मुंगेली/देश,प्रदेश में डबल इंजन की सरकार द्वारा सुशासन और चहुंमुखी विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। सरकारी विज्ञापनों और भाषणों में विकास की गंगा बहने की बात कही जाती है,लेकिन मुंगेली की जमीनी हकीकत इन दावों की सच्चाई उजागर करती नजर आ रही है।यही वजह है कि सरकार की ये दावें आमलोगों के लिए सिर्फ जुमला साबित हो रहा है
नेशनल हाईवे 130 के अंतर्गत आने वाला मुंगेली-कवर्धा मुख्य मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली के कारण चर्चा में है। बाघामुड़ा से लेकर नगर के सेंट जेवियर स्कूल तक लगभग 7 किलोमीटर की सड़क इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहां सफर करना लोगों के लिए खतरे से खाली नहीं है। सड़क पर डामर से ज्यादा गड्ढे नजर आते हैं,जिनकी वजह से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
दर्जनों गांवों की लाइफलाइन बना संकट
यह मार्ग केवल शहर को जोड़ने वाली सड़क नहीं बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों की जीवनरेखा है। ग्रामीण अपने दैनिक कामकाज,व्यापार,शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए इसी रास्ते से मुंगेली आते-जाते हैं।
लेकिन सड़क की हालत ऐसी हो चुकी है कि बाइक सवारों से लेकर चारपहिया वाहन चालकों तक सभी को हर पल दुर्घटना का डर बना रहता है। बारिश के समय गड्ढों में पानी भर जाने से खतरा और भी बढ़ जाता है।
स्थानीय लोगों के द्वारा कई बार शिकायत और मांग के बावजूद अब तक सड़क की मरम्मत या निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
‘अजेय योद्धा’ के क्षेत्र में विकास क्यों पराजित?
मुंगेली विधानसभा की राजनीति में वर्तमान विधायक को “अजेय योद्धा” कहा जाता है। चुनावी मैदान में उनकी जीत का रिकॉर्ड मजबूत रहा है।ऐसा नहीं है कि उनको आम जनता की समस्याओं के बारे में जानकारी नहीं है,लेकिन इन समस्याओं को वें गंभीरता से नहीं लेते है,यही वजह है कि उनके क्षेत्र की जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है
लेकिन अब सवाल उठने लगे हैं कि जब नेता हर चुनाव में जीत का परचम लहरा रहे हैं,तो उनके ही क्षेत्र की मुख्य सड़क वर्षों से बदहाल क्यों है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस प्रतिनिधि को जनता ने बार-बार विश्वास देकर विधानसभा भेजा,उसके क्षेत्र की बुनियादी सुविधाएं ही उपेक्षा का शिकार हैं।
जनता का दर्द:“हर दिन मौत को मात देकर गुजरते हैं”
क्षेत्र के नागरिकों में सड़क की स्थिति को लेकर गहरी नाराजगी देखी जा रही है। कई लोग कहते हैं कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं,लेकिन जमीनी स्तर पर नतीजे नजर नहीं आते।
स्थानीय नागरिको के द्वारा अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहाकि—
“हम लोग हर दिन मौत को मात देकर इस सड़क से गुजरते हैं। क्या इसी को विकास कहते हैं? अगर मुख्य मार्ग का यह हाल है,तो अंदरूनी गांवों की स्थिति की कल्पना करना भी मुश्किल है।”
7 किमी सड़क के लिए क्या नहीं है फंड?
लोगों का सवाल है कि आखिर महज 7 किलोमीटर सड़क का निर्माण क्यों नहीं हो पा रही है।क्या सरकार के पास इसके लिए फंड नहीं है जबकि सरकार अन्य कार्यों में अपनी वाहवाही के लिए बड़े पैमाने पर खर्च कर रही है,तो आम जनता की बुनियादी सुविधा पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा।
नागरिकों का कहना है कि सड़क की यह स्थिति सरकार और प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है।
मरम्मत के नाम पर डाल दी गिट्टी
पूरी तरह से जर्जर हो चुके इस सड़क का निर्माण के लिए आम जनता के द्वारा जब-जब आवाज उठाया गया तो संबंधित विभाग के द्वारा मरम्मत के नाम पर गिट्टी डाल दिया गया लेकिन इससे राहगीरों को सुविधा मिलने के बजाय उनकी समस्या और बढ़ गई,कारण है सड़क में डाली गई गिट्टी से दो पहिया वाहन फिसल कर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे है जिससे आए दिन वो चोटिल हो रहे है वही कई लोगों का ये भी कहना है कि संबंधित विभाग के द्वारा जिस तरह से बार बार इस सड़क के मरम्मत को लेकर जितनी राशि खर्च किया गया उतने में तो यह सड़क ही नई बन गई होती

अब जनता का भरोसा डगमगाने लगा
लगातार उपेक्षा के कारण लोगों का भरोसा सरकार और जनप्रतिनिधियों से धीरे-धीरे कम होता नजर आ रहा है। नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही सड़क का निर्माण नहीं हुआ तो जनता अपने मताधिकार के जरिए आने वाले समय में जवाब देने के लिए तैयार बैठी है।
जनआंदोलन का रूप ले सकता है आक्रोश
मुंगेली-कवर्धा मार्ग की यह 7 किलोमीटर की दूरी अब केवल सड़क का मामला नहीं रह गया है। यह सरकार और स्थानीय प्रशासन की इच्छाशक्ति की परीक्षा बन चुका है।
यदि जल्द ही इस सड़क का कायाकल्प नहीं हुआ,तो क्षेत्र में बढ़ता जनाक्रोश आने वाले समय में जनआंदोलन का रूप भी ले सकता है।



