मुंगेली/पूर्णिमा की रात श्रद्धा और भक्ति से आलोकित हो उठी जब नगर की जीवनदायिनी आगर नदी के तट पर देव दीपावली के पावन पर्व पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सैकड़ों महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचकर भगवान शिव की आराधना की और दीपदान कर नदी के जल में आस्था के दीप प्रवाहित किए। दीपों की झिलमिलाहट से पूरा नदी तट स्वर्गिक दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।
देव दीपावली का यह पर्व भगवान शिव द्वारा त्रिपुरासुर राक्षस के वध से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि जब त्रिपुरासुर ने तीनों लोकों में अत्याचार मचाया,तब देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की। भगवान शिव ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन त्रिपुरासुर का वध किया और देवताओं को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई। इसी विजय की स्मृति में देवताओं ने वाराणसी के गंगा घाटों पर दीप प्रज्वलित कर दीपावली मनाई,जो आगे चलकर देव दीपावली के रूप में प्रसिद्ध हुई।
इसी परंपरा के अनुसरण में मुंगेली नगर के लोगों ने भी इस पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया। महिलाएं नदी तट पर पहुंचकर भगवान शिव की आराधना में लीन दिखे। महिलाओं ने विधिवत पूजा-अर्चना कर दीप जलाए और परिवार की सुख-समृद्धि,शांति एवं आरोग्यता की कामना की।
पूरे नदी तट पर दीपों की कतारें सजी थीं,जिनकी रोशनी से वातावरण दिव्य और मनमोहक हो उठा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक,सभी ने इस अवसर पर हर्षोल्लास के साथ भागीदारी की।
देव दीपावली का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकता,प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा के संदेश का भी प्रसार करता है।



