मुंगेली/जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाला कलेक्टर जनदर्शन आम नागरिकों की समस्याओं को सुनने और उनका निराकरण करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस जनदर्शन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से युवा,बुजुर्ग,महिलाएं सहित सैकड़ों लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। यहां कलेक्टर एवं जिले के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आम जनता से प्राप्त आवेदनों पर सुनवाई करते हुए संबंधित समस्याओं के निराकरण की पहल की जाती है। इस दौरान विभिन्न विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहते हैं।लेकिन विडंबना यह है कि जिस स्थान पर लोगों की समस्याओं को दूर करने की बात कही जाती है,उसी जनदर्शन स्थल पर पहुंचने वाले नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जनदर्शन में अपनी फरियाद लेकर पहुंचने वाले लोगों के लिए पेयजल और प्रसाधन जैसी आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था नहीं होने की शिकायत सामने आई है। ऐसे में सवाल उठता है कि अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचने वाले आम नागरिकों को वहां पहुंचने के बाद दूसरी समस्याओं से क्यों जूझना पड़ रहा है?
प्यास बुझाने के लिए भटकते हैं लोग,पानी खरीदकर पीने की मजबूरी
जनदर्शन में शामिल होने के लिए जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। कई बार उन्हें अपनी बारी का इंतजार करते हुए काफी समय तक कलेक्ट्रेट परिसर में रुकना पड़ता है। ऐसे में पेयजल की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। लेकिन जनदर्शन स्थल पर आम नागरिकों के लिए पर्याप्त पेयजल सुविधा उपलब्ध नहीं होने की शिकायत है।
पानी की आवश्यकता पड़ने पर लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ता है। वहीं,कुछ लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले बुजुर्गों,महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए यह स्थिति और भी असुविधाजनक हो सकती है।
ऐसे में सवाल यह है कि जिले के प्रमुख प्रशासनिक कार्यालय में आयोजित होने वाले जनदर्शन में आने वाले लोगों के लिए पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा सुनिश्चित करना क्या जिला प्रशासन की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?
सार्वजनिक प्रसाधन में कहीं ताला,तो कहीं गंदगी और बदबू से परेशानी
पेयजल के साथ-साथ जनदर्शन स्थल के आसपास प्रसाधन की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। यहां स्थित एक सार्वजनिक प्रसाधन में ताला लटका होने की शिकायत है,जबकि दूसरे प्रसाधन की स्थिति इतनी खराब बताई जा रही है कि वहां फैली गंदगी और बदबू के कारण लोग उसका उपयोग करने से भी कतराते हैं।
इसका सबसे अधिक असर महिलाओं,बुजुर्गों,दिव्यांग और उन लोगों पर पड़ता है,जिन्हें लंबे समय तक जनदर्शन स्थल पर रुकना पड़ता है। सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छ एवं उपयोग योग्य प्रसाधन की उपलब्धता केवल सुविधा का विषय नहीं,बल्कि आम नागरिकों की गरिमा,स्वास्थ्य और बुनियादी जरूरतों से जुड़ा मामला है।
ऐसे में जनदर्शन में आने वाले लोगों को स्वच्छ प्रसाधन की सुविधा नहीं मिलना व्यवस्था की गंभीर कमी की ओर संकेत करता है। जरूरत इस बात की है कि बंद पड़े प्रसाधन को उपयोग के लिए खोला जाए तथा नियमित सफाई और रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
स्वच्छता पर उपदेश,लेकिन कलेक्ट्रेट परिसर में ही व्यवस्था की हकीकत पर सवाल
जिले में स्वच्छता को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लोगों को जागरूक करने और साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की जाती है। नागरिकों से सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने की अपेक्षा की जाती है। लेकिन जब जिले के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक परिसर में स्थित जनदर्शन स्थल के आसपास ही गंदगी और दुर्गंध की शिकायत सामने आती है,तो स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
प्रशासन की जिम्मेदारी केवल आम नागरिकों को स्वच्छता का संदेश देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए,बल्कि सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर भी उन मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है,जिनकी अपेक्षा जनता से की जाती है।
जनदर्शन में पहुंचने वाले नागरिकों को स्वच्छ पेयजल और साफ प्रसाधन उपलब्ध कराना कोई बड़ी या असाधारण मांग नहीं है। यह ऐसी बुनियादी सुविधा है,जिसकी व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा आसानी से सुनिश्चित की जा सकती है।
पत्रकारों द्वारा ध्यान आकृष्ट कराने के बाद भी समाधान का इंतजार
जनदर्शन में पहुंचने वाले आम नागरिकों ने इन समस्याओं से पत्रकारों को अवगत कराया। इसके बाद पत्रकारों द्वारा भी जिले के वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए पेयजल एवं प्रसाधन की समुचित व्यवस्था कराने की बात कही गई। इसके बावजूद शिकायत के अनुसार,अब तक इन समस्याओं का प्रभावी समाधान सामने नहीं आया है।
यदि आम नागरिकों की परेशानी से अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं होता,तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इन बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए कितनी बार ध्यान दिलाने की आवश्यकता पड़ेगी?
जनदर्शन का उद्देश्य जनता की समस्याओं को सुनना और उनके निराकरण की दिशा में कार्रवाई करना है। ऐसे में जनदर्शन स्थल पर ही मौजूद मूलभूत सुविधाओं की कमियों को दूर करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
अब कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारियों की पहल पर टिकी निगाहें
जिले के कलेक्टर एवं वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए जनदर्शन स्थल का निरीक्षण कराएं और आवश्यक व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए संबंधित विभाग को निर्देशित करें। पेयजल की नियमित उपलब्धता, सार्वजनिक प्रसाधन के ताले को खुलवाना,गंदगी की सफाई तथा नियमित रखरखाव जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर आम नागरिकों को राहत दी जा सकती है।
बहरहाल,अब देखने वाली बात यह होगी कि आम जनता की समस्याओं के निराकरण के लिए आयोजित होने वाले जनदर्शन स्थल की इन बुनियादी समस्याओं को दूर करने के लिए जिले के कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारी कितनी गंभीरता दिखाते हैं। क्या प्रशासन आम नागरिकों को स्वच्छ पेयजल और उपयोग योग्य प्रसाधन की सुविधा उपलब्ध कराकर व्यवस्था में सुधार करेगा,या फिर अपनी समस्याएं लेकर आने वाले लोगों को इन परेशानियों से आगे भी जूझना पड़ेगा?



