मुंगेली/मुंगेली विकासखंड के अंतर्गत आने वाले नुनियाकछार गांव में छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा और संस्कृति से जुड़ा प्रमुख पर्व पोरा बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया।
समिति के अध्यक्ष नरसिंह निषाद ने जानकारी देते हुए बताया कि गांव में पिछले आठ वर्षों से समिति के माध्यम से इस परंपरा को जीवंत बनाए रखा गया है। परंपरा के अनुसार गांव में मिट्टी का बैल बनाकर उसकी सुंदर साज-सज्जा की जाती है। इसके बाद गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों की थाप पर पूरे गांव में बैल का शोभायात्रा निकाली जाती है।
इस अवसर पर ग्रामीणजन पूरे श्रद्धा और आस्था के साथ मिट्टी के बैल की पूजा-अर्चना करते हैं। शोभायात्रा के दौरान गांव में उत्सव जैसा माहौल बना रहता है और हर वर्ग के लोग इसमें उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। पूजा-पाठ और भ्रमण के बाद मिट्टी के बैल का पारंपरिक विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इस पर्व का उद्देश्य पशुपालन और कृषि संस्कृति के महत्व को याद दिलाना है। पोरा त्योहार न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है, बल्कि यह ग्रामीण समाज में आपसी भाईचारे और एकता का भी प्रतीक है।
इस दौरान नरसिंह निषाद,अतुल ठाकुर,सरोज यादव,दुर्गा यादव,तुलसी निषाद,शिव यादव,दुर्गेश निषाद,,सीधराम यादव,प्रदीप निषाद,रामकिशन यादव,टीली निषाद,सूरज ठाकुर,ध्रुव विश्वकर्मा सहित इस आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन शामिल हुए और पोरा पर्व को पूरे उत्साह के साथ संपन्न कराया



