मुंगेली/राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। अपनी मांगों को लेकर एनएचएम कर्मचारी पिछले एक महीने से हड़ताल पर हैं, लेकिन अब तक सरकार और कर्मचारियों के बीच किसी भी तरह का समाधान नहीं निकल सका है। प्रदेशभर में जारी इस आंदोलन के तहत मुंगेली जिले में भी कर्मचारियों ने सोमवार को सरकार के दमनकारी आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया।
दरअसल,सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर ड्यूटी पर लौटने का निर्देश दिया है। इसमें यह भी कहा गया है कि आदेश का पालन न करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा। सरकार के इस कदम को कर्मचारी संघ ने दमनकारी और धमकी भरा बताया है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
एनएचएम कर्मचारी लंबे समय से अपनी ग्रेड पे, सेवा का नियमितीकरण और वेतन वृद्धि जैसी प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे दिन-रात जनसेवा में जुटे रहते हैं,लेकिन उनका भविष्य असुरक्षित है। इसलिए जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
“सरकार संवेदनशील नहीं”
कर्मचारी संगठन ने बताया कि अब तक 170 से अधिक बार ज्ञापन विधायक,मंत्री और सत्ताधारी दल के नेताओं को सौंपे जा चुके हैं,लेकिन सरकार गंभीरता से विचार करने के बजाय केवल धमकियों और दमनकारी रवैये का सहारा ले रही है। संगठन का आरोप है कि सरकार कर्मचारियों को निकालकर नई भर्ती की धमकी दे रही है, जबकि यह पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
आंदोलन होगा और उग्र
कर्मचारी संघ का कहना है कि यदि सरकार प्रशासनिक दमन की नीति अपनाती है तो वे भी संवैधानिक तरीके से उसका जवाब देंगे। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज व उग्र होगा।
राज्यपाल को सामूहिक इच्छामृत्यु की मांग सौंपी जाएगी।
जेल भरो आंदोलन की तैयारी की जा रही है।
भारी संख्या में कर्मचारियों की भागीदारी
धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में एनएचएम के संविदा कर्मचारी शामिल हुए। इनमें चिकित्सा अधिकारी (आयुष),सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी,स्टाफ नर्स, एएनएम,आरएमए,जेएसए फार्मासिस्ट,विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक,लेखा प्रबंधक,डाटा प्रबंधक, टीबी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और सीएमएचओ कार्यालय के कर्मचारी शामिल रहे।
एनएचएम कर्मचारियों का कहना है कि वे केवल अपनी रोज़ी-रोटी और भविष्य की सुरक्षा की लड़ाई लड़ रहे हैं। आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं ले लेती।



