मुंगेली/नगर के हृदय स्थल मल्हापारा में स्थित शंकर मंदिर,मुंगेली नगर का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। लगभग 250 वर्षों पुराना यह मंदिर भगवान शंकर को समर्पित है। यह मंदिर न केवल स्थापत्य की दृष्टि से विशेष है बल्कि इसकी धार्मिक महत्ता भी अत्यंत गहरी है। यह मंदिर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में स्थित है जो वास्तुशास्त्र के अनुसार सर्वोत्तम स्थान माना गया है। यहाँ के गर्भगृह में शिवलिंग,गणेश और कार्तिकेय की मूर्तियाँ विराजमान हैं। गर्भगृह के द्वार पर श्वेत और अश्वेत द्वारपाल तथा मंदिर के पीछे हनुमान जी की मूर्ति भी स्थापित है। पास में श्री खेमेंश्वर बाबा की समाधि है,जो प्राचीन नागा अखाड़े से जुड़े माने जाते हैं। यह मंदिर धार्मिक साधना के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का केंद्र भी रहा है।
यह मंदिर पंडा परिवार द्वारा संचालित किया जाता है। वर्तमान में मंदिर के मुख्य पुजारी गोस्वामी हैं जो परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं।


सन 1960 से सावन झूला उत्सव मनाया जा रहा है
नगर के प्रसिद्ध शंकर मंदिर में पिछले 1960 से सावन झूला स्थापित किया जा रहा है,झूला उत्सव के संचालनकर्ता एवं सेवक नर्मदा जायसवाल ने बताया कि नगर के प्रसिद्ध शंकर मंदिर में सन 1960 में सावन झूला उत्सव मनाए जाने को लेकर मंदिर प्रांगण में एक बैठक का आयोजन रखा गया था इस बैठक में प्रबुख रूप से कालीचरण शुक्ला,अंबिका साव,देवदत्त भट्ट,अंबादत्त भट्ट,मो.बशीर खान,पंचकौड देवांगन,तानसेन गौटिया सहित सैकड़ों की संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे जिनके द्वारा ये निर्णय लिया गया कि मंदिर प्रांगण में सावन झूला उत्सव मनाया जाएगा तब से आजतक सावन माह में ये उत्सव मनाया जाता है,इस उत्सव में श्री कृष्ण की झांकी सहित अन्य महत्वपूर्ण झाकियों की स्थापना किया जाता है जिसका पूरे नगर के लोग कई सालों से दर्शन करते आ रहे है

सावन झूला उत्सव में,खाटू श्याम की झांकी बना आकर्षण का केंद्र
इस बार के सावन झूला उत्सव की झांकी में खाटू श्याम की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है..इस झांकी के माध्यम से ये दिखाया गया है कि कैसे महाबली भीम के पौत्र बर्बरीक के द्वारा श्री कृष्ण को अपना शीश दान में दिया जा रहा है,बताया जाता है कि बर्बरीक के इस भक्ति भाव से ही प्रसन्न होकर भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक को वरदान देते हुए अपना श्याम नाम दिया और कहाकि तुम कलयुग में श्याम नाम से जाने जाओगे और तुम हारे का सहारा बनोगे और खाटू में निवास करोगे और जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा लेकर तुम्हारे पास अपनी परेशानी लेकर आएगा उसकी सभी मनोकामना पूरी होगी तभी से बर्बरीक का नाम खाटू में निवास करने के कारण खाटू श्याम के नाम से विश्व विख्यात हुए

मंदिर में धार्मिक आयोजन और जनसमूह की भागीदारी
शंकर मंदिर में रामनवमी,जन्माष्टमी,श्रावण सोमवारी,महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर विशेष पूजन और कीर्तन,प्रवचन,आरती कार्यक्रम आयोजित होते हैं,जिसमें मुंगेली सहित आसपास के गांवों के हजारों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। यहां धर्मशाला में बाहर से आए अतिथियों के लिए ठहरने की भी उत्तम व्यवस्था है।



