मुंगेली/जिले की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया,जब जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान संगठनात्मक अनुशासन तार-तार होता दिखा। SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) तथा धान खरीदी निगरानी समिति के गठन को लेकर बुलाई गई इस बैठक में तीखी बहस,आरोप-प्रत्यारोप,धक्का-मुक्की और विवाद की स्थिति ने पार्टी की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया।
एआईसीसी के द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में संगठन सृजन के तहत नए सिरे से जिले में संगठन का विस्तार करने का निर्णय कुछ कांग्रेसी पदाधिकारियों को रास नहीं आ रहा है यही वजह है कि अब वे पदाधिकारी विवाद करने की स्थिति निर्मित कर रहे हैं
वही इस बैठक में जिलाध्यक्ष घनश्याम वर्मा,वरिष्ठ पदाधिकारी,महिला पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे। चर्चा सामान्य रूप से शुरू हुई लेकिन जल्द ही माहौल बिगड़ने लगा। सूत्रों के अनुसार, जिलाध्यक्ष घनश्याम वर्मा द्वारा लगातार हस्तक्षेप किए जाने और अन्य नेताओं की बातों को बीच में रोकने पर असंतोष बढ़ता गया। इसी बीच लोरमी ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष नरेश पाटले और एक वरिष्ठ नेता के बीच नोकझोंक शुरू हो गई।
देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच कथित रूप से धक्का-मुक्की और गाली-गलौज तक की नौबत आ गई। अचानक हुए इस विवाद से कांग्रेस भवन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कुछ देर के लिए हालात तनावपूर्ण हो गए। अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के हस्तक्षेप के बाद दोनों पक्षों को किसी तरह अलग कर शांति बहाल की गई।
गौरतलब है कि जिले के एक कांग्रेस नेता का विवादित व्यवहार और कथित दबंगई कोई नई बात नहीं है। पार्टी कार्यक्रमों और बैठकों में पूर्व में भी उनके खिलाफ अभद्र भाषा और अनुशासनहीनता की शिकायतें उठ चुकी हैं। गुरुवार की घटना ने एक बार फिर संगठन में बढ़ती गुटबाजी और नेतृत्व की कमजोर पकड़ पर सवाल खड़े कर दिए।
बैठक समाप्त होने के बाद कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने घटना पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की हरकतें पार्टी की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुँचाती हैं। उनके अनुसार, जब संगठन को मज़बूत करने और जनता के मुद्दों पर एकजुट होने की जरूरत है तब इस प्रकार की आंतरिक कलह आगामी राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी के लिए घातक साबित हो सकती है।
सूत्रों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्रदेश कांग्रेस कार्यालय तक पहुँचा दी गई है। उच्च स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और संबंधित पदाधिकारियों से रिपोर्ट मांगे जाने की संभावना जताई जा रही है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी इस अनुशासनहीनता पर क्या कार्रवाई करती है। कांग्रेस भवन में हुआ यह हंगामा जिले की राजनीति में नई हलचल पैदा कर चुका है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक प्रभाव देखे जा सकते हैं।



