मुंगेली/जिले के लोरमी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मसना में हुए एक गंभीर मारपीट के मामले में माननीय सत्र न्यायालय मुंगेली ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को हत्या के प्रयास (धारा 307) के अपराध में 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹5000-₹5000 के अर्थदंड से दंडित किया है। यह निर्णय 27 मार्च 2026 को सत्र न्यायाधीश श्रीमती गिरिजा देवी मेरावी के न्यायालय द्वारा सुनाया गया।
क्या है पूरा मामला?
प्रकरण के अनुसार,घटना 14 जून 2024 की है,जब प्रार्थी चंद्रकांत कश्यप अपने घर की छत की ढलाई के लिए मिक्सर मशीन लेकर जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में आरोपी लोकनाथ कश्यप ने मशीन ले जाने से मना करते हुए विवाद शुरू कर दिया। हालांकि, चंद्रकांत कश्यप ने काम जारी रखा और छत की ढलाई शुरू कर दी।
अगले दिन सुबह करीब 11 बजे,जब चंद्रकांत कश्यप अपने पिता दिनेश कश्यप के साथ निर्माण सामग्री लेने जा रहा था,तब रास्ते में दोनों आरोपियों ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि लोकनाथ कश्यप डंडा और कमल कश्यप लोहे की गैती लेकर आए और गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी।
इसके बाद दोनों आरोपियों ने मिलकर चंद्रकांत कश्यप और उनके पिता पर जानलेवा हमला कर दिया। कमल कश्यप ने गैती से सिर पर वार किया, जबकि लोकनाथ कश्यप ने डंडे से हमला किया,जिससे दोनों को गंभीर चोटें आईं।
मौके पर मौजूद लोगों ने किया बीच बचाव
घटना के समय कुलदीप कश्यप,नरेंद्र कश्यप,साकेत कश्यप और अशोक साहू मौके पर मौजूद थे,जिन्होंने बीच-बचाव कर किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया।
सीसीटीवी फुटेज बना निर्णायक साक्ष्य
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि पूरी घटना पास के एक मेडिकल स्टोर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। इस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया,जिसने अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूत किया।
13 गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट ने मजबूत किया केस
अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में 13 गवाहों को पेश किया और डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर पहले से दर्ज धाराओं (294, 506,323/34) में धारा 307 (हत्या का प्रयास) भी जोड़ी गई।
न्यायालय का निष्कर्ष
सभी साक्ष्यों,गवाहों और सीसीटीवी फुटेज के गहन परीक्षण के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आरोपियों ने पूर्व नियोजित तरीके से हमला किया और उनकी मंशा पीड़ितों की हत्या करने की थी।
प्रकरण की विवेचना निरीक्षक अखिलेश कुमार वैष्णव (थाना लोरमी) द्वारा की गई थी। वहीं अभियोजन की ओर से पैरवी लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर ने की।
पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा
न्यायालय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण,मुंगेली को निर्देशित किया है कि पीड़ितों को उचित क्षतिपूर्ति राशि दिलाने के लिए आवश्यक जांच कर कार्रवाई की जाए।
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक तकनीक,विशेषकर सीसीटीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य,न्याय दिलाने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।



