बिलासपुर/मुंगेली/लोकसभा क्षेत्र के शैक्षणिक संस्थानों में प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीति के गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया,जब एक व्यक्ति द्वारा बिना किसी आधिकारिक आदेश के खुद को केंद्रीय राज्य मंत्री व स्थानीय सांसद तोखन साहू का कॉलेज प्रतिनिधि घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं संबंधित व्यक्ति ने अपनी कथित ‘नियुक्ति’ की खबरें न सिर्फ मीडिया में प्रकाशित करवा दीं,बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसे जमकर वायरल कर दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब खुद केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और भाजपा संगठन ने सामने आकर इस पूरे दावों की हवा निकाल दी है और इसे सिरे से खारिज कर दिया है।
केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने किया खंडन:”नहीं की कोई नियुक्ति”
बिलासपुर-मुंगेली लोकसभा क्षेत्र के सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि उन्होंने वर्तमान में किसी भी महाविद्यालय या शिक्षण संस्थान में अपनी ओर से किसी भी व्यक्ति को प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त नहीं किया है। सोशल मीडिया और मीडिया के एक वर्ग में चल रही खबरें पूरी तरह से निराधार और भ्रामक हैं।
केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने कहाकि
मेरे लोकसभा क्षेत्र के बड़े शिक्षण संस्थानों में प्रतिनिधित्व के लिए नियुक्तियां एक साथ की जाएंगी। इसके लिए बहुत जल्द एक आधिकारिक और अधिकृत सूची जारी की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति पैदा न हो। जनता और संस्थान किसी भी अनधिकृत जानकारी पर विश्वास न करें।
भाजपा जिला अध्यक्ष ने भी सोशल मीडिया पर जारी की अपील
इस पूरे विवाद के बाद भाजपा के जिला अध्यक्ष दीनानाथ केशरवानी ने भी मोर्चा संभाला। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक संदेश पोस्ट करते हुए साफ किया कि उक्त कथित नियुक्ति की संगठन या मंत्री स्तर पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इसके साथ ही जिला अध्यक्ष ने मीडिया कर्मियों और सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की है कि बिना पुष्टि के इस तरह की किसी भी संवेदनशील व भ्रामक खबर को प्रकाशित या प्रसारित न करें, जिससे दल या जनप्रतिनिधि की छवि धूमिल हो।

बिना आदेश के ‘दावेदारी’ और वाहवाही लूटने का बढ़ा चलन
दरअसल,यह पूरा मामला उस समय तूल पकड़ा जब संबंधित व्यक्ति ने बिना किसी आधिकारिक पत्र या अधिकृत सूची के, खुद को केंद्रीय मंत्री का प्रतिनिधि बताते हुए खबरें छपवा दीं। सोशल मीडिया पर बधाई संदेशों का दौर भी शुरू हो गया।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में अपना दबदबा दिखाने और शिक्षण संस्थानों में प्रभाव जमाने के लिए कुछ लोग इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। लेकिन केंद्रीय मंत्री की त्वरित सख्ती ने यह साफ कर दिया है कि अनुशासनहीनता और भ्रामक प्रचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आधिकारिक सूची का इंतजार
सांसद कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पूरे लोकसभा क्षेत्र के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए प्रतिनिधियों के नामों पर विचार विमर्श चल रहा है। जल्द ही एक प्रामाणिक सूची जारी की जाएगी, जिसके बाद ही कोई भी व्यक्ति आधिकारिक तौर पर प्रतिनिधित्व करने का पात्र होगा। तब तक इस प्रकार के दावों को पूरी तरह से अवैध माना जाएगा।




