मुंगेली/शहीदों एवं स्वर्गीय पुलिस कर्मियों की पावन स्मृति में पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल के नेतृत्व में 8 सितंबर से आयोजित हो रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के छठवें दिन भव्य रुक्मिणी विवाह उत्सव का आयोजन किया गया। इस अनोखे आयोजन में पुलिस परिवार के सदस्य दो हिस्सों में बंट गए—एक पक्ष ने बराती की भूमिका निभाई तो दूसरा पक्ष घराती बनकर विवाह संस्कार में शामिल हुआ।

हल्दी और संगीत से हुई शुरुआत
विवाह उत्सव की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ दोपहर में हल्दी कार्यक्रम से हुई। इसमें पुलिस परिवार की महिलाओं ने बढ़चढकर हिस्सा लिया,इसके बाद शाम को संगीत संध्या आयोजित की गई,जहाँ पुलिस परिवार के सदस्य और अतिथि नाच-गान में शामिल होकर झूम उठे।
श्रीकृष्ण झांकी और गाजे-बाजे संग निकली बारात
बराती पक्ष बने पुलिस कर्मियों ने पुराने पुलिस कॉलोनी से श्रीकृष्ण की झांकी और गाजे-बाजे के साथ भव्य बारात निकाली। ढोल-नगाड़ों की गूंज और जयकारों के बीच बारात नगर के पंडरिया रोड स्थित आर.के. पैलेस मैरिज हॉल पहुँची।

घरातियों ने किया आत्मीय स्वागत
मैरेज हॉल पहुँचने पर घराती पक्ष बने पुलिस कर्मियों ने आत्मीयता और परंपरा के साथ बारात का स्वागत किया। इस दौरान पूरे माहौल में वास्तविक विवाह जैसी छटा बिखरी हुई थी।
भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी का विवाह संस्कार
इसके बाद पूरे वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी का विवाह संपन्न कराया गया। विवाह संस्कार के दौरान श्रद्धा और भक्ति का गहन वातावरण देखने को मिला।

भोज और उल्लास का वातावरण
विवाह संपन्न होने के बाद बराती,घराती और सभी आमंत्रित अतिथियों के लिए भव्य भोज का आयोजन किया गया। भोज के साथ ही नृत्य-गान और उत्सव का आनंद सबने मिलकर लिया।
अधिकारी-कर्मचारियों की मौजूदगी और जनभावना
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल सहित विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। उन्होंने भी इस अनूठे और धार्मिक आयोजन का भरपूर आनंद लिया।
जनता ने कहा कि ऐसा आयोजन पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में पहली बार हुआ है,जिसने शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने के साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को भी सजीव कर दिया।



