गया। घाटों की रौनक,लोकगीतों की मिठास और सूर्य उपासना की परंपरा ने पूरे शहर को भक्ति के रंग में रंग दिया।



