मुंगेली/छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की मुंगेली इकाई द्वारा जिले के कलेक्टर कुंदन कुमार को मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से हाल ही में लागू की गई ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता का तीखा विरोध करते हुए इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की गई।
ज्ञापन सौंपते समय व्यापारी समुदाय में गहरी चिंता और असंतोष स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। चेम्बर पदाधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में स्थानीय बाजार पहले से ही गंभीर आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। ऑनलाइन कंपनियों और बड़े कॉर्पोरेट नेटवर्क के बढ़ते प्रभाव के कारण छोटे और मध्यम व्यापारियों का कारोबार लगभग 50 प्रतिशत तक सिमट चुका है। ऐसी स्थिति में नया ट्रेड लाइसेंस शुल्क व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है।
चेम्बर प्रतिनिधियों ने कहा कि किराना,मेडिकल,मनिहारी,इलेक्ट्रॉनिक और कपड़ा जैसे पारंपरिक व्यवसाय पहले ही मंदी की मार झेल रहे हैं। व्यापारियों को जीएसटी,आयकर,खाद्य सुरक्षा अधिनियम,ड्रग लाइसेंस,मंडी लाइसेंस और संपत्ति कर जैसी कई प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। अब दुकान के क्षेत्रफल के आधार पर 3 से 6 रुपये प्रति वर्गफीट तक ट्रेड लाइसेंस शुल्क लगाना एक नए प्रकार के संपत्ति कर के समान है जिससे छोटे दुकानदारों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो जाएगी।
चेम्बर ने सरकार की नीतियों में बार-बार हो रहे बदलावों पर भी सवाल उठाए। पदाधिकारियों ने कहा कि पूर्व में गुमास्ता एवं ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई थी जिससे व्यापारियों को राहत मिली थी। लेकिन अब गुमटी से लेकर बड़े मॉल तक सभी के लिए ट्रेड लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया है जिससे व्यापारी वर्ग असमंजस और असुरक्षा की स्थिति में है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में व्यापारी आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। चेम्बर ने प्रशासन से व्यापारियों की व्यावहारिक कठिनाइयों को समझते हुए निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की।
इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष प्रेम आर्य,प्रदेश मंत्री प्रवीण वैष्णव,अध्यक्ष नरेन्द्र कोटड़िया,महामंत्री कोमल शर्मा,उपाध्यक्ष गुरजीत मक्कड़,मन्नू श्रीवास्तव,नितेश ललवानी,अमितेश आर्य,राम तलरेजा सहित बड़ी संख्या में व्यापारी उपस्थित रहे और एक स्वर में ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता का विरोध दर्ज कराया।




