मुंगेली/छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा शुक्रवार को जिला अध्यक्षों की सूची जारी होते ही मुंगेली जिले की राजनीति में उबाल आ गया है। सूची में एक बार फिर घनश्याम वर्मा को जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग इस निर्णय से नाराज़ है और इसे संगठन में “नए चेहरों के अवसर रोकने” वाला कदम बता रहा है।
संगठन को मजबूत करने के नाम पर बदली रणनीति
जानकारी के अनुसार, कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से बीते दिनों एआईसीसी के मार्गदर्शन में जिला अध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया पूरी की गई। इस दौरान नियुक्त पर्यवेक्षकों ने जिले में जाकर दावेदारों से आवेदन लिए,स्थानीय कार्यकर्ताओं से बातचीत की और विस्तृत रायशुमारी की। इसी रिपोर्ट के आधार पर संगठनात्मक बदलाव को अंतिम रूप दिया गया।
लेकिन मुंगेली में परिणाम सामने आते ही असंतोष चरम पर पहुंच गया।
वर्मा की वापसी से भड़का असंतोष
सूत्रों के मुताबिक जैसे ही यह जानकारी सामने आई कि जिले की कमान फिर से घनश्याम वर्मा को सौंपी जा रही है, कई कार्यकर्ताओं ने खुलकर विरोध जताना शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि लगातार एक ही व्यक्ति को जिम्मेदारी देने से संगठन में नई पीढ़ी के नेताओं को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिलता।
युवाओं का कहना है कि इससे आंतरिक लोकतंत्र प्रभावित होगा और एकतरफा नेतृत्व की स्थिति बन सकती है। कुछ स्थानीय नेता इस निर्णय को बदलने की मांग लेकर प्रदेश नेतृत्व से संपर्क साधने की तैयारी में हैं।
‘रायशुमारी का क्या मतलब?’कार्यकर्ताओं का बड़ा सवाल
सबसे तीखी प्रतिक्रिया उस मुद्दे पर आई है जिस पर पूरी चयन प्रक्रिया आधारित थी—रायशुमारी। कार्यकर्ताओं का कहना है:
“अगर जिला अध्यक्ष को यथावत ही रखना था,तो फिर इतने कार्यक्रम,बैठकें और रायशुमारी क्यों कराई गई?”
“प्रभारी द्वारा सैकड़ों कार्यकर्ताओं से राय लेने का क्या मतलब था जब उनकी राय को महत्व ही नहीं दिया गया?”
“ज्यादातर कार्यकर्ताओं ने मौजूदा जिला अध्यक्ष के कामकाज पर असंतोष जताया था, फिर भी पुराने चेहरे को दोबारा नियुक्त किया गया।”
इन सवालों ने प्रदेश संगठन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं,जिसे लेकर जिले में चर्चा तेज है।
कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगें
नाराज़ कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेतृत्व के सामने कई स्पष्ट मांगें रखी हैं
जिला संगठन में नए और सक्षम लोगों को जिम्मेदारी मिले।
घनश्याम वर्मा के पिछले कार्यकाल की गहन समीक्षा की जाए।
नेतृत्व चयन की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो।
स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय को वास्तविक महत्व दिया जाए।
वर्मा समर्थकों की दलील,अनुभव ही ताकत
दूसरी ओर घनश्याम वर्मा के समर्थकों ने उनके पुनर्नियुक्त होने का स्वागत किया है। उनका कहना है कि वर्मा के अनुभव और उनके मजबूत नेटवर्क से कांग्रेस को आने वाले चुनावों में फायदा होगा। समर्थकों के अनुसार,वर्मा ने अपने कार्यकाल में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत किया है और उसी निरंतरता को आगे बढ़ाना जरूरी है।
अब सबकी नजर प्रदेश नेतृत्व पर
मुंगेली में जारी इस राजनीतिक हलचल के बाद अब सभी की निगाहें प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की अगली चाल पर टिकी हैं। क्या नेतृत्व कार्यकर्ताओं की नाराज़गी को गंभीरता से लेकर कोई संशोधन करेगा? या फिर पुरानी टीम के भरोसे संगठन को एकजुट करने का प्रयास करेगा?
फिलहाल स्थिति बेहद गर्म है और आने वाले दिनों में जिले की कांग्रेस राजनीति में नए मोड़ आने की पूरी संभावना है। मुंगेली की सियासी तस्वीर किस दिशा में जाएगी यह अब प्रदेश नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर करेगा।



