
मुंगेली/जिला एवं सत्र न्यायालय मुंगेली की न्यायाधीश श्रीमती गिरिजा देवी मेरावी की अदालत ने थाना चिल्फी के अपराध क्रमांक 174/2025 में सह-आरोपी योगेन्द्र कुमार शर्मा की प्रथम अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने आरोपी के आपराधिक इतिहास,उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार 12 नवंबर 2025 को चिल्फी थाना पुलिस ने ग्राम रैतरा खुर्द स्थित हनुमान मंदिर के पास घेराबंदी कर संजय साहू उर्फ संजू को सट्टा-पट्टी खिलाते हुए रंगे हाथों पकड़ा। तलाशी में उसके पास से 75,700 रुपये नकद, एक मोबाइल फोन तथा सट्टा-पट्टी से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए।
पूछताछ और आगे की जांच में मुख्य आरोपी संजय साहू ने खुलासा किया कि वह पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से योगेन्द्र कुमार शर्मा के लिए 7 प्रतिशत कमीशन पर ‘खाईवाल’ के रूप में काम कर रहा था। पुलिस जांच में योगेन्द्र शर्मा के एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक खातों में सट्टे के पैसों के लेन-देन के प्रमाण मिलने पर उसे सह-आरोपी बनाया गया और प्रकरण में संगठित अपराध की धारा 112 (BNS) भी जोड़ी गई।
आरोपी का पक्ष
योगेन्द्र शर्मा की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि वह एक प्रतिष्ठित व्यक्ति है तथा आर्य ब्राह्मण समाज का उपाध्यक्ष और ग्राम पंचायत खैरा सेतगंगा का उपसरपंच प्रतिनिधि है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि साइबर सेल मुंगेली से विवाद के कारण उसे रंजिशवश मामले में फंसाया गया है और मूल एफआईआर में उसका नाम शामिल नहीं था।
अभियोजन का विरोध और आपराधिक रिकॉर्ड
सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर ने जमानत का कड़ा विरोध किया। पुलिस द्वारा प्रस्तुत केस डायरी से यह सामने आया कि योगेन्द्र शर्मा के खिलाफ फास्टरपुर थाना पुलिस तथा मुंगेली थाना पुलिस में जुआ एक्ट सहित विभिन्न धाराओं के तहत पहले से 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
न्यायालय की सख्त टिप्पणी
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा—
आवेदक एक आदतन अपराधी प्रतीत होता है।
केस डायरी के दस्तावेजों से अपराध में प्रथम दृष्टया संलिप्तता दिखाई देती है।
अग्रिम जमानत केवल असाधारण परिस्थितियों में दी जाती है,जो इस मामले में मौजूद नहीं हैं।
आरोपी को जमानत देने पर उसके फरार होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इन आधारों पर न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 482 के तहत दायर अग्रिम जमानत आवेदन को खारिज कर दिया।



