मुंगेली/परंपरा,श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला जब मुंगेली केशरवानी महिला समिति ने हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आंवला नवमी का पर्व धूमधाम से मनाया। यह आयोजन सुरीघाट स्थित सत्येंद्र प्रियंक गुप्ता के श्रीराम नर्सरी एंड लैंडस्केपिंग में संपन्न हुआ, जहां महिलाओं ने श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा-अर्चना की।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार,आंवला नवमी के दिन भगवान विष्णु आंवले के वृक्ष में निवास करते हैं इसलिए इस दिन वृक्ष की पूजा करने से सौभाग्य,सुख-समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि आंवला वृक्ष के नीचे भोजन करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है और आंवले का सेवन अमृत तुल्य माना गया है। इस दिन माता लक्ष्मी का पूजन करने से घर में धन और सुख का वास होता है।
पूजन विधि के बाद समिति की महिलाओं ने अपने घरों से बने पारंपरिक व्यंजनों – जैसे फरा,पीठा, चौसेला,गुझिया,खीर-पूरी,पुलाव और मिठाइयों का आनंद लिया। आयोजन में स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ मनोरंजन और सौहार्द का रंग भी देखने को मिला। महिलाओं ने कुर्सी दौड़,अंताक्षरी और हाऊजी जैसे खेलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पूरे वातावरण में उत्सव का उल्लास भर दिया।
आयोजन के दौरान महिलाओं ने कहा कि ऐसे पर्व न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं,बल्कि समाज में एकता और सौहार्द का संदेश भी देते हैं। कार्यक्रम का समापन सभी ने भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के जयकारों के साथ किया।

इस अवसर पर समिति की महिलाओं ने संदेश दिया कि—
“आंवला नवमी जैसे पर्व हमें प्रकृति,परंपरा और स्वास्थ्य से जोड़ते हैं। आंवला न केवल पूजनीय वृक्ष है,बल्कि यह जीवन में अमृत समान सेहत का स्रोत भी है।”



