प्रेम प्रसंग और पुरानी रंजिश के चलते गाँव लिम्हा में दिया गया था वारदात को अंजाम
मुंगेली/ जिले से एक बड़ी न्यायिक खबर सामने आई है। प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सोम की अदालत ने हत्या और जानलेवा हमले के एक बेहद गंभीर मामले में त्वरित व ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायालय ने जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले मुख्य अभियुक्त हीरालाल निषाद और उसके बेटे देवचरण उर्फ सूरज निषाद को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई है। इसके साथ ही अपराध में शामिल सह-आरोपी महिला गंगोत्री बाई को भी विभिन्न धाराओं के तहत सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया गया है।
यह पूरा मामला थाना सिटी कोतवाली मुंगेली के अंतर्गत आने वाले ग्राम लिम्हा का है, जहाँ पुरानी रंजिश और प्रेम प्रसंग के शक में एक पूरे परिवार पर लाठी,पत्थर और टांगी से जानलेवा हमला किया गया था।
क्या था पूरा मामला और क्यों हुआ था विवाद?
मामले की जड़ में प्रेम प्रसंग का संदेह और पड़ोसियों के बीच की पुरानी रंजिश थी। घटना दिनांक 26 नवंबर 2023 की रात करीब 8:00 से 8:30 बजे के बीच की है। प्रार्थी परिवार परदेशी बाई पति भागवत निषाद के मुताबिक,आरोपी हीरालाल निषाद का परिवार उनके बेटे मनोहर के साथ अपनी बेटी सरोजनी के प्रेम संबंध का शक करता था। इसी बात को लेकर दोनों परिवारों में पिछले 2-3 सालों से विवाद चल रहा था।
घटना की रात,आरोपी हीरालाल निषाद,उसका बेटा देवचरण उर्फ सूरज और पत्नी गंगोत्री बाई एकजुट होकर आए और प्रार्थी के घर के सामने गाली-गलौज करने लगे। जब प्रार्थी के पति भागवत निषाद ने उन्हें गाली देने से मना किया,तो आरोपियों ने चिल्लाते हुए कहा,आज तुम्हें और तुम्हारे पूरे परिवार को जान से खत्म कर देंगे।
इसके बाद आरोपियों ने लाठी और पत्थरों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। भागवत निषाद के सिर,कंधे और पैर पर गंभीर चोटें आईं। बीच-बचाव करने आई उनकी बेटियों (खुशबू,रोशनी,राधिका) और बहू (रिका) को भी आरोपियों ने बुरी तरह पीटा। हमले के बाद भागवत निषाद को 108 एम्बुलेंस से जिला अस्पताल मुंगेली ले जाया गया,जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। सिटी कोतवाली मुंगेली में अपराध क्रमांक 492/2023 के तहत मामला दर्ज कर पुलिस ने आरोपियों को 27 नवंबर 2023 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
न्यायालय का कड़ा रुख और सुनाई गई सजा का विवरण
माननीय न्यायाधीश राकेश कुमार सोम की अदालत ने अभियोजन पक्ष शासन की ओर से लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर द्वारा प्रस्तुत 17 गवाहों,मेडिकल रिपोर्ट और पुख्ता सबूतों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी पाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समाज में इस तरह के जघन्य कृत्यों के लिए कोई जगह नहीं है।
आरोपी हीरालाल निषाद को धारा 302/149 के तहत आजीवन सश्रम कारावास और ₹500 का अर्थदंड,धारा 148 के तहत 01 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹100 का अर्थदंड।
धारा 323/149 प्रत्येक आहत के संबंध में 01-01 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹100-₹100 का अर्थदंड।
आरोपी देवचरण उर्फ सूरज निषाद को धारा 302/149:आजीवन सश्रम कारावास और ₹500 का अर्थदंड।
धारा 148:01 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹100 का अर्थदंड।
धारा 323/149:प्रत्येक आहत के संबंध में 01-01 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹100-₹100 का अर्थदंड।
आरोपी गंगोत्री बाई को हत्या की मुख्य धारा से राहत मिली, लेकिन बलवा और जानलेवा हमले की साजिश व मारपीट में शामिल होने के लिए कोर्ट ने कड़ी सजा दी।
धारा 323/149:प्रत्येक पीड़ित के संबंध में 01-01 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹100-₹100 का अर्थदंड।
धारा 148: 01 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹100 का अर्थदंड।
अदालत का संदेश:कानून व्यवस्था सर्वोपरि
मुंगेली कोर्ट के इस त्वरित फैसले से क्षेत्र के अपराधियों में हड़कंप है। इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और न्याय में देरी भले हो सकती है,लेकिन अंधेर नहीं। पीड़ित परिवार ने इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया है और कहा है कि कोर्ट ने न्याय की गरिमा को बरकरार रखा है।
वही खास बात ये है कि जनवरी 2026 से 13 जुलाई 2026 तक लोक अभियोजक रजनीकांत ठाकुर के द्वारा किए गए कुशल पैरवी में 18 प्रकरणों में सजा सुनाई जा चुकी है। जो कि एक बड़ी उपलब्धि है



