शिक्षकों का सवाल:निर्वाचन कार्य करें या विद्यालय में उपस्थिति दर्ज कराएं? दोहरी जिम्मेदारी से बढ़ी परेशानी,कार्रवाई जारी रहने पर कलेक्टर से शिकायत और बीईओ कार्यालय के घेराव की चेतावनी
मुंगेली/जिले में निर्वाचन कार्य के तहत बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) की जिम्मेदारी निभा रहे शिक्षकों को वीएसके एप में उपस्थिति दर्ज करने के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने पर शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने कड़ी नाराजगी जताई है। मोर्चा के पदाधिकारियों ने तहसीलदार से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि एक ओर शिक्षकों की ड्यूटी निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण कार्य में लगाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर विद्यालय में उपस्थिति दर्ज करने को लेकर नोटिस जारी किया जा रहा है। ऐसे दोहरे दबाव के बीच शिक्षकों के लिए दोनों जिम्मेदारियों का निर्वहन करना मुश्किल हो रहा है।
निर्वाचन ड्यूटी और स्कूल की उपस्थिति,आखिर शिक्षक करें तो क्या करें?
शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि निर्वाचन कार्य में संलग्न बीएलओ को प्रशासन द्वारा निर्धारित जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ता है। ऐसे में उनसे विद्यालय में नियमित उपस्थिति दर्ज करने की अपेक्षा और वीएसके एप में उपस्थिति को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी करना शिक्षकों की परेशानियों को बढ़ाने वाला कदम है।
पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि जब शिक्षक निर्वाचन कार्य में व्यस्त हैं, तब वे एक ही समय में विद्यालय में उपस्थित रहकर अध्यापन कार्य कैसे कर सकते हैं? उनका कहना है कि प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि शिक्षकों को निर्वाचन कार्य प्राथमिकता से करना है या विद्यालय में उपस्थित रहकर पढ़ाई करानी है। दोनों जिम्मेदारियों को एक साथ निभाना व्यावहारिक रूप से कठिन है। इसके बावजूद शिक्षक समय निकालकर विद्यालय पहुंचने और अपने शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन करने का प्रयास करते हैं।
शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों को निशाना बनाने का आरोप
शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों को निशाना बनाकर कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना है कि विकासखंड एवं जिले में ऐसे कई कर्मचारी हैं, जो वीएसके एप में चेक-आउट नहीं कर पाते हैं, लेकिन उनके विरुद्ध इसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाती।
मोर्चा ने आरोप लगाया कि निर्वाचन कार्य में सक्रिय रूप से लगे शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी करना और अन्य मामलों में समान कार्रवाई नहीं करना भेदभावपूर्ण रवैये की आशंका पैदा करता है। पदाधिकारियों ने इसे पूर्वाग्रह से प्रेरित कार्रवाई बताते हुए निष्पक्षता और समान नियम लागू करने की मांग की।
बीईओ कार्यालय में संलग्न शिक्षिका को लेकर भी उठाए सवाल
शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में संलग्न एक शिक्षिका के संबंध में भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि संबंधित शिक्षिका लगातार बीईओ कार्यालय में कार्य कर रही हैं,लेकिन उनके मामले में अब तक इसी तरह का नोटिस जारी नहीं किया गया है। पदाधिकारियों ने पूछा कि यदि वीएसके एप में उपस्थिति को लेकर नियमों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है,तो सभी संबंधित कर्मचारियों पर समान रूप से कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?
मोर्चा ने मांग की कि उपस्थिति संबंधी नियमों को लागू करते समय कर्मचारियों की वास्तविक कार्यस्थिति,निर्वाचन ड्यूटी और प्रशासनिक दायित्वों को भी ध्यान में रखा जाए,ताकि किसी कर्मचारी के साथ अन्याय न हो।
तहसीलदार से मिलकर जताई नाराजगी,निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
इस मामले को लेकर शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारी संजय उपाध्याय,बलराज सिंह,मोहन लहरी,दीपक वेंताल,नेमीचंद भास्कर,भूपेंद्र बंजारा और मनोज अंचल ने तहसीलदार से मुलाकात कर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निर्वाचन कार्य में लगे शिक्षकों की समस्याओं से अवगत कराते हुए कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में समन्वय की कमी के कारण शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव बन रहा है।
पदाधिकारियों का कहना है कि शिक्षक निर्वाचन संबंधी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट रहे हैं। वे अपने शैक्षणिक दायित्वों को भी पूरा करने का प्रयास करते हैं। ऐसे में उनकी परिस्थितियों को समझे बिना नोटिस जारी करना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में निष्पक्षता बरतने और शिक्षकों को अनावश्यक परेशानियों से बचाने की मांग की।
कार्रवाई जारी रही तो कलेक्टर से शिकायत और बीईओ कार्यालय के घेराव की चेतावनी
शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रहती है और शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता तो संगठन कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी,मुंगेली के समक्ष शिकायत दर्ज कराएगा। इसके साथ ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव करने की चेतावनी भी दी गई है।
मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि निर्वाचन कार्य और विद्यालयीन गतिविधियों के बीच उचित समन्वय स्थापित किया जाए,ताकि शिक्षकों को एक ही समय में दो अलग-अलग स्थानों पर उपस्थिति देने जैसी व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
अब देखने वाली बात यह होगी कि शिक्षा विभाग इस मामले में शिक्षकों की आपत्तियों पर क्या रुख अपनाता है और निर्वाचन कार्य में लगे बीएलओ शिक्षकों की उपस्थिति एवं विद्यालयीन दायित्वों को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाती है या नहीं।



