भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ी योजना;पाइपलाइन फटी,टंकियों के पास गंदगी का अंबार और ग्रामीण भीषण गर्मी में प्यासे
मुंगेली/केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘नल-जल योजना’, जिसका उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था,जिसके लिए सरकार द्वारा करोड़ो रुपए खर्च हो रहा लेकिन आमलोगों के लिए ये योजना सिर्फ कागजों में ही नजर आ रही है यही वजह है कि अब मुंगेली जिले में भ्रष्टाचार और सरकारी उदासीनता का प्रतीक बनती जा रही है। मार्च के महीने में ही सूरज के तेवर तल्ख हो गए हैं,और आने वाले भीषण गर्मी के दिनों को लेकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जमीनी हकीकत यह है कि नल सिर्फ ‘शो-पीस’ बनकर रह गए हैं और महिलाएं आज भी दूर दराज से पानी ढोने को मजबूर हैं।

कागजी दावे बनाम जमीनी हकीकत
विभागीय आंकड़ों में जिले के गांवों को ‘हर घर जल’ से संतृप्त दिखाया जा रहा है,लेकिन हकीकत इसके उलट है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से योजना में जमकर बंदरबांट हुई है। बिछाई गई पाइपलाइन इतनी घटिया है कि दबाव पड़ते ही जगह-जगह से फट रही है। लीकेज के कारण सड़कों पर पानी बह रहा है,जबकि घरों के नलों में हवा भर रही है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश
भैंसामुड़ा निवासी ओमप्रकाश शर्मा ने सिस्टम पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा,”ठेकेदार और अधिकारियों की जेबें भरने का खामियाजा आज हमें भुगतना पड़ रहा है। पाइप घटिया डाले गए हैं,जो बार-बार टूट रहे हैं।” वहीं,ग्राम पंचायत संबलपुर के सरपंच नंदू ने सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता से भारी समझौता किया गया है। उन्होंने बताया कि काम अधूरा होने के बावजूद कागजों पर इसे पूर्ण दिखाकर इतिश्री कर ली गई है। सरपंच ने अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।वही कई ग्रामीणों का कहना है कि हमारी समस्याओं पर ध्यान देने वाला कोई नहीं है जिन्हें हमारे द्वारा मतदान करके चुना जाता है वही सत्ता में आने के बाद हमारी तरफ मुड़ कर नहीं देखते यही वजह है कि हमारी समस्याओं पर कोई सुनवाई और समाधान नहीं हो पाता

अधिकारियों की अजीबोगरीब दलीलें
जनता के आक्रोश के बीच कार्यपालन अभियंता कमल प्रसाद कंवर का पक्ष कुछ अलग ही है। उनका कहना है कि पाइपलाइन मानकों के अनुसार ही है और लीकेज को वह एक ‘सामान्य तकनीकी समस्या’ बता रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि भैंसामुड़ा में खुड़िया जल प्रदाय योजना से पानी देने का लक्ष्य था,लेकिन फिलहाल ट्यूबवेल से आपूर्ति की जा रही है। विभाग का दावा है कि काम पूरा कर पंचायत को सौंप दिया गया है,लेकिन पंचायतें इस ‘सफेद हाथी’ को पालने को तैयार नहीं हैं।
गंदगी और बीमारियां:एक और मुसीबत
योजना की विफलता सिर्फ पानी की कमी तक सीमित नहीं है। गांवों में बनाई गई पानी की टंकियों के रखरखाव का बुरा हाल है। टंकियों के आसपास भारी गंदगी और जलजमाव की स्थिति है,जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। जो नल लगाए गए हैं,वे कई जगहों पर टूट चुके हैं या उनमें कभी पानी की एक बूंद तक नहीं आई।
जिम्मेदारों से सवाल
गुणवत्ता:जब करोड़ों का बजट था,और पाइपलाइन मानक के अनुरूप लगाया गया था बार-बार पाइप क्यों फट रही है?
जवाबदेही:कागजों पर काम पूरा दिखाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
गर्मी की तैयारी:यदि मार्च में यह हाल है,तो मई-जून की तपती गर्मी में ग्रामीणों की प्यास कैसे बुझेगी?
मुंगेली जिले की यह स्थिति शासन-प्रशासन के उन दावों की पोल खोलती है जिनमें ‘सुशासन’ और ‘पारदर्शिता’ की बात कही जाती है। अब देखना होगा कि क्या प्रशासन अपनी नींद से जागता है या ग्रामीण इस साल भी प्यासे रहने को मजबूर होंगे।



