बिलासपुर। त्योहारों और आयोजनों में कानफोड़ू डीजे व साउंड सिस्टम बजाने वालों पर अब बड़ा शिकंजा कसने जा रहा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य शासन को सख्त अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि तीन सप्ताह के भीतर कोलाहल नियंत्रण अधिनियम को लागू किया जाए, वरना कड़ी कार्रवाई होगी।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की बेंच ने स्पष्ट कहा कि अब और देरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने टिप्पणी की कि तेज़ डीजे की आवाज़ लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रही है, खासकर दिल और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि सरकार को अब इस पर ठोस कदम उठाने ही होंगे। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को तय की गई है।
नए नियम होंगे बेहद सख्त
अभी तक शोरगुल करने पर सिर्फ ₹500 से ₹1,000 तक का मामूली जुर्माना लगाया जाता था,जिसे लोग हल्के में लेते थे। लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद—
डीजे संचालकों पर ₹5 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
बार-बार नियम तोड़ने वालों के उपकरण और वाहन जब्त कर लिए जाएंगे।
गंभीर उल्लंघन पर 5 साल तक की जेल और ₹1 लाख तक का जुर्माना भी संभव होगा।
लेज़र और बीम लाइट पर भी रोक
कोर्ट ने कहा कि सिर्फ तेज़ आवाज़ ही नुकसानदेह नहीं है,बल्कि आयोजनों में इस्तेमाल होने वाले लेज़र और बीम लाइट भी खतरनाक हैं। ये आम लोगों की आंखों को गंभीर क्षति पहुँचा सकते हैं। इसलिए सरकार को इन्हें नियंत्रित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
डीजे संचालकों की दलील
सुनवाई के दौरान डीजे संचालकों की ओर से हस्तक्षेप याचिका दायर की गई। उनका कहना था कि पुलिस कई बार उनके खिलाफ मनमानी कार्रवाई करती है। जब तक स्पष्ट गाइडलाइन न बने,तब तक एकतरफा कार्रवाई न की जाए।लेकिन हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि सरकार पहले ही इस अधिनियम को लागू करने का वादा कर चुकी है,अब कोई बहाना नहीं चलेगा।
आने वाले त्योहारों पर असर
इस आदेश के बाद साफ है कि आने वाले त्योहारों, शादी-ब्याह और सार्वजनिक आयोजनों में तेज़ डीजे और कानफोड़ू साउंड पूरी तरह बैन रहेगा। नियम तोड़ने वालों को न सिर्फ भारी जुर्माना भरना पड़ेगा बल्कि जेल की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है।



