मुंगेली/जिला महामंत्री संजय यादव ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए वर्ष 2026 के बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह बजट एक साफ संदेश देता है कि गांव, किसान और खेती अब केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं रह गए हैं। संजय यादव के अनुसार यह पहली बार है जब देश के बजट में किसान का नाम तक नहीं लिया गया है। न तो सिंचाई के लिए कोई नई घोषणा की गई है न खाद पर राहत की बात है और न ही खेतिहर मजदूरों के लिए किसी तरह का बजटीय प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह बजट केवल किसानों के लिए ही नहीं,बल्कि आम जनता के हर वर्ग के लिए निराशाजनक है। स्वास्थ्य,शिक्षा,सामाजिक विकास,ग्रामीण विकास से लेकर शहरी विकास तक लगभग हर क्षेत्र में कटौती ही कटौती देखने को मिलती है। सफल बीमा योजना,यूरिया सब्सिडी,गरीब कल्याण योजनाएं और गरीबों के लिए चलाई जा रही गैस योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में भी बजट घटा दिया गया है।
संजय यादव ने आरोप लगाया कि इस बजट में ओबीसी,अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़ी योजनाओं में भी भारी कटौती की गई है। यहां तक कि बच्चों की छात्रवृत्ति की राशि में भी कमी कर दी गई है,जो गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए बड़ा झटका है।
उन्होंने आगे कहा कि देश में लगातार बढ़ रही महंगाई को नियंत्रित करने के लिए बजट में कोई ठोस उपाय नहीं किया गया है। बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है,लेकिन युवाओं के लिए रोजगार सृजन को लेकर कोई प्रभावी योजना सामने नहीं आई है। विदेशी बाजारों में हो रही हलचल का देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को रोकने के लिए भी बजट में कोई स्पष्ट संकल्प नजर नहीं आता।
अंत में संजय यादव ने कहा कि भारत आज आर्थिक,सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहा है,लेकिन 2026 का बजट इन सवालों का जवाब देने के बजाय जनता को और अधिक चिंता में डालने वाला साबित हुआ है। उन्होंने मांग की कि सरकार बजट की प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करे और किसान,गरीब,मजदूर,युवा तथा कमजोर वर्गों के हित में ठोस कदम उठाए।



